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Hathras News: राशन कार्डों में अनजान लोगों की सेंधमारी…हकदारों की थाली खाली
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प्रतीकात्मक चित्र।
- फोटो : Archive
जनपद के ग्रामीण क्षेत्रों में सरकारी राशन के वितरण में बड़ा खेल सामने आया है। महामौनी सहित कई गांवों में राशन कार्डों में अपात्रों और अनजान लोगों के नाम जोड़कर सरकारी गल्ले को डकारा जा रहा है। असली कार्डधारकों को इस बात की भनक तक नहीं है कि उनके परिवार की सूची में बाहरी लोग सेंध लगा चुके हैं। उनको पूरा राशन नहीं मिल रहा है।
ग्रामीण क्षेत्रों के दर्जनों कार्डधारकों ने जब ऑनलाइन पोर्टल और अपनी राशन पर्ची की जांच की तो उन्हें इसकी जानकारी हुई। कार्ड में परिवार के सदस्यों की संख्या अचानक बढ़ी हुई मिली। इन नए जुड़ें नामों में वें लोग शामिल हैं, जिनका कार्डधारक के परिवार से दूर-दूर तक कोई नाता नहीं है।
हैरानी की बात यह है कि घर के मौजूदा सदस्यों के नाम काट दिए गए हैं। फर्जी तरीके से जोड़े गए नामों को गलत तरीके से जुड़ना बताकर राशन नहीं दिया जा रहा, परिवार के जो नाम काट दिए गए, उनके नाम पर भी राशन नहीं दिया जा रहा। विभाग से राशन पूरा जारी किया जा रहा है।
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सूत्रों की मानें तो यह पूरा खेल विभागीय सांठगांठ से चल रहा है। कार्डधारक का अंगूठा ई-पॉस मशीन पर लगवा लिया जाता है, लेकिन उसे केवल उसके परिवार के वास्तविक सदस्यों के हिस्से का राशन दिया जाता है। कार्ड में जो ''''फर्जी'''' नाम जुड़े होते हैं, उनके हिस्से का राशन को कालाबाजारी के लिए बचा लेते हैं।कार्डधारकों ने जिला प्रशासन से मांग की है कि राशन कार्डों की सूची का पुनः सत्यापन कराया जाए।
आखिर कैसे हो रहा है खेल?
बिना किसी सत्यापन या दस्तावेज के राशन कार्ड में नए यूनिट जोड़ दिए गए। महामौनी सहित आसपास के इलाकों में यह शिकायतें सबसे ज्यादा हैं।कार्डधारकों को बिना बताए उनके डिजिटल रिकॉर्ड में बदलाव किया जा रहा है।बढ़े हुए नामों के राशन को खुले बाजार में ऊंचे दामों पर बेचा जा रहा है।
केस नंबर 1- महामौनी के रहने वाले शेर सिंह ने बतायाकि मेरा राशन कार्ड मेरी पत्नी प्रीती के नाम से है। इस राशन कार्ड में पांच लोगों के नाम फर्जी तौर पर जोड़ दिए गए हैं। इन नामों को हटवाने के लिए कई बार शिकायत की गई है, लेकिन अभी तक नामों को हटाया नहीं गया है। यहां तक मेरे कार्ड में जुड़े नामों के आधार पर हर माह खाद्यान्न की निकासी भी हो रही है।
केस नंबर 2-- सोनवीर ने बताया कि मेरी पत्नी के आधार कार्ड में सात यूनिट फर्जी तौर पर जोड़ दिए गए हैं और मेरे परिवार के सदस्यों के नाम काट दिए गए हैं। उन्होंने बताया कि मेरे परिवार के नाम काट दिए गए हैं, जिन्हें जुड़वाने के लिए वह लगातार चक्कर लगा रहे हैं।
अगर ऐसा है तो शिकायत के आधार पर कार्रवाई की जाएगी। मामले की जांच कराई जाएगी।
अतुल वत्स, डीएम।
राशन की कालाबाजारी के मामले भी आते रहे हैं सामने
