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हाथरस : यूक्रेन के बाशिंदों को पहले निकाला जा रहा : आशीष
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न्यूज डेस्क, अमर उजाला, हाथरस
यूक्रेन में फंसे आशीष ने खारकीव से हंगरी सीमा तक पहुंचने में झेली दिक्कतों का दर्द बयां किया। आशीष स्थानीय आवास-विकास कॉलोनी निवासी हैं और वह मेडिकल की पढ़ाई करने के लिए यूक्रेन गए थे। अभी तक वह अपने घर नहीं पहुंचे हैं। उनके परिजन काफी चिंतित रहे। हालांकि उम्मीद है कि वह शनिवार को घर लौट आएंगे।
अमर उजाला से हुई बातचीत में आशीष ने बताया कि वह फिलहाल हंगरी की राजधानी बुडापेस्ट में हैं। उन्होंने सीमा पार करके पहले कागजी काम कराया। अब यहां से बस की व्यवस्था की गई है। इस बस से वह अपन उड़ान तक पहुंचेंगे। उन्होंने बताया कि हंगरी के समय के अनुसार शाम साढ़े छह बजे उनकी हिंदुस्तान के लिए उड़ान है। परिजनों के साथ वह लगातार संपर्क में बने हुए हैं।
यूक्रेन में अधिकारियों का उन्हें सहयोग नहीं मिल सका। इस कारण दिक्कतों का सामना भी करना पड़ा। सुबह से लाइन में लगने के बाद करीब रात्रि 11 बजे उनका नंबर दस्तावेज सत्यापन के लिए आ पाया। दूतावास ने सिर्फ उड़ान और हवाई जहाज तक पहुंचने के लिए बस की व्यवस्था की। इसके अतिरिक्त उनका कोई सहयोग नहीं रहा। संवाद
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यूक्रेन में फंसे आशीष ने खारकीव से हंगरी सीमा तक पहुंचने में झेली दिक्कतों का दर्द बयां किया। आशीष स्थानीय आवास-विकास कॉलोनी निवासी हैं और वह मेडिकल की पढ़ाई करने के लिए यूक्रेन गए थे। अभी तक वह अपने घर नहीं पहुंचे हैं। उनके परिजन काफी चिंतित रहे। हालांकि उम्मीद है कि वह शनिवार को घर लौट आएंगे।
अमर उजाला से हुई बातचीत में आशीष ने बताया कि वह फिलहाल हंगरी की राजधानी बुडापेस्ट में हैं। उन्होंने सीमा पार करके पहले कागजी काम कराया। अब यहां से बस की व्यवस्था की गई है। इस बस से वह अपन उड़ान तक पहुंचेंगे। उन्होंने बताया कि हंगरी के समय के अनुसार शाम साढ़े छह बजे उनकी हिंदुस्तान के लिए उड़ान है। परिजनों के साथ वह लगातार संपर्क में बने हुए हैं।
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यूक्रेन में अधिकारियों का उन्हें सहयोग नहीं मिल सका। इस कारण दिक्कतों का सामना भी करना पड़ा। सुबह से लाइन में लगने के बाद करीब रात्रि 11 बजे उनका नंबर दस्तावेज सत्यापन के लिए आ पाया। दूतावास ने सिर्फ उड़ान और हवाई जहाज तक पहुंचने के लिए बस की व्यवस्था की। इसके अतिरिक्त उनका कोई सहयोग नहीं रहा। संवाद
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