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हाथरस : जिले में बिजली संकट बेलगाम, लोग परेशान
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हाथरस : आगरा रोड पर रोडवेज बस स्टैंड के पास जर्जर तार। संवाद
- फोटो : HATHRAS
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न्यूज डेस्क, अमर उजाला, हाथरस
जिले में बिजली संकट बेलगाम होता जा रहा है। शहर से गांवों तक जर्जर लाइनों के चलते फॉल्ट हो रहे हैं। पर्याप्त बिजली न मिलने से लोगों में गुस्सा है। लाइनों को बदलने के नाम पर विभाग खानापूर्ति कर रहा है। इसका खामियाजा आम लोगों को भुगतना पड़ रहा है।
उल्लेखनीय है कि वर्ष 2012 बिजली चोरी रोकने व लोगों को पर्याप्त बिजली आपूर्ति देने के लिए जिलेभर के आरएपीडीआरपी टाउन में बंच कंडक्टर लाइन डाली गई थीं। पांच साल बाद इन लाइनों के मेंटेनेंस का टेंडर भी खत्म हो गया। इसके बाद भी विभाग ने लाइनों को बदलवाने की सुध नहीं ली है। इस कारण सादाबाद, सिकंदराराऊ, मुरसान, मेंडू, सासनी, हसायन और हाथरस शहर में बिजली की जर्जर लाइनें झूल रही हैं। जब बिजली सिस्टम पर लोड बढ़ता है तो लाइनों में फॉल्ट हो जाता है। इस कारण लोगों को पर्याप्त बिजली भी नहीं मिल पा रही है। लाइनें जगह जगह नीची होने के कारण लोगों को अनहोनी का डर भी सताता रहता है।
जर्जर लाइनों से रोजाना बाधित होती है बिजली
वर्ष 2012 में बिजली की जो लाइनें डाली गई थीं, वह अब जर्जर हो गई हैं। लाइनें जर्जर होने से आए-दिन शहर, देहात और कस्बा में बिजली गुल होती रहती है। इससे लोग बेहद परेशान रहते हैं। उपभोक्ताओं आला अफसरों तक शिकायतें करते रहते हैं। अफसरों द्वारा उपभोक्ताओं की संतुष्टि के लिए अवर अभियंताओं की क्लास लगाई जाती है, इसलिए ये लाइनें अवर अभियंताओं व एसडीओ के लिए सिरदर्द बनी हुई हैं।
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अफसर कहते हैं भेज रखे हैं प्रस्ताव, हम क्या करें
जब ज्यादा समय के लिए बिजली गुल हो जाए या कोई बिजली की लाइन से कोई हादसा हो जाए तो अफसर यह कहते हुए नजर आते हैं कि उन्होंने जर्जर लाइन बदलने का प्रस्ताव भेज रखा है। ऊपर से प्रस्ताव पास नहीं हो रहे हैं। इसमें हम क्या करें। आखिर किस स्तर पर काम रुका हुआ है। कागजी प्रक्रिया के बीच जिले के उपभोक्ता पिस रहे हैं।
600 संविदा कर्मियों की है तैनाती
जिले में करीब 65 बिजलीघरों के जरिये सवा दो लाख उपभोक्ताओं को बिजली आपूर्ति की जाती है। इन सबस्टेशनों को संचालित करने के लिए करीब छह सौ संविदा कर्मियों की तैनाती है। यदि कर्मचारियों की संख्या पूरी हो जाए तो बिजली सिस्टम में भी सुधार हो सकता है। वर्तमान में एक-एक अवर अभियंता पर दो से तीन सबस्टेशनों का बोझ हैं। इस कारण लाइनों की पेट्रोलिंग भी सही तरीके से नहीं हो पाती है। यह भी एक कारण है लोगों को पर्याप्त बिजली नहीं मिल पाती है।
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जिले में बिजली संकट बेलगाम होता जा रहा है। शहर से गांवों तक जर्जर लाइनों के चलते फॉल्ट हो रहे हैं। पर्याप्त बिजली न मिलने से लोगों में गुस्सा है। लाइनों को बदलने के नाम पर विभाग खानापूर्ति कर रहा है। इसका खामियाजा आम लोगों को भुगतना पड़ रहा है।
उल्लेखनीय है कि वर्ष 2012 बिजली चोरी रोकने व लोगों को पर्याप्त बिजली आपूर्ति देने के लिए जिलेभर के आरएपीडीआरपी टाउन में बंच कंडक्टर लाइन डाली गई थीं। पांच साल बाद इन लाइनों के मेंटेनेंस का टेंडर भी खत्म हो गया। इसके बाद भी विभाग ने लाइनों को बदलवाने की सुध नहीं ली है। इस कारण सादाबाद, सिकंदराराऊ, मुरसान, मेंडू, सासनी, हसायन और हाथरस शहर में बिजली की जर्जर लाइनें झूल रही हैं। जब बिजली सिस्टम पर लोड बढ़ता है तो लाइनों में फॉल्ट हो जाता है। इस कारण लोगों को पर्याप्त बिजली भी नहीं मिल पा रही है। लाइनें जगह जगह नीची होने के कारण लोगों को अनहोनी का डर भी सताता रहता है।
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जर्जर लाइनों से रोजाना बाधित होती है बिजली
वर्ष 2012 में बिजली की जो लाइनें डाली गई थीं, वह अब जर्जर हो गई हैं। लाइनें जर्जर होने से आए-दिन शहर, देहात और कस्बा में बिजली गुल होती रहती है। इससे लोग बेहद परेशान रहते हैं। उपभोक्ताओं आला अफसरों तक शिकायतें करते रहते हैं। अफसरों द्वारा उपभोक्ताओं की संतुष्टि के लिए अवर अभियंताओं की क्लास लगाई जाती है, इसलिए ये लाइनें अवर अभियंताओं व एसडीओ के लिए सिरदर्द बनी हुई हैं।
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अफसर कहते हैं भेज रखे हैं प्रस्ताव, हम क्या करें
जब ज्यादा समय के लिए बिजली गुल हो जाए या कोई बिजली की लाइन से कोई हादसा हो जाए तो अफसर यह कहते हुए नजर आते हैं कि उन्होंने जर्जर लाइन बदलने का प्रस्ताव भेज रखा है। ऊपर से प्रस्ताव पास नहीं हो रहे हैं। इसमें हम क्या करें। आखिर किस स्तर पर काम रुका हुआ है। कागजी प्रक्रिया के बीच जिले के उपभोक्ता पिस रहे हैं।
600 संविदा कर्मियों की है तैनाती
जिले में करीब 65 बिजलीघरों के जरिये सवा दो लाख उपभोक्ताओं को बिजली आपूर्ति की जाती है। इन सबस्टेशनों को संचालित करने के लिए करीब छह सौ संविदा कर्मियों की तैनाती है। यदि कर्मचारियों की संख्या पूरी हो जाए तो बिजली सिस्टम में भी सुधार हो सकता है। वर्तमान में एक-एक अवर अभियंता पर दो से तीन सबस्टेशनों का बोझ हैं। इस कारण लाइनों की पेट्रोलिंग भी सही तरीके से नहीं हो पाती है। यह भी एक कारण है लोगों को पर्याप्त बिजली नहीं मिल पाती है।