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हाथरस: किसी को नौकरी से निकाल दिया तो किसी का काम धंधा हो गया चौपट
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हाथरस: अपने घरों को जाते प्रवासी कामगार।
- फोटो : HATHRAS
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न्यूज डेस्क, अमर उजाला, मुरसान (हाथरस)।
लॉकडाउन में दूर-दराज से अपना काम छोड़कर अपने घरों को जा रहे प्रवासियों के सामने मुसीबतों का पहाड़ टूट पड़ा है। कोरोना ने इन प्रवासियों का काम धंधा चौपट कर दिया है। फिलहाल वह अपने घर पहुंचने के लिए उतावले हैं। स्पोर्ट्स स्टेडियम में जब कुछ प्रवासियों के बात की गई तो उन्होंने अपनी पीड़ा जाहिर की।
मैं राजस्थान की गली-मोहल्लों व शहर में फूल बेचने का काम करता था। लॉकडाउन होने के बाद काम बंद हो गया, इसके बाद कई दिन में हाथरस तक पहुंचा हूं। अभी यहां से मेरे शहर को बस द्वारा प्रशासन भेजने की बात कर रहा है।
-धर्मो, चंदौली
मैं 4 माह पहले राजस्थान के कई शहरों में होने वाली पार्टियों में फूलों की स्टेज बनाने का काम करने के लिए गया था, लेकिन लॉकडाउन के बाद पूरा काम बंद हो गया। इसके चलते वहां से अपने शहर जाना पड़ रहा है। पता नहीं वहां काम धंधे की क्या जुगाड़ बनेगी।
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-लल्लन, हमीदपुर चंदौली
मैं भीलवाड़ा राजस्थान में एक कंपनी में जॉब करता था। कंपनी मालिक ने सभी कर्मचारियों को वहां से निकाल दिया। वह कुछ दिन अपने ही रूम पर कमाए हुए पैसों से खाना खर्चा चलाता रहा, लेकिन पैसे खत्म हो जाने के कारण वह अपने शहर को जा रहा हूं।
-अखिलेश गुप्ता, हरीपुर (अयोध्या)
जयपुर में एक होटल में काम करता था, लॉकडाउन के बाद जयपुर में सभी होटलों में काम मिलना बंद हो गया। अब अपने शहर जा रहा हूं। देखते हैं कि आगे क्या होता है।
-चंद्रिका निवासी रायबरेली
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लॉकडाउन में दूर-दराज से अपना काम छोड़कर अपने घरों को जा रहे प्रवासियों के सामने मुसीबतों का पहाड़ टूट पड़ा है। कोरोना ने इन प्रवासियों का काम धंधा चौपट कर दिया है। फिलहाल वह अपने घर पहुंचने के लिए उतावले हैं। स्पोर्ट्स स्टेडियम में जब कुछ प्रवासियों के बात की गई तो उन्होंने अपनी पीड़ा जाहिर की।
मैं राजस्थान की गली-मोहल्लों व शहर में फूल बेचने का काम करता था। लॉकडाउन होने के बाद काम बंद हो गया, इसके बाद कई दिन में हाथरस तक पहुंचा हूं। अभी यहां से मेरे शहर को बस द्वारा प्रशासन भेजने की बात कर रहा है।
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-धर्मो, चंदौली
मैं 4 माह पहले राजस्थान के कई शहरों में होने वाली पार्टियों में फूलों की स्टेज बनाने का काम करने के लिए गया था, लेकिन लॉकडाउन के बाद पूरा काम बंद हो गया। इसके चलते वहां से अपने शहर जाना पड़ रहा है। पता नहीं वहां काम धंधे की क्या जुगाड़ बनेगी।
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-लल्लन, हमीदपुर चंदौली
मैं भीलवाड़ा राजस्थान में एक कंपनी में जॉब करता था। कंपनी मालिक ने सभी कर्मचारियों को वहां से निकाल दिया। वह कुछ दिन अपने ही रूम पर कमाए हुए पैसों से खाना खर्चा चलाता रहा, लेकिन पैसे खत्म हो जाने के कारण वह अपने शहर को जा रहा हूं।
-अखिलेश गुप्ता, हरीपुर (अयोध्या)
जयपुर में एक होटल में काम करता था, लॉकडाउन के बाद जयपुर में सभी होटलों में काम मिलना बंद हो गया। अब अपने शहर जा रहा हूं। देखते हैं कि आगे क्या होता है।
-चंद्रिका निवासी रायबरेली