फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
डाउनलोड करें

सब्सक्राइब करें
Hindi News ›   Uttar Pradesh ›   Hathras News ›   Hathras: The election results will decide the stature of many leaders in the district

हाथरस : जिले कई नेताओं का कद तय करेगा चुनाव परिणाम

Wed, 09 Mar 2022 11:08 PM IST
Aligarh Bureau अलीगढ़ ब्यूरो
Updated Wed, 09 Mar 2022 11:08 PM IST
विज्ञापन
Hathras: The election results will decide the stature of many leaders in the district
हाथरस : एमजी पॉलीटे​िक्नक में बैरिकेडिंग लगाते कर्मचारी। संवाद - फोटो : HATHRAS
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, हाथरस
विज्ञापन

हाथरस विधानसभा चुनाव का परिणाम जिले के कई कद्दावर नेताओं का कद तय करेगा। कई कद्दावर नेताओं की प्रतिष्ठा इस चुनाव में दांव पर लगी है। इतना ही इस चुनाव का नतीजा इस साल होने वाले विधान परिषद सदस्य और निकाय चुनाव को भी काफी प्रभावित करेगा। इस चुनाव में यह भी देखने वाली बात होगी कि दल बदलकर चुनाव लड़ने वाले नेताओं की इस बार दाल गलेगी या नहीं और बाहरी व स्थानीय प्रत्याशी का मुद्दा हावी होगा या नहीं। वैसे भाजपा को जहां वोटों के ध्रुवीकरण से तीनों सीटों पर जीत की आस है तो सपा-रालोद गठबंधन और बसपा को जातीय समीकरणों पर पूरा भरोसा है।
जिले में तीन विधानसभा सीट हाथरस (सुरक्षित), सादाबाद और सिकंदराराऊ पर तीसरे चरण में मतदान हुआ था। अब बृहस्पतिवार को पूरे प्रदेश के साथ-साथ इस जिले में तीनों सीटों पर मतगणना होगी। वर्ष 2017 के चुनाव में भाजपा को इस जिले से हाथरस और सिकंदराराऊ सीटों पर सफलता मिली थी, जबकि सादाबाद सीट पर बसपा के बैनर तले चुनाव लड़े पूर्व ऊर्जा मंत्री रामवीर उपाध्याय ने बाजी मार ली थी। इस बार तस्वीर बदली हुई है। पिछली बार हाथरस सदर सीट पर भाजपा से विधायक चुने गए हरीशंकर माहौर को पार्टी ने टिकट नहीं दिया और उनके स्थान पर आगरा की पूर्व मेयर अंजुला माहौर को चुनाव लड़ाया है। सिकंदराराऊ में भाजपा ने वर्तमान विधायक वीरेंद्र सिंह राना पर फिर दांव लगाया। सादाबाद सीट पर कब्जा करने के लिए भाजपा ने पूरी ताकत झोंक दी और इस बार पूर्व मंत्री रामवीर उपाध्याय को भाजपा ने मैदान में उतारा।
विज्ञापन

तीनों ही सीटों पर भाजपा मुख्य मुकाबले में है। किसी सीट पर मुकाबला त्रिकोणीय है तो किसी सीट पर आमने-सामने की टक्कर है। इस चुनाव में कई नेताओं की प्रतिष्ठा भी दांव पर लगी है। इसमें सबसे ज्यादा रोचक मुकाबला सादाबाद सीट पर होने का अनुमान है। वहां भाजपा ने रामवीर उपाध्याय को मैदान में उतारा है। देखने वाली बात यह होगी कि रालोद प्रत्याशी प्रदीप उर्फ गुड्डू चौधरी उनका विजय रथ रोक पाएंगे या नहीं। वैसे, सादाबाद की सीट को जीतकर रालोद अपनी खोई हुई जमीन हासिल करना चाहता है। खुद इस सीट को जयंत चौधरी की प्रतिष्ठा से जोड़ा जा रहा है। सादाबाद विधानसभा क्षेत्र में जयंत ने करीब आधा दर्जन से ज्यादा सभाएं कीं और वह इस क्षेत्र में लगातार सक्रिय रहे। वर्ष 2017 में भाजपा की जब सुनामी चली थी तो पूरे अलीगढ़ मंडल में भाजपा इस सीट को नहीं जीत पाई थी। इस बार भाजपा को आस है कि रामवीर के सहारे उसे इस सीट पर जीत मिल जाएगी। सिकंदराराऊ सीट पर देखने वाली बात यह होगी कि वीरेंद्र सिंह राना दोबारा इस सीट से जीत पाएंगे या नहीं।
विज्ञापन
विज्ञापन