केस नंबर 1-- गांव पीहुरा के निकट दो जनवरी 2026 की रात को सरकारी राशन का चावल पकड़े जाने के मामले में चार लोगों के खिलाफ पूर्ति निरीक्षक ने मुकदमा दर्ज कराया था। इन पर सरकारी चावल की कालाबाजारी करने का आरोप है। गांव पीहुरा के नजदीक श्रीराम धर्मकांटा पर पुलिस ने चावल से भरी गाड़ी को पकड़ा था। गाड़ी में लदे बोरों में करीब 183.10 क्विंटल चावल भरा पाया गया था।
केस नंबर 2-- 11 फरवरी 2025 को गांव सुल्तानपुर की सरकारी राशन की दुकान से नौ क्विंटल चावल केंद्र पर बच्चों को खिलाने के लिए थे, लेकिन चावल को ई-रिक्शा में भरकर सहपऊ में कालाबाजारी के लिए भेज दिया, जिसे भद्रकाली मंदिर के पास पुलिस ने पकड़ लिया।राशन विभाग की टीम के सत्यापन करने पर पाया कि वह चावल सरकारी ही है।पुलिस ने तीनों आरोपियों के खिलाफ रिपोर्ट दर्ज कर ली है।
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ग्रामीण क्षेत्रों के दर्जनों कार्डधारकों ने जब ऑनलाइन पोर्टल और अपनी राशन पर्ची की जांच की तो उन्हें इसकी जानकारी हुई। कार्ड में परिवार के सदस्यों की संख्या अचानक बढ़ी हुई मिली। इन नए जुड़ें नामों में वें लोग शामिल हैं, जिनका कार्डधारक के परिवार से दूर-दूर तक कोई नाता नहीं है।
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हैरानी की बात यह है कि घर के मौजूदा सदस्यों के नाम काट दिए गए हैं। फर्जी तरीके से जोड़े गए नामों को गलत तरीके से जुड़ना बताकर राशन नहीं दिया जा रहा, परिवार के जो नाम काट दिए गए, उनके नाम पर भी राशन नहीं दिया जा रहा। विभाग से राशन पूरा जारी किया जा रहा है।
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सूत्रों की मानें तो यह पूरा खेल विभागीय सांठगांठ से चल रहा है। कार्डधारक का अंगूठा ई-पॉस मशीन पर लगवा लिया जाता है, लेकिन उसे केवल उसके परिवार के वास्तविक सदस्यों के हिस्से का राशन दिया जाता है। कार्ड में जो ''''फर्जी'''' नाम जुड़े होते हैं, उनके हिस्से का राशन को कालाबाजारी के लिए बचा लेते हैं।कार्डधारकों ने जिला प्रशासन से मांग की है कि राशन कार्डों की सूची का पुनः सत्यापन कराया जाए।
आखिर कैसे हो रहा है खेल?
बिना किसी सत्यापन या दस्तावेज के राशन कार्ड में नए यूनिट जोड़ दिए गए। महामौनी सहित आसपास के इलाकों में यह शिकायतें सबसे ज्यादा हैं।कार्डधारकों को बिना बताए उनके डिजिटल रिकॉर्ड में बदलाव किया जा रहा है।बढ़े हुए नामों के राशन को खुले बाजार में ऊंचे दामों पर बेचा जा रहा है।
केस नंबर 1- महामौनी के रहने वाले शेर सिंह ने बतायाकि मेरा राशन कार्ड मेरी पत्नी प्रीती के नाम से है। इस राशन कार्ड में पांच लोगों के नाम फर्जी तौर पर जोड़ दिए गए हैं। इन नामों को हटवाने के लिए कई बार शिकायत की गई है, लेकिन अभी तक नामों को हटाया नहीं गया है। यहां तक मेरे कार्ड में जुड़े नामों के आधार पर हर माह खाद्यान्न की निकासी भी हो रही है।
केस नंबर 2
अगर ऐसा है तो शिकायत के आधार पर कार्रवाई की जाएगी। मामले की जांच कराई जाएगी।
अतुल वत्स, डीएम।
राशन की कालाबाजारी के मामले भी आते रहे हैं सामने
केस नंबर 1
केस नंबर 2