{"_id":"6947ea126e4317025a01a838","slug":"jaldhara-tapasya-in-mursan-of-hathras-2025-12-21","type":"story","status":"publish","title_hn":"जलधारा तपस्या: कड़ाके की ठंड, सुबह तीन बजे 21 कलश पानी की धारा, रोज बढ़ेंगे 10 कलश, मंदिर पर पहुंच रहे लोग","category":{"title":"City & states","title_hn":"शहर और राज्य","slug":"city-and-states"}}
जलधारा तपस्या: कड़ाके की ठंड, सुबह तीन बजे 21 कलश पानी की धारा, रोज बढ़ेंगे 10 कलश, मंदिर पर पहुंच रहे लोग
Sun, 21 Dec 2025 06:08 PM IST
चमन शर्मा
अमर उजाला नेटवर्क, हाथरस
अमर उजाला नेटवर्क, हाथरस
Published by: चमन शर्मा
Updated Sun, 21 Dec 2025 06:08 PM IST
सार
यह जलधारा तपस्या 21 दिनों तक चलेगी। प्रतिदिन ब्रह्म मुहूर्त में सुबह तीन से साढ़े चार बजे तक किया जा रहा है। पहले दिन 11 कलशों से जलधारा लगाई गई थी, जबकि दूसरे दिन 21 कलशों का उपयोग किया गया।
विज्ञापन
जलधारा तपस्या करते महंत श्री शिव ऋषि महाराज
- फोटो : संवाद
विस्तार
कड़ाके की ठंड के बीच एक कपड़े में बैठकर लगातार डेढ़ घंटे तक सिर पर पानी की धारा पड़े तो इसे सोच कर ही ठंड लगने लगती है। एक महंत 21 दिन तक जलधारा तपस्या कर रहे हैं। पहले दिन 11, फिर 21 और फिर हर रोज 10-10 कलश पानी की संख्या बढ़ती जाएगी। ऐसे महंत के ऊपर जलधारा प्रवाहित करने के लिए श्रद्धालु मंदिर पहुंच रहे हैं।
विज्ञापन
हाथरस के मुरसान कस्बे में मथुरा मार्ग स्थित श्री संकटमोचन हनुमान मंदिर आश्रम में 21 दिवसीय दिव्य जलधारा तपस्या का आयोजन किया गया है। यह आयोजन 20 दिसंबर से शुरू हुआ है, जो 11 जनवरी तक चलेगा। आयोजन महंत श्री शिव ऋषि महाराज द्वारा विश्व कल्याण और सद्भावना के उद्देश्य से किया जा रहा है। रविवार को दूसरे दिन महंत श्री शिव ऋषि महाराज ने दिव्य जलधारा लगाई। इस दौरान ब्रह्म मुहूर्त में सुबह करीब तीन बजे क्षेत्र के कई लोगों ने मंदिर पहुंचकर कलशों में पानी भरकर जलधारा अर्पित की।
विज्ञापन
महंत ने बताया कि यह जलधारा तपस्या 21 दिनों तक चलेगी। इसका आयोजन प्रतिदिन ब्रह्म मुहूर्त में सुबह तीन से साढ़े चार बजे तक किया जाएगा। पहले दिन 20 दिसंबर को 11 कलशों से जलधारा लगाई गई थी, जबकि दूसरे दिन 21 दिसंबर को 21 कलशों का उपयोग किया गया। प्रतिदिन 10 कलशों की संख्या बढ़ती जाएगी। इस मौके पर राजू सर्राफ, कन्हैयालाल, धर्मवीर सिंह, ललित कुमार, सोनू शर्मा, महेश कुमार, मयंक अग्रवाल आदि लोग थे।
विज्ञापन