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हाथरस : आपातकाल में कचौरा में गुजारा समय, मुख्यमंत्री बनते ही पूरा किया वादा

Mon, 23 Aug 2021 12:09 AM IST
Aligarh Bureau अलीगढ़ ब्यूरो
Updated Mon, 23 Aug 2021 12:09 AM IST
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Hathras: Time spent in Kachora during emergency, promised fulfilled as soon as he became Chief Minister
विपिन वार्ष्णेय। - फोटो : SIKANDHRA RAHU
संवाद न्यूज एजेंसी, सिकंदराराऊ।
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पूर्व मुख्यमंत्री, राज्यपाल कल्याण सिंह के निधन से सिकंदराराऊ के लोगों में शोक की लहर दौड़ गई है। क्षेत्र के लोगों के साथ उनका हमेशा लगाव रहा था। वे जब भी यहां से गुजरते तो कभी यशपाल सिंह चौहान के कार्यालय पर रुकते तो कभी नगला शीसगर में कुराबिया के घर ठहरते थे।
आपातकाल का विकट समय भी उन्होंने गांव कचौरा में गुजारा था। एक बार चुनाव में अपने संबोधन में उन्होंने कहा था कि यशपाल सिंह को जिता दो यहां राजकीय डिग्री कॉलेज बनवा दूंगा। जीतने के बाद मुख्यमंत्री बनते ही एटा रोड पर जमीन का चयन हुआ और डिग्री कॉलेज की स्थापना हो गई।
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देश में जब आपातकाल लगा था उस समय नेताओं की धर-पकड़ बड़े पैमाने पर चली। ऐसे में कल्याण सिंह ने अपना समय बिताने के लिए कचौरा गांव को चुना। साधारण कपड़े पहन कर कचौरा निवासी जनता आयुर्वेद के स्वामी लालराम चंचल के यहां बाबूजी ने काफी समय बिताया। यहीं से वे राजनीतिक गतिविधियों का संचालित करते थे।
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- बाजू जी ने मुख्यमंत्री बनने पर जब नकल अध्यादेश लगाया तब यह बात अविश्सनीय थी। चारों तरफ नकल का बोलबाला था। उन पर अध्यादेश हटाने का काफी दबाव पड़ा लेकिन वे पीछे नहीं हटे। भले ही उस समय छात्रों के पास होने का प्रतिशत काफी नीचे चला गया लेकिन अभिभावक छात्रों की वास्तविक पढ़ाई के विषय में विचार करने लगे थे। - विपिन वार्ष्णेय, व्यापारी नेता
- बाबू जी वास्तव में पिछड़े वंचितों के मसीहा थे। उन्होंने जीवन भर इनके उत्थान के लिए कार्य किया। सिकंदराराऊ क्षेत्र से उनका व सांसद राजवीर सिंह राजू का भावनात्मक संबंध रहा है। राम मंदिर का सपना साकार करने के लिए उन्होंने मुख्यमंत्री पद को त्याग दिया था। - वीरेंद्र सिंह राना, विधायक
- जब बाबू जी कचौरा में थे तब मैं बच्चा था। उनके कचौरा में रुकने के दौरान अक्सर चर्चा का बिंदू बाबू जी होते थे। क्षेत्र के लोग उनकी बात पर विश्वास करते थे तथा उनके कहे अनुसार मतदान करते थे। क्षेत्र हमेशा बाबू जी को याद रखेगा। - योगेश परमार

- जब-जब राम मंदिर का नाम आएगा तब-तब बाबू जी को याद किया जाएगा। कार सेवकों पर बाबू जी ने गोली चलवाने का आदेश नहीं दिया। बाबरी विध्वंस की जिम्मेदारी लेते हुए मुख्यमंत्री पद से त्याग पत्र दे दिया। वे भले ही हमारे बीच नहीं है लेकिन उनका सुझाया गया मार्ग हमारे सामने हैं। - लक्ष्मण सेंगर

वीरेंद्र सिंह राना।

वीरेंद्र सिंह राना। - फोटो : SIKANDHRA RAHU

योगेश परमार।

योगेश परमार।- फोटो : SIKANDHRA RAHU

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