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हाथरस : हाथरस (सुरक्षित) सीट पर इस बार होगा घमासान

Thu, 17 Feb 2022 12:56 AM IST
Aligarh Bureau अलीगढ़ ब्यूरो
Updated Thu, 17 Feb 2022 12:56 AM IST
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Hathras: This time there will be a fight on Hathras Safe seat
प्रशांत भारती
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हाथरस। हाथरस (सुरक्षित) विधानसभा सीट पर इस बार कांटे का मुकाबला होने के आसार हैं। भाजपा के सामने जहां इस सीट पर कब्जा बरकरार रखने की चुनौती है तो सपा और बसपा ने मुकाबले को त्रिकोणीय बना दिया है। सपा का इस सीट पर आज तक खाता नहीं खुला है। ऐसे में सपा इस सीट पर जीत हासिल कर इतिहास बनाना चाहती है तो बसपा इस सीट को जीतकर खोया वजूद वापस पाने का प्रयास कर रही है।
आजादी के बाद जब कांग्रेस की लहर चली तो उस समय कई बार इस सीट पर कांग्रेस का परचम लहराया। उसके बाद वर्ष 1996 से लगातार चार बार इस सीट पर बसपा को जीत हासिल हुई, अलबत्ता वर्ष 1993 में जरूर भाजपा को इस सीट पर विजय मिली। पिछले साल वर्ष 2017 में जब भाजपा की आंधी चली तो इस सीट पर बड़ी आसानी से भाजपा ने जीत हासिल कर ली। भाजपा प्रत्याशी हरीशंकर माहौर ने बसपा के प्रत्याशी बृजमोहन राही को करीब 70 हजार वोटों से परास्त किया था। इस बार स्थिति थोड़ी बदली हुई है। भाजपा ने इस सीट से वर्तमान प्रत्याशी हरीशंकर माहौर का टिकट काटकर उनके स्थान पर आगरा की पूर्व मेयर अंजुला माहौर को मैदान में उतारा है। सपा ने बृजमोहन राही पर दांव लगाया है। राही पिछला चुनाव बसपा से लड़े थे और दूसरे स्थान पर आए थे। इस बार खेमा बदलकर वह सपा से चुनाव लड़ रहे हैं।
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वहीं बसपा ने भी नए चेहरे संजीव कुमार काका को टिकट दिया है। काका अलीगढ़ जिले की विजयगढ़ नगर पंचायत के अध्यक्ष हैं। भाजपा के सामने इस सीट पर अपना कब्जा बरकरार रखने की चुनौती है। इसी वजह से भाजपा ने इस बार वर्तमान विधायक हरीशंकर माहौर का टिकट काटा है। भाजपा को उम्मीद है कि पिछली बार की तरह इस बार भी वह योगी, मोदी और राष्ट्रवाद के नाम पर यह सीट आसानी से जीत जाएगी। उसका परंपरागत वोट नहीं छिटकेगा और उसी के पाले में जाएगा। सपा पूरे जोर-शोर से इस बार इस सीट पर चुनाव लड़ रही है। पार्टी ने बसपा के एक पुराने नेता को अपने खेमे में शामिल किया है।
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सपा को उम्मीद है कि उसका परंपरागत वोट तो उसे मिलेगा ही, साथ ही रालोद के गठबंधन की वजह से उसे काफी फायदा होगा। प्रत्याशी की वजह से उसे जाटव समाज का काफी वोट भी मिलेगा। इस बार यह सीट वह जीत लेगी। सपा इस मुद्दे को भी चुनाव में भुना रही है कि भाजपा ने बाहरी व्यक्ति को प्रत्याशी बनाया है और स्थानीय व्यक्ति को प्रत्याशी नहीं बनाया है। बसपा का इस सीट पर काफी शानदार इतिहास रहा है। बसपा इस सीट को जीतकर अपनी खोई हुई ताकत दिखाना चाहती है। पार्टी को उम्मीद है कि उसका कैडर वोट यथास्थिति में उसके साथ रहेगा, साथ ही मुस्लिम व पिछड़ा वर्ग का वोट भी उसके साथ आएगा और वह इस बार जीत हासिल कर लेगी।

वहीं कांग्रेस ने इस बार एक युवा कुलदीप कुमार को मैदान में उतारा है। वह भी मुकाबले में शामिल होने की कोशिश कर रहे हैं। हर दल क्षेत्र में विकास की बात कह रहा है, लेकिन लोगों की राय इसे लेकर अलग-अलग है। शहर के गली चौमुखा महादेव निवासी रामकिशन शर्मा कहते हैं कि इस सरकार में कानून-व्यवस्था तो ठीक है, लेकिन यहां के विधायक ने कोई काम नहीं कराया। गांव धौरपुर निवासी सतेंद्र शर्मा का कहना है कि आवारा पशु लगातार फसलों को बर्बाद कर रहे हैं। इन पर लगाम लगाई नहीं लगाई गई। सासनी कस्बे के अजीत नगर निवासी राजेंद्र प्रसाद का कहना है कि सरकार का कामकाज तो ठीक रहा है, लेकिन स्थानीय नेताओं ने यहां की समस्याओं की ओर ध्यान नहीं दिया। चामड़ गेट निवासी बृजमोहन शर्मा का कहना है कि पूरे शहर की सड़कें खुदी हुई हैं। आखिर इस समस्या का निदान क्यों नहीं हो रहा।
पुरुष मतदाता 2,23,217
महिला मतदाता 1,92,090
कुल मतदाता 4,15,312
वर्ष 2017 का परिणाम
हरीशंकर माहौर (भाजपा) 1,33,840
बृजमोहन राही (बसपा) 63,179
राजेशराज जीवन (कांग्रेस) 27,301
अनुमानित जातिगत आंकड़े
ब्राह्मण 45,000
ठाकुर 30,000
वैश्य 40,000
दलित 80,000
मुस्लिम 25,000
कुशवाहा 22,000
बघेल 15,000
जाट 15,000
प्रमुख मुद्दे
आवारा गोवंश, टूटी सड़कें, लचर स्वास्थ्य सेवाएं, तकनीकी शिक्षा का अभाव, परंपरागत उद्योग-धंधों का विकास न होना।
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