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हाथरस : रामवीर के सहारे सादाबाद की सीट पर जीत की आस
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न्यूज डेस्क, अमर उजाला, हाथरस
पूर्व मंत्री रामवीर उपाध्याय से ज्यादा दमदार दावेदार सादाबाद में भाजपा को कोई नहीं लगा। यही कारण रहा कि अस्वस्थ होने के बावजूद भाजपा ने रामवीर पर ही दांव खेला और उन्हें टिकट थमाया। सादाबाद सीट पर भाजपा का विशेष रूप फोकस है और पार्टी इस बार इस सीट को हर हालत में जीतना चाहती है।
उल्लेखनीय है कि पिछले बार जब भाजपा की सुनामी चली थी। तब भी सादाबाद की सीट से भाजपा नहीं जीत सकी थी। भाजपा तब सादाबाद से मुख्य मुकाबले में भी नहीं थी। इस सीट पर बसपा उम्मीदवार के रूप में रामवीर उपाध्याय ने जीत हासिल कर ली थी। पूरे अलीगढ़ मंडल में यही ऐसी सीट थी, जिस पर भाजपा जीत हासिल नहीं कर सकी थी। बसपा ने दो साल पहले रामवीर को पार्टी से निलंबित कर दिया था, लेकिन विधायकी न चली जाए, इसलिए रामवीर ने दल नहीं बदला था। उनकी पत्नी, बेटे और भाई सब भाजपा में शामिल हो गए थे।
इस दौरान रामवीर उपाध्याय काफी अस्वस्थ हो गए थे। उनकेे अस्वस्थ होने के बाद भी पार्टी के बृज प्रदेश के अध्यक्ष ने उन्हें उनके आगरा स्थित घर पर जाकर पार्टी की सदस्यता दिलाई थी। तब से यह अटकलें भी लगाई जा रही थीं कि आखिर अब रामवीर भाजपा के उम्मीदवार होंगे या फिर उनके बेटे चिराग उपाध्याय। इन अटकलोें को विराम देते हुुए पार्टी ने अस्वस्थ होने के बाद भी रामवीर को ही प्रत्याशी घोषित किया है। जिस दिन रामवीर ने पार्टी की सदस्यता ली थी, उसी दिन से उनके समर्थक उनके प्रचार-प्रसार में जुट गए थे। संवाद
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पूर्व मंत्री रामवीर उपाध्याय से ज्यादा दमदार दावेदार सादाबाद में भाजपा को कोई नहीं लगा। यही कारण रहा कि अस्वस्थ होने के बावजूद भाजपा ने रामवीर पर ही दांव खेला और उन्हें टिकट थमाया। सादाबाद सीट पर भाजपा का विशेष रूप फोकस है और पार्टी इस बार इस सीट को हर हालत में जीतना चाहती है।
उल्लेखनीय है कि पिछले बार जब भाजपा की सुनामी चली थी। तब भी सादाबाद की सीट से भाजपा नहीं जीत सकी थी। भाजपा तब सादाबाद से मुख्य मुकाबले में भी नहीं थी। इस सीट पर बसपा उम्मीदवार के रूप में रामवीर उपाध्याय ने जीत हासिल कर ली थी। पूरे अलीगढ़ मंडल में यही ऐसी सीट थी, जिस पर भाजपा जीत हासिल नहीं कर सकी थी। बसपा ने दो साल पहले रामवीर को पार्टी से निलंबित कर दिया था, लेकिन विधायकी न चली जाए, इसलिए रामवीर ने दल नहीं बदला था। उनकी पत्नी, बेटे और भाई सब भाजपा में शामिल हो गए थे।
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इस दौरान रामवीर उपाध्याय काफी अस्वस्थ हो गए थे। उनकेे अस्वस्थ होने के बाद भी पार्टी के बृज प्रदेश के अध्यक्ष ने उन्हें उनके आगरा स्थित घर पर जाकर पार्टी की सदस्यता दिलाई थी। तब से यह अटकलें भी लगाई जा रही थीं कि आखिर अब रामवीर भाजपा के उम्मीदवार होंगे या फिर उनके बेटे चिराग उपाध्याय। इन अटकलोें को विराम देते हुुए पार्टी ने अस्वस्थ होने के बाद भी रामवीर को ही प्रत्याशी घोषित किया है। जिस दिन रामवीर ने पार्टी की सदस्यता ली थी, उसी दिन से उनके समर्थक उनके प्रचार-प्रसार में जुट गए थे। संवाद
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