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हाथरस : किसी के सिर से उठा पिता का साया तो किसी के बुढावे की छिन गई लाठी

Sun, 20 Jun 2021 12:49 AM IST
Aligarh Bureau अलीगढ़ ब्यूरो
Updated Sun, 20 Jun 2021 12:49 AM IST
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Hathras: The shadow of the father lifted from someone's head and the stick was snatched from someone's old age.
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, हाथरस
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कोरोना महामारी ने इस बार हाहाकार मचाया। कई बेटों के सिर से उनके पिता का साया उठ गया तो कई पिताओं से उनके बुढ़ापे की लाठी छिन गई। ऐसे कुछ लोगों से जब बात की गई तो वह काफी भावुक हो गए और पूरा दर्द उनकी जुबां पर आ गया।
अशोक मेहरा के दोनों बेटों को पिता के जाने का मलाल
शहर के एक उद्यमी अशोक मेहरा का निधन कोरोना से हुआ। उनके बेटे अंकित मेहरा और स्वराज मेहरा की आंखें अपने पिता की याद में नम हो र्गइं। दोनों बेटों का कहना है कि कोरोना ने उनके पिता को उनसे छीन लिया। उनका दर्द दिल से भुलाया ही नहीं जाता। कोरोना से उनका अनायास ही चला जाना कलेजा चीर जाता है। दोनों बेटों का कहना है कि पापा की सादगी, अनुशासन, सादगी ईमानदारी दिल को छू जाती थी। सादा जीवन और उच्च विचार पर उनके पिता हमेशा चले।
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हर जन्म में मेरे पापा जैसे पापा मुझे मिलें
हाथरस ब्लॉक में तैनात वरिष्ठ लिपिक रामकुमार गोस्वामी का पिछले दिनों कोरोना से निधन हो गया। अपने पिता को याद करते हुए उनके पुत्र मोहित कहते हैं कि कोरोना ने उनसे पिता का साया छीन लिया। उनका कहना कि मेरे पिता मेरे सबसे अच्छे दोस्त थे। मेरे पिता हमेशा मुझे और मेरे परिवार को खुश देखना चाहते थे, इसलिए वह कभी अपनी तकलीफ किसी को नहीं बताते थे। मेरे पिता मेरे लिए पिता से भी बढ़कर मेरे अच्छे दोस्त और मेरे आदर्श हैं। मुझे अपने पिता पर गर्व है और मैं चाहूंगा हर जन्म में मुझे मेरे यही पिता मिलें।
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कोरोना से मिले दर्द की नहीं हो सकेगी भरपाई
शहर के प्रतिष्ठित दाल मिल स्वामी राधेश्याम अग्रवाल के बड़े बेटे 53 वर्षीय दीपक अग्रवाल का निधन इस साल 27 अप्रैल को कोरोना से जयपुर के एक अस्पताल में हो गया। दीपक ने अपने पीछे एक बेटा और एक बेटी को बिलखते छोड़ा है। अपने बेटे का जिक्र आते ही अग्रवाल बेहद गमजदां हो गए। उनका कहना है कि उन्होंने अपने पिता को 18 वर्ष की आयु में खो दिया था। तब से लेकर अब तक वह संघर्ष कर रहे हैं। अब उनकी आयु 74 वर्ष हो गई है। उन्हें उम्मीद थी कि उनकी वृद्धावस्था सकून से कटेगी, लेकिन कोरोना ने उन्हें ऐसा जख्म दे दिया, जिसकी कभी भरपाई नहीं हो सकती।

बुढ़ापे में ये दिन देखना पड़ेगा, सोचा भी न था
कोरोना ने सासनी के सिद्धनगर निवासी अतर सिंह के दोनों जवान बेटों को लील लिया। अतर सिंह के बुढ़ापे की लाठी छिन गई। बड़ा बेटा शिवशंकर 25 अप्रैल और छोटा बेटा दिगंबर 22 अप्रैल को काल के गाल में समा गए। दोनों ने अपने पीछे मासूम बच्चों को छोड़ा है। अतर सिंह ने अपने खुशहाल परिवार के तमाम तमाम सपने संजो रखे थे, लेकिन उनके सारे सपने चकनाचूर हो गए। उनका कहना है कि बुढ़ापे में यह दिन देखना पड़ेगा, कभी सोचा भी न था। घर के दो चिराग बुझ गए। बुढ़ापे में भगवान किसी को ऐसा दर्द न दे। अतर सिंह का कहना है कि अब पता नहीं उनका यह जीवन कैसे कटेगा। बाप जिंदा रहे और बेटे चले जाएं, इससे बड़ी सजा और क्या होगी।
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