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Hathras News: दक्षिण से दिल्ली तक छाईं हाथरस की कामधेनु प्रतिमाएं
Mon, 20 Jul 2026 02:11 AM IST
अलीगढ़ ब्यूरो
संवाद न्यूज एजेंसी, हाथरस
संवाद न्यूज एजेंसी, हाथरस
Updated Mon, 20 Jul 2026 02:11 AM IST
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शहर की एक फैक्टरी में रखीं कामधेनु गाय की प्रतिमाएं। संवाद
- फोटो : Samvad
हींग और रंग-गुलाल के लिए पहचान रखने वाला हाथरस अब मेटल हैंडीक्राफ्ट के जरिये भी देशभर में अपनी अलग पहचान बना रहा है। यहां निर्मित एल्यूमीनियम की कामधेनु (गाय-बछड़ा) प्रतिमाएं धार्मिक आस्था, कॉरपोरेट गिफ्टिंग और सजावटी उत्पाद के रूप में तेजी से लोकप्रिय हो रही हैं।
स्थानीय उद्यमियों के अनुसार धार्मिक महत्व और उपहार देने की बदलती परंपराओं के चलते कामधेनु प्रतिमाओं की मांग लगातार बढ़ रही है। कई परिवार अपने घरों से ही हैंडीक्राफ्ट का कार्य करते हैं, जबकि बड़ी संख्या में कारीगर मजदूरी के आधार पर इस उद्योग से जुड़े हैं।
केवल कामधेनु प्रतिमाओं के निर्माण से ही लगभग 1,500 परिवारों को रोजगार मिल रहा है। इस उत्पाद का वार्षिक कारोबार आठ से 10 करोड़ रुपये के बीच पहुंच चुका है, जो हाथरस के मेटल हैंडीक्राफ्ट उद्योग की बढ़ती संभावनाओं का संकेत है।
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दक्षिण भारतीय राज्यों में अधिक मांग
मांग को देखते हुए 50 ग्राम से लेकर एक किलोग्राम तक की विभिन्न आकारों की प्रतिमाओं का निर्माण किया जा रहा है। इनकी सबसे अधिक मांग आंध्र प्रदेश के विजयवाड़ा, तमिलनाडु के चेन्नई, तेलंगाना के हैदराबाद, गुजरात के अहमदाबाद और दिल्ली-एनसीआर से आ रही है।
-सौरव वर्मा, उद्यमी
कॉरपोरेट गिफ्टिंग में बढ़ा चलन
50 ग्राम और उससे छोटी प्रतिमाएं घरेलू मंदिरों व दैनिक पूजा के लिए खरीदी जाती हैं, जबकि बड़े आकार की प्रतिमाएं धार्मिक आयोजनों, सम्मान समारोहों और कॉरपोरेट गिफ्टिंग के लिए पसंद की जा रही हैं। मांग के अनुरूप यह प्रतिमाएं तैयार कराई जा रही हैं।
-प्रशांत वर्मा, कारोबारी
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स्थानीय उद्यमियों के अनुसार धार्मिक महत्व और उपहार देने की बदलती परंपराओं के चलते कामधेनु प्रतिमाओं की मांग लगातार बढ़ रही है। कई परिवार अपने घरों से ही हैंडीक्राफ्ट का कार्य करते हैं, जबकि बड़ी संख्या में कारीगर मजदूरी के आधार पर इस उद्योग से जुड़े हैं।
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केवल कामधेनु प्रतिमाओं के निर्माण से ही लगभग 1,500 परिवारों को रोजगार मिल रहा है। इस उत्पाद का वार्षिक कारोबार आठ से 10 करोड़ रुपये के बीच पहुंच चुका है, जो हाथरस के मेटल हैंडीक्राफ्ट उद्योग की बढ़ती संभावनाओं का संकेत है।
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दक्षिण भारतीय राज्यों में अधिक मांग
मांग को देखते हुए 50 ग्राम से लेकर एक किलोग्राम तक की विभिन्न आकारों की प्रतिमाओं का निर्माण किया जा रहा है। इनकी सबसे अधिक मांग आंध्र प्रदेश के विजयवाड़ा, तमिलनाडु के चेन्नई, तेलंगाना के हैदराबाद, गुजरात के अहमदाबाद और दिल्ली-एनसीआर से आ रही है।
-सौरव वर्मा, उद्यमी
कॉरपोरेट गिफ्टिंग में बढ़ा चलन
50 ग्राम और उससे छोटी प्रतिमाएं घरेलू मंदिरों व दैनिक पूजा के लिए खरीदी जाती हैं, जबकि बड़े आकार की प्रतिमाएं धार्मिक आयोजनों, सम्मान समारोहों और कॉरपोरेट गिफ्टिंग के लिए पसंद की जा रही हैं। मांग के अनुरूप यह प्रतिमाएं तैयार कराई जा रही हैं।
-प्रशांत वर्मा, कारोबारी