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Birthday of Hathras: 26 साल का हुआ हाथरस, पांच बार बदला नाम, पर समस्याएं जस की तस

Wed, 03 May 2023 12:27 AM IST
चमन शर्मा अमर उजाला नेटवर्क, हाथरस
अमर उजाला नेटवर्क, हाथरस Published by: चमन शर्मा Updated Wed, 03 May 2023 12:27 AM IST
सार

हाथरस जिले के नाम पर भी यहां सियासत हुई। बसपा ने अपने शासनकाल में जब इसे जिला घोषित किया तो इसका नाम महामाया नगर रखा। इसके बाद फिर कल्याण सिंह की सरकार बनी तो जिले का नाम हाथरस कर दिया गया। फिर बसपा की सरकार बनने पर जिले का नाम महामाया नगर कर दिया गया। सपा की सरकार बनी तो जिले का नाम फिर हाथरस कर दिया गया। 

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Hathras turns 26 name changed five times but problems remain the same
26 साल बाद भी नहीं बनी जेल - फोटो : अमर उजाला

विस्तार

हाथरस जिले का 26 वां बर्थडे है। आज से ठीक 26 साल पहले तीन मई 1997 को हाथरस जिले के रूप में सृजित हुआ था। लेकिन जिला बनने के बाद भी यहां जनसुविधाओं की कमी है। स्वास्थ्य सेवाएं बेहद लचर हैं। व्यवसायिक शिक्षा की व्यवस्था नहीं है। जिला स्तर के कई सरकारी कार्यालय नहीं है। जिला न्यायालय का नया भवन भी अभी नहीं बना है। जिला कारागार भी नहीं है। हालांकि जिला न्यायालय के नए भवन और जेल के लिए भूमि चयनित हो चुकी है और इस पर निर्माण कार्य भी शुरू हो गया है। जिले में ट्रांसपोर्ट नगर नहीं बना है। कई अहम ट्रेनों का ठहराव नहीं होता है। यहां के परंपरागत उद्योग धंधों का विकास नहीं हुआ। हींग और रेडीमेड गारमेंट्स उद्योग जरूर ओडीओपी की वजह से पनप गए। 

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इगलास तहसील को किया गया था शामिल, फिर किया अलग
हाथरस को तीन मई 1997 को बसपा के शासनकाल में जिला बनाया गया था। वर्ष 1990 से ही हाथरस को जिला बनाने की मांग होने लगी थी, लेकिन यह जिला बना तत्कालीन ऊर्जा मंत्री रामवीर उपाध्याय की पहल पर। बसपा शासनकाल में अलीगढ़ की हाथरस, सिकंदराराऊ व इगलास और मथुरा की सादाबाद तहसील को अलीगढ़ और मथुरा जनपदों से अलग कर हाथरस को नए जिले के रूप में सृजित किया गया। हालांकि इगलास को हाथरस में शामिल करने का तीव्र विरोध वहां के लोगों ने किया और इसके परिणामस्वरूप कुछ माह बाद ही इगलास तहसील को फिर अलीगढ़ जिले में शामिल कर दिया गया। बहरहाल, इस दौरान यहां सासनी को तहसील बना दिया गया और हाथरस में फिर चार तहसील हो गईं। 
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वर्ष 2004 में समाप्त हुआ जिला, फिर हुआ बहाल
जिले के सृजन के बाद यहां जिला स्तरीय कार्यालय खुलने लगे। कलेक्ट्रेट के नए भवन, पुलिस लाइन, जिला कारागार, जिला न्यायालय के नए भवन के लिए भूमि की तलाश होने लगी लेकिन इसी दौरान जिले को झटका लगा। वर्ष 2004 में इस जिले को तत्कालीन सपा सरकार ने समाप्त करने की घोषणा कर दी। स्थिति यह हो गई कि जनपद न्यायालय तो इस जिले में ही संचालित रहा, लेकिन पुलिस और प्रशासनिक व्यवस्थाएं फिर अलीगढ़ और मथुरा से संचालित होने लगी। इससे जिले की तरक्की पर काफी असर पड़ा और सब कुछ थम गया।  हालांकि वर्ष 2007 में हाईकोर्ट के आदेश पर जिला फिर बहाल हो गया। इस दौरान यहां कलेक्ट्रेट, विकास भवन, नई रिजर्व पुलिस लाइन बन गई। काफी कार्यालयों के भवन भी बन गए और वह स्थापित भी हो गए हैं।   

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जिला बनने के बाद भी परंपरागत उद्योग धंधों को नहीं हुआ विकास

लोगों को यह उम्मीद थी कि जिला बनने के बाद यहां उद्योग धंधों का काफी विकास होगा, लेकिन ऐसा हुआ नहीं। हाथरस को कानपुर के बाद प्रदेश में दूसरा औद्योगिक शहर माना जाता था। यहां तीन बड़े कॉटन मिल थे। शहर में रंग-गुलाल उद्योग, दाल उद्योग, हैंडीक्राफ्ट उद्योग के अलावा सिकंदराराऊ के पुरदिलनगर का मूंगा मोती उद्योग, सासनी का कांच उद्योग, बिसावर का चांदी उद्योग को सरकारी प्रोत्साहन नहीं मिला।  ऐसे में हाथरस का दलहन उद्योग,  मूंगा मोती उद्योग, सासनी का कांच उद्योग दम तोड़ गए।

