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हाथरस : लाल रक्त कोशिकाओं को नष्ट कर देता है थैलेसीमिया

Sat, 07 May 2022 11:43 PM IST
Aligarh Bureau अलीगढ़ ब्यूरो
Updated Sat, 07 May 2022 11:43 PM IST
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Hathras: Thalassemia destroys red blood cells
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, हाथरस
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रविवार को थैलेसीमिया दिवस है। जिले के प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्रों पर लगने वाले मुख्यमंत्री जन आरोग्य स्वास्थ्य मेलों में भी इस रोग को लेकर लोगों को जागरूक किया जाएगा। नौ मई को भी प्रधानमंत्री सुरक्षित मातृत्व अभियान दिवस के मौके पर भी इस रोग के बारे में जागरुकता अभियान चलाया जाएगा। मुख्य चिकित्साधिकारी (सीएमओ) डॉ. अनिल सागर वशिष्ठ का कहना है कि यह रोग आनुवंशिक रक्त विकार रोग है।
सीएमओ ने बताया कि यह रोग जीन के माध्यम से माता-पिता से बच्चों में संचारित होता है। इस रोग में हीमोग्लोबिन निर्माण के उत्तरदायी जींस या तो नष्ट हो जाते है या अनुपस्थित होते हैं। हीमोग्लोबिन लाल रक्त कोशिकाओं में पाये जाने वाला एक प्रोटीन है, जो कि शरीर के अंगों और ऊतकों में ऑक्सीजन के परिवहन का कार्य करता है। हीमोग्लोबिन की क्षति या अपर्याप्तता के कारण लाल रक्त कोशिकाएं नष्ट हो जाती हैं, जिससे एनीमिया हो सकता है। थैलेसीमिया रोग में शरीर में लाल रक्त कण और रेड ब्लड सेल (आरबीसी) नहीं बन पाते हैं और जो थोडे़-बहत बन जाते हैं, वह केवल थोडे़ समय तक ही रहते हैं। थैलेसीमिया से ग्रसित बच्चों को बार-बार खून चढ़ाने की जरूरत पड़ती है। ऐसा न करने पर बच्चा जीवित नहीं रह पाता है।
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अपर मुख्य चिकित्साधिकारी डॉ. राजीव गुप्ता ने बताया कि यह रोग दो प्रकार का होता है अल्फा थैलेसीमिया एवं बीटा थैलेसीमिया। रोग के तीन प्रमुख रूप होते हैं। इनमें थैलेसीमिया गंभीर प्रमुख है। इस प्रकार के रोग में रोगी को माता-पिता दोनों से दोषपूर्ण जीन प्राप्त होते हैं। इस रोग से ग्रसित मरीजों को एनीमिया, धीमी विकास गति, परिपक्वता में विलंब के साथ प्लीहा, यकृत, ह्दय या हड्डियों के साथ अन्य समस्याएं भी हो सकती हैं।
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दूसरा होता है थैलेसीमिया इंटरमीडिया। इसमें थैलेसीमिया के हल्के से लेकर गंभीर तक लक्षण देखने को मिलते हैं। तीसरा होता है थैलेसीमिया माइनर। इस प्रकार के विकार से ग्रसित रोगी रोग के वाहक होते हैं। अधिकांश समय उनमें लक्षण नहीं होते हैं। थैलेसीमिया माइनर तब प्रकट होता है, जब माता-पिता दोनों में से रोगी को एक से दोषपूर्ण जीन प्राप्त होता है। थैलेसीमिया का पता रक्त की जांच से किया जाता है। यह उपचार योग्य रोग है। थैलेसीमिया मेजर के रोगियों के इलाज में क्रोनिक ब्लड ट्रांसफ्यूजन थेरेपी, आयरन कीलेशन थेरेपी आदि शामिल है। संवाद

जिले में नहीं है थैलेसीमिया की जांच की व्यवस्था
हाथरस। जिले में इस रोग की जांच की व्यवस्था नहीं है। एसीओएम डॉ. राजीव गुप्ता ने बताया कि यदि किसी मरीज में इस रोग के लक्षण पाए जाते हैं तो उसे जांच के लिए अलीगढ़ के मेडिकल कॉलेज भेजा जाता है। उन्होंने यह भी बताया कि इस समय जिले में इस रोग के चार मरीज चिन्हित हैं। इनका जिला अस्पताल की ओपीडी में इलाज चल रहा है और नियमित रूप से इन्हें खून भी चढ़ाया जाता है। संवाद
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