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हाथरस : छुट्टा गोवंश ले रहे लोगों की जान, फसलों को पहुंचा रहे नुकसान
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हाथरस : शहर में विचरण करते आवारा गोवंश। संवाद
- फोटो : HATHRAS
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न्यूज डेस्क, अमर उजाला, हाथरस
जिले में छुट्टा गोवंश एक बड़ी समस्या बने हुए हैं। किसान रात भर जागकर भी इनसे अपनी फसलों को नहीं बचा पा रहे हैं। खेतों की रखवाली करने के दौरान सांड़ों के हमले से कई लोगों की जान भी जा चुकी है उसके बावजूद इस दिशा में कोई ठोस कदम नहीं उठाया गया है। इससे किसान व आमजन काफी परेशान हैं।
जिले में 29 अस्थायी गोशालाएं संचालित हैं लेकिन इसके बाद भी काफी गोवंश छुट्टा घूम रहे हैं। ये लोगों की जान-माल के दुश्मन बने हुए हैं। बृहस्पतिवार की रात्रि में एक आवारा गोवंश ने महौ में फसल की सुरक्षा कर रहे राजेंद्र की जान ले ली। इस तरह की घटनाएं पहले भी हो चुकी हैं। आवारा गोवंश देहात और शहर में लोगों के लिए बड़ी समस्या बन रहे हैं। गोवंशों को पकड़कर कर गोशाला भेजने की व्यवस्था कारगर साबित नहीं हो पा रही।
प्रशासन की ओर से गांव पुन्नेर व नगला ब्राहमणान में वृहद गोशाला का संचालन भी किया जा रहा है। इन दोनों वृहद गोशालाओं में 710 गोवंशों को रखा गया है। प्रशासन की ओर से मेंडू स्थित कान्हा गोशाला में 167 आवारा गोवंशों को रखा गया है। इसके बावजूद छुट्टा गोवंश की संख्या बढ़ती ही जा रही है। किसान अपनी फसल को बचाने के लिए रातों को खेतों पर रखवाली करते हैं। किसानों का कहना है कि आवारा गोवंश न केवल फसल बर्बाद कर रहे हैं बल्कि लोगों की जान के भी दुश्मन भी बने हुए हैं। इनके आतंक से मुक्ति दिलाने के लिए कोई इंतजाम नहीं किए जा रहे। संवाद
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- जिले में छुट्टा गोवंश की समस्या विकराल बनी हुई है। फसल की रखवाली के लिए रातों को खेतों पर रखवाली करनी पड़ती है। लेकिन, इस दौरान गोवंशों से जान का खतरा भी बना रहता है। हम ऐसा प्रत्याशी चुनेंगे जो हमारी इस समस्या का निदान करेगा। - श्यामवीर सिंह निवासी जटोई
- छुट्टा गोवंश रात भर खेत में घुसकर फसलों को नष्ट कर रहे हैं। इनसे खेत की रखवाली करने के लिए रात-रात भर जागना पड़ रहा है। लेकिन, डर बना रहता है कि पता नहीं ये कब हमला कर दें। सांड़ों के हमले से कई लोगों की जान जा चुकी है। इस बार चुनाव में यह बड़ा मुद्दा होगा। - शिव दयाल सिंह, निवासी कटैला।
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जिले में छुट्टा गोवंश एक बड़ी समस्या बने हुए हैं। किसान रात भर जागकर भी इनसे अपनी फसलों को नहीं बचा पा रहे हैं। खेतों की रखवाली करने के दौरान सांड़ों के हमले से कई लोगों की जान भी जा चुकी है उसके बावजूद इस दिशा में कोई ठोस कदम नहीं उठाया गया है। इससे किसान व आमजन काफी परेशान हैं।
जिले में 29 अस्थायी गोशालाएं संचालित हैं लेकिन इसके बाद भी काफी गोवंश छुट्टा घूम रहे हैं। ये लोगों की जान-माल के दुश्मन बने हुए हैं। बृहस्पतिवार की रात्रि में एक आवारा गोवंश ने महौ में फसल की सुरक्षा कर रहे राजेंद्र की जान ले ली। इस तरह की घटनाएं पहले भी हो चुकी हैं। आवारा गोवंश देहात और शहर में लोगों के लिए बड़ी समस्या बन रहे हैं। गोवंशों को पकड़कर कर गोशाला भेजने की व्यवस्था कारगर साबित नहीं हो पा रही।
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प्रशासन की ओर से गांव पुन्नेर व नगला ब्राहमणान में वृहद गोशाला का संचालन भी किया जा रहा है। इन दोनों वृहद गोशालाओं में 710 गोवंशों को रखा गया है। प्रशासन की ओर से मेंडू स्थित कान्हा गोशाला में 167 आवारा गोवंशों को रखा गया है। इसके बावजूद छुट्टा गोवंश की संख्या बढ़ती ही जा रही है। किसान अपनी फसल को बचाने के लिए रातों को खेतों पर रखवाली करते हैं। किसानों का कहना है कि आवारा गोवंश न केवल फसल बर्बाद कर रहे हैं बल्कि लोगों की जान के भी दुश्मन भी बने हुए हैं। इनके आतंक से मुक्ति दिलाने के लिए कोई इंतजाम नहीं किए जा रहे। संवाद
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- जिले में छुट्टा गोवंश की समस्या विकराल बनी हुई है। फसल की रखवाली के लिए रातों को खेतों पर रखवाली करनी पड़ती है। लेकिन, इस दौरान गोवंशों से जान का खतरा भी बना रहता है। हम ऐसा प्रत्याशी चुनेंगे जो हमारी इस समस्या का निदान करेगा। - श्यामवीर सिंह निवासी जटोई
- छुट्टा गोवंश रात भर खेत में घुसकर फसलों को नष्ट कर रहे हैं। इनसे खेत की रखवाली करने के लिए रात-रात भर जागना पड़ रहा है। लेकिन, डर बना रहता है कि पता नहीं ये कब हमला कर दें। सांड़ों के हमले से कई लोगों की जान जा चुकी है। इस बार चुनाव में यह बड़ा मुद्दा होगा। - शिव दयाल सिंह, निवासी कटैला।