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धुंध और कोहरे की चादर से घिरा हाथरस
अमर उजाला ब्यूरो हाथरस।
Updated Wed, 08 Nov 2017 11:29 PM IST
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जानलेवा धुंध
- फोटो : Amar Ujala
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लोग जब बुधवार की सुबह सोकर उठे तो हर तरफ धुआं-धुआं देखकर सकते में आ गए। लोगों के यह समझना मुश्किल हो रहा था यह दिल्ली-एनसीआर से आई खतरनाक धुंध है या कोहरा। मंगलवार देर रात से बुधवार दोपहर करीब 12 बजे तक हाथरस शहर धुएं की चादर में लिपटा रहा। सिकंदराराऊ, सादाबाद, सासनी, मुरसान, मैंडू समेत पूरे देहात क्षेत्र में भी हालात कमोेवेश ऐसे ही रहे।
धुंध के कारण कुछ लोगों की आंखों में जलन भी हुई। लोगों में डर रहा कि यहां भी दिल्ली जैसे हालत पैदा न हो जाएं। हालांकि दोपहर बाद में धुआं छट गया और मौसम साफ हो गया। धुंध और कोहरे के कारण यातायात चरमरा गया। रोड पर वाहन रेंगते नजर आए। ट्रेनें भी निर्धारित समय से काफी देरी से स्थानीय स्टेशन पर पहुंचीं। हाइवे पर भी वाहन काफी धीमी गति से गुजरे।
हाथरस में छाई धुंध स्मॉग नहीं, फॉग (कोहरा) थी। अगर यह स्मॉग होता तो जल्दी नहीं छंटता। स्मॉग बिना हवा या बारिश के नहीं छंटता है। कोहरे से फसलों को कोई नुकसान नहीं है। गेहूं और सरसों की फसल के लिए तो यह फायदेमंद है। आलू की जो फसल अभी जमी नहीं है, उसके लिए भी यह फायदेमंद साबित होगा।
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-डॉ.श्याम सिंह, कृषि वैज्ञानिक
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धुंध के कारण कुछ लोगों की आंखों में जलन भी हुई। लोगों में डर रहा कि यहां भी दिल्ली जैसे हालत पैदा न हो जाएं। हालांकि दोपहर बाद में धुआं छट गया और मौसम साफ हो गया। धुंध और कोहरे के कारण यातायात चरमरा गया। रोड पर वाहन रेंगते नजर आए। ट्रेनें भी निर्धारित समय से काफी देरी से स्थानीय स्टेशन पर पहुंचीं। हाइवे पर भी वाहन काफी धीमी गति से गुजरे।
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हाथरस में छाई धुंध स्मॉग नहीं, फॉग (कोहरा) थी। अगर यह स्मॉग होता तो जल्दी नहीं छंटता। स्मॉग बिना हवा या बारिश के नहीं छंटता है। कोहरे से फसलों को कोई नुकसान नहीं है। गेहूं और सरसों की फसल के लिए तो यह फायदेमंद है। आलू की जो फसल अभी जमी नहीं है, उसके लिए भी यह फायदेमंद साबित होगा।
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-डॉ.श्याम सिंह, कृषि वैज्ञानिक