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हाथरस: शहर में जल प्रदूषण को रोकने के लिए लगेंगे फीकल स्लज ट्रीटमेंट प्लांट
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न्यूज डेस्क, अमर उजाला, हाथरस
शहर के कई इलाकों में घरों के शौचालय के सेप्टिक टैंकों से निकलने वाले सीवरेज का ट्रीटमेंट करने के लिए शासन स्तर पर सेप्टेज मैनेजमेंट योजना बनाई गई है। जल प्रदूषण को नियंत्रित करने के लिए जलेसर रोड स्थित सीवेज फार्म की भूमि पर फीकल स्लज ट्रीटमेंट प्लांट लगाया जाएगा। इस प्लांट के काम को सीएनडीएस द्वारा किया जाएगा।
केंद्र सरकार अमृत योजना के तहत आमजन को मूलभूत सुविधाएं प्रदान करने की कवायद में जुटी हुई है। पाइप लाइन डालने के बाद जल प्रदूषण पर लगाम लगाने की कवायद तेज हो गई है। अमृत योजना के तहत शहर के जलेसर रोड स्थित सीवेज फार्म की भूमि पर फीकल स्लज ट्रीटमेंट प्लांट लगाया जाएगा। इसके लिए पायलट प्रोजेक्ट की शुरुआत भी हो गई है। जल्द हाथरस में इस प्लांट को लगाने के लिए सीएनडीएस कागजी प्रक्रिया को पूरा कर धरातल पर उतारा जाएगा।
20 से चालीस प्रतिशत मकान का सीवरेज सिस्टम से नहीं जुड़े हैं। इन सेप्टिक टैंकों से निकलने वाले सीवरेज का वैज्ञानिक तरीके से निस्तारण की कोई व्यवस्था नहीं है। इसलिए सेप्टिक टैंकों से सीवरेज निकालकर जमीन पर फेंक दिया जाता है। या फिर खुले नालों में डाल दिया जाता है। जो बहकर नदियों में पहुंचता है। इस स्थित से निजात पाने के लिए हाथरस सहित 31 शहरों में सेप्टेज मैनेजमेंट योजना के तहत प्लांट लगाए जाएंगे।
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शहर के कई इलाकों में घरों के शौचालय के सेप्टिक टैंकों से निकलने वाले सीवरेज का ट्रीटमेंट करने के लिए शासन स्तर पर सेप्टेज मैनेजमेंट योजना बनाई गई है। जल प्रदूषण को नियंत्रित करने के लिए जलेसर रोड स्थित सीवेज फार्म की भूमि पर फीकल स्लज ट्रीटमेंट प्लांट लगाया जाएगा। इस प्लांट के काम को सीएनडीएस द्वारा किया जाएगा।
केंद्र सरकार अमृत योजना के तहत आमजन को मूलभूत सुविधाएं प्रदान करने की कवायद में जुटी हुई है। पाइप लाइन डालने के बाद जल प्रदूषण पर लगाम लगाने की कवायद तेज हो गई है। अमृत योजना के तहत शहर के जलेसर रोड स्थित सीवेज फार्म की भूमि पर फीकल स्लज ट्रीटमेंट प्लांट लगाया जाएगा। इसके लिए पायलट प्रोजेक्ट की शुरुआत भी हो गई है। जल्द हाथरस में इस प्लांट को लगाने के लिए सीएनडीएस कागजी प्रक्रिया को पूरा कर धरातल पर उतारा जाएगा।
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20 से चालीस प्रतिशत मकान का सीवरेज सिस्टम से नहीं जुड़े हैं। इन सेप्टिक टैंकों से निकलने वाले सीवरेज का वैज्ञानिक तरीके से निस्तारण की कोई व्यवस्था नहीं है। इसलिए सेप्टिक टैंकों से सीवरेज निकालकर जमीन पर फेंक दिया जाता है। या फिर खुले नालों में डाल दिया जाता है। जो बहकर नदियों में पहुंचता है। इस स्थित से निजात पाने के लिए हाथरस सहित 31 शहरों में सेप्टेज मैनेजमेंट योजना के तहत प्लांट लगाए जाएंगे।
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