मंदिरों में बिखरेगी बसंती छटा, धार्मिक कार्यक्रम होंगे
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हाथरस। बसंत पंचमी के साथ शुक्रवार से ऋतु परिवर्तन हो जाएगा। बसंत पंचमी का यह त्योहार उत्साह और उमंग के साथ मनाया जाएगा। मंदिरों में बसंती शृंगारों की छटा बिखरेगी तो स्कूलों में भी कार्यक्रमों की धूम रहेगी। बसंत पंचमी के दिन विद्यादायिनी मां सरस्वती का प्राकट्य हुआ था, इसलिए इस दिन पढ़ने वाले बच्चों के हाथों से पूजन कराने से उन्हें मां सरस्वती की कृपा मिलती है। इस दिन स्कूलों में सरस्वती पूजन के लिए विशेष आयोजन किए जाते हैं।
कहते हैं कि बृज मंडल में होली महोत्सव की शुरुआत इसी दिन से हो जाती है। इस दिन दहन स्थलों पर पूजा-अर्चना के साथ होलिका विराजमान की जाती हैं। शहर में भी यह परंपरा वर्षों से निभाई जा रही है। धार्मिक मान्यता के मुताबिक बसंत पंचमी पर आखिरी बार भगवान को केसर का भोग लगाया जाता है, क्योंकि इस दिन के बाद मौसम में गर्माहट बढ़ने लगती और गर्म तासीर के केसर का प्रयोग बंद हो जाता है।
मंदिरों में रहेगी कार्यक्रमों की धूम बसंत पंचमी के मौके पर शहर के मंदिरों में धार्मिक आयोजन होंगे। कहीं फूलबंगला की छटा बिखरेगी तो कहीं छप्पन भोग के शृंगार होंगे। प्रसाद वितरण की भी धूम रहेगी। मंदिरों में गुरुवार को दिन भर इसके लिए तैयारियां चलती रहीं। भजन-कीर्तन की भी धूम रहेगी।
ये है बसंत पंचमी की धार्मिक मान्यता धार्मिक विद्वान आचार्य अतुल कृष्ण भारद्वाज का कहना है कि बसंत पंचमी के दिन बसंती वस्त्र पहनने और बसंती खाद्य पदार्थों के सेवन का विशेष महत्व होता है। भगवान को भी बसंती खाद्य पदार्थों का भोग लगाना चाहिए और सरसों के बसंती फूलों से भगवान का पूजन करना चाहिए। पढ़ने वाले बच्चों से सरस्वती का पूजन जरूर कराएं।