रुझान में वहां सपा और बसपा प्रत्याशी से उन्हें कड़ी टक्कर मिलती दिखी। इसी प्रकार हाथरस सीट पर भाजपा ने नए चेहरे अंजुला माहौर को मैदान में उतारा। मोदी और योगी के नाम पर भाजपा को उम्मीद है कि इस सीट पर उसे आसानी से सफलता मिल जाएगी। वहीं पिछली बार बसपा से चुनाव लड़े बृजमोहन राही यहां से इस बार सपा से चुनाव लड़े तो बसपा ने संजीव कुमार काका को मैदान में उतारा। इस सीट पर भाजपा अपनी स्थिति काफी मजबूत मान रही है। वैसे इस सीट के रूझान में यह बात सामने आई कि भाजपा का मुकाबला बसपा से होगा। वैसे यह चुनाव परिणाम जिले के कई नेताओं का राजनीतिक भविष्य तय करेगा। आने वाले विधान परिषद और नगर के निकाय चुनाव भी इस चुनाव के नतीजों से काफी प्रभावित होंगे। संवाद
रामवीर छठवीं बार जीतेंगे या नहीं
हाथरस। सादाबाद विधानसभा सीट का चुनाव काफी सुर्खियों में है। इसकी वजह यह है कि वहां से पूर्व मंत्री रामवीर उपाध्याय मैदान में हैं। अस्वस्थ होने के बाद भी भाजपा ने उन्हें टिकट देकर मैदान में उतारा। वह वर्तमान में भी इस सीट से विधायक हैं। अब तक लगातार पांच बार विधानसभा में पहुंचे रामवीर इस बार सादाबाद की सीट भाजपा की झोली में डाल पाएंगे या नहीं। यदि वह यह चुनाव जीते तो यह उनकी लगातार छठवीं जीत होगी। संवाद

देवेंद्र, रणजीत पर भी रहेगी हाथरस वालों की टकटकी
हाथरस। जिले के कई नेताओं ने इस बार बाहर से भी किस्मत आजमाई है। इसमें पूर्व सपा विधायक देवेंद्र अग्रवाल का नाम प्रमुख है। पूर्व विधायक देवेंद्र इस बार सपा से मथुरा-वृंदावन सीट से पार्टी उम्मीदवार बने। वहीं एटा जिले की जलेसर सीट से पूर्व केंद्रीय मंत्री रामजीलाल सुमन के बेटे रणजीत सुमन भी सपा से चुनाव लड़े हैं। ऐसे में वहां के चुनाव परिणाम पर भी सभी की टकटकी रहेगी। संवाद
विज्ञापन
विज्ञापन

रहें हर खबर से अपडेट, डाउनलोड करें Android Hindi News App, iOS Hindi News App और Amarujala Hindi News APP अपने मोबाइल पे|
Get all India News in Hindi related to live update of politics, sports, entertainment, technology and education etc. Stay updated with us for all breaking news from India News and more news in Hindi.

विज्ञापन
विज्ञापन
विज्ञापन

एड फ्री अनुभव के लिए अमर उजाला प्रीमियम सब्सक्राइब करें

Next Article

AU ऐप में पढ़ें

Followed