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हाथरस : कठिनाइयों से जूझते हुए 305 गोवंश का पालन कर रहे प्रधान
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महामई सलावतनगर की गोशाला में गायों के साथ प्रधान सत्यप्रकाश यादव, बिक्रांत ठाकुर। संवाद
- फोटो : SIKANDHRA RAHU
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संवाद न्यूज एजेंसी, सिकंदराराऊ।
ग्राम सभा महामई सलावतनगर के प्रधान सत्यप्रकाश यादव कई कठिनाइयों का सामना करते हुए 305 गाय और सांड़ों का पालन कर रहे हैं। पांच हजार रुपये मासिक पारिश्रमिक पर पांच सेवक उन्होंने गोवंश की सेवा-सुश्रुसा के लिए लगा रखे हैं। भूसे की कीमतों में तेजी की वजह से वह करब से गोवंश का पेट भर रहे हैं।
बता दें कि सरकार ने जब से गोवंश पालने के लिए अस्थायी गोशाला के संचालन की योजना शुरू की है, तब से ग्राम प्रधानों की चुनौतियां बढ़ गई हैं। यदि गोवंश कमजोर या बीमार नजर आता है तो संचालकों पर आरोप लगता है कि वह उन्हें ठीक से चारा नहीं खिला रहे। भ्रष्टाचार के भी आरोप लगते हैं।
एक गोवंश के लिए महज 30 रुपये रोज सरकार की तरफ से उपलब्ध कराए जाते हैं। इसके लिए भी संचालक को विकास खंड कार्यालय के चक्कर काटने पड़ते हैं। प्रधान का कहना है कि कई महीनों तक सेवकों का पारिश्रमिक भी नहीं आता। जब वह काम करने से मना कर देते हैं तो संचालक को उनकी खुशामद करनी पड़ती है या फिर अपने पास से पैसा देकर उसे रोकना पड़ता है।
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प्रधान ने बताया कि वर्तमान में महामई सलावतनगर की गोशाला में 305 गायें और सांड़ पल रहे हैं। गोवंश के चारे के लिए वर्तमान में उपलब्ध करब को साढ़े तीन-चार हजार रुपये प्रति क्विंटल के दाम पर खरीदा गया है, लेकिन गोवंश की संख्या के मुकाबले यह चारा कम पड़ जाता है।
बारिश कम होने से इस बार घास भी कम है, फिर भी जैसे-तैसे गोवंश का पेट भरा जाता है। प्रधान का कहना है कि गोवंश की मृत्यु के बाद उन्हें जमीन में दफन करने के लिए जेसीबी भी उपलब्ध नहीं हो पाती। बीमार होने पर उनके लिए दवाओं का इंतजाम करना भी मुश्किल होता है।
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ग्राम सभा महामई सलावतनगर के प्रधान सत्यप्रकाश यादव कई कठिनाइयों का सामना करते हुए 305 गाय और सांड़ों का पालन कर रहे हैं। पांच हजार रुपये मासिक पारिश्रमिक पर पांच सेवक उन्होंने गोवंश की सेवा-सुश्रुसा के लिए लगा रखे हैं। भूसे की कीमतों में तेजी की वजह से वह करब से गोवंश का पेट भर रहे हैं।
बता दें कि सरकार ने जब से गोवंश पालने के लिए अस्थायी गोशाला के संचालन की योजना शुरू की है, तब से ग्राम प्रधानों की चुनौतियां बढ़ गई हैं। यदि गोवंश कमजोर या बीमार नजर आता है तो संचालकों पर आरोप लगता है कि वह उन्हें ठीक से चारा नहीं खिला रहे। भ्रष्टाचार के भी आरोप लगते हैं।
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एक गोवंश के लिए महज 30 रुपये रोज सरकार की तरफ से उपलब्ध कराए जाते हैं। इसके लिए भी संचालक को विकास खंड कार्यालय के चक्कर काटने पड़ते हैं। प्रधान का कहना है कि कई महीनों तक सेवकों का पारिश्रमिक भी नहीं आता। जब वह काम करने से मना कर देते हैं तो संचालक को उनकी खुशामद करनी पड़ती है या फिर अपने पास से पैसा देकर उसे रोकना पड़ता है।
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प्रधान ने बताया कि वर्तमान में महामई सलावतनगर की गोशाला में 305 गायें और सांड़ पल रहे हैं। गोवंश के चारे के लिए वर्तमान में उपलब्ध करब को साढ़े तीन-चार हजार रुपये प्रति क्विंटल के दाम पर खरीदा गया है, लेकिन गोवंश की संख्या के मुकाबले यह चारा कम पड़ जाता है।
बारिश कम होने से इस बार घास भी कम है, फिर भी जैसे-तैसे गोवंश का पेट भरा जाता है। प्रधान का कहना है कि गोवंश की मृत्यु के बाद उन्हें जमीन में दफन करने के लिए जेसीबी भी उपलब्ध नहीं हो पाती। बीमार होने पर उनके लिए दवाओं का इंतजाम करना भी मुश्किल होता है।