हाथरस के हींग उद्योग और रेडीमेड गारमेंट्स उद्योग को जरूर एक जनपद एक उत्पाद में शामिल होने के बाद संजीवनी मिली।  हसायन के इत्र, गुलकंद, गुलाब जल उद्योग को जरूर जीआई टैग मिल गया। अन्य उद्योगोंं का जितना विकास होना था, उतना नहीं हुआ। इसकी सबसे बड़ी वजह ट्रांसपोर्टेशन के साधन का अभाव रहा। किसी समय यहां बड़े-बड़े मिलों के अंदर रेलवे लाइनें बिछी थी और रेलवे के मालवाहक डिब्बे इन मिलों के अंदर जाते थे, लेकिन जिला बनने के बाद यहां 26 साल में अभी तक ट्रांसपोर्ट नगर भी नही बना है। 

स्वास्थ्य सेवाओं और व्यवसायिक शिक्षा में जिला फिसड्डी
हाथरस जिला सबसे ज्यादा स्वास्थ्य सेवाओं में फिसड्डी है। जिला स्तरीय सरकारी अस्पताल हैं. लेकिन यहां भी पर्याप्त चिकित्सक व संसाधन नहीं है। इस जिले के बाद में जो जनपद बने वहां मेडिकल कॉलेज खुल गए, लेकिन 26 साल बाद भी इस जिले में मेडिकल कॉलेज नहीं बना। छोटी बीमारियों के लिए भी यहां के मरीजों को आगरा या अलीगढ़ भेजा जाता है।  यहां सरकारी व्यवसायिक शिक्षा के नाम पर कोई उच्च संस्थान नहीं है। सात दशक पुराने एमजी पॉलीटेक्निक को भी इंजीनियरिंग कॉलेज का दर्जा नहीं मिला।

उच्च शिक्षा के लिए विद्यार्थियों को बाहर जाना पड़ता है। वहीं जिले में अभी भी विकास प्राधिकरण नहीं हैं। भूगर्भ जल विभाग, प्रदूषण नियंत्रण विभाग के कार्यालय नहीं है। नेडा का दफ्तर यहां नहीं हैं।  अभी भी यहां अलीगढ़ और हाथरस की सहकारी बैंक ही संचालित है। जिला बनने के बाद महिला थाने की बात छोड़ दें तो जिले में कोई थाना नहीं बना। कोई नई नगर पंचायत नहीं बनी। कोई नया ब्लॉक सृजित नहीं हुआ। 

पांच बार बदला जा चुका है जिले के नाम

हाथरस जिले के नाम पर भी यहां सियासत हुई। बसपा ने अपने शासनकाल में जब इसे जिला घोषित किया तो इसका नाम महामाया नगर रखा। इसके बाद फिर कल्याण सिंह की सरकार बनी तो जिले का नाम हाथरस कर दिया गया। फिर बसपा की सरकार बनने पर जिले का नाम महामाया नगर कर दिया गया। सपा की सरकार बनी तो जिले का नाम फिर हाथरस कर दिया गया। 

बोले विधायक
जिले के विकास के लिए लगातार प्रयास किए जा रहे हैं। जिले का भाजपा के शासनकाल में काफी विकास हुआ है। जो कार्य अधूरे हैं, उन्हें भी पूरा कराया जाएगा।  मेडिकल कॉलेज का यहां निर्माण कराया जाएगा। इसके लिए प्रक्रिया चल रही है। यहां की सड़कों दशा सुधारी जाएगी। यहां के लोगों को जाम से राहत दिलाने के लिए तालाब चौराहे पर भाजपा के शासनकाल में ही ओवरब्रिज का निर्माण कराया गया।
अंजुला माहौर, विधायक, हाथरस सदर। 
भाजपा ने अपने शासनकाल में जिले का काफी विकास कराया है। जो विकास कार्य अधूरे बचे हैं। वह भी पूरे कराए जा रहे हैं। सिकंदराराऊ बस स्टैंड के लिए भूमि की तलाश की जा रही है। जैसे ही भूमि मिलेगी, वैसे ही वहां बस स्टैंड का निर्माण करा दिया जाएगा।  सड़कों को दुरुस्त कराया जा रहा है। भाजपा के शासनकाल में जिले में सबसे ज्यादा विकास कार्य हुए हुए हैं।  -वीरेंद्र सिंह राणा, विधायक, सिकंदराराऊ। 
भाजपा की सरकार में जिले में विकास कार्य ठप पड़े हैं। यहां जनता काफी परेशान हैं। उद्योग धंधे चौपट हो गए हैं। निराश्रित गोवंश से किसान परेशान हैं। नहरों और रजवाहों  को पानी नहीं आ रहा। कई जिला स्तरीय कार्यालय यहां नहीं हैं। बिजली की पर्याप्त आपूर्ति नहीं होती। काफी सड़कें खराब हैं। लोगों की  समस्याएं लगातार बढ़ती जा रही हैं लेकिन इनका निदान नहीं हो रहा। आज तक यहां मेडिकल कॉलेज नहीं बना। -प्रदीप कुमार गुड्डू, विधायक सादाबाद।

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