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हाथरस : गुलाब ने बिखेरी उत्पादकों की जिंदगी में समृद्धि की खुशबू
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हाथरस : गुलाब के फूल से अर्क निकालने का होता काम। संवाद
- फोटो : HASAYAN
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, हसायन (हाथरस)। हसायन के किसानों की जिंदगी में इस बार गुलाब की खेती ने समृद्धि की खुशबू बिखेरी है। इस बार उत्पादकों को एक मन (40 किलो) के 16 हजार रुपये तक यानी लगभग दोगुने दाम मिले। उत्साहित किसानों का कहना है कि अगले सीजन में गुलाब का रकबा बढ़ेगा।
हसायन इत्र उद्योग का बड़ा केंद्र है। हसायन और इसके आस-पास गुलाब की काफी खेती होती है। गुलाब के अर्क से यहां इत्र, गुलाबजल, गुलकंद व अन्य उत्पाद तैयार किए जाते हैं। गुलाब पर आधारित इस उद्योग का करीब दो सौ करोड़ रुपये से ज्यादा का सालाना टर्न ओवर है। उद्योग से काफी लोगों की रोजी-रोटी चलती है। सीजन के समय यहां काफी उद्यमी हसायन में डेरा जमाए रहते हैं। यहां से कच्चा माल कन्नौज, कोलकाता, लखनऊ जाता है। वहां बड़े उद्यमी अपना ब्रांड लगाकर इसे बाजार में उतार देते हैं।
कोरोना की वजह से किसानों को हो रहा था घाटा
पिछले दो साल से गुलाब उत्पादक किसान घाटे में थे। कोरोना इसकी मुख्य वजह था। इस बार दोनों सीजनों में गुलाब की खेती भी ज्यादा हुई। मार्केट में किसानों को अच्छे रेट भी मिले। हर वर्ष चैत्र मास व बरसात के आषाढ़ श्रावणी मास में गुलाब की पैदावार होती है। चैत्र मास के सीजन की पैदावार के दौरान दस से सोलह हजार रुपये प्रति चालीस किलोग्राम( प्रति मन) के हिसाब से बिका। जबकि बरसाती सीजन के दौरान गुलाब के फूल का रेट पांच हजार रुपये से दस हजार रुपये प्रति मन के खरीदा गया। संवाद
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चिलिंग प्लांट खोलने की मांग अधूरी
हसायन। हसायन में चिलिंग प्लांट नहीं हैं। लंबे समय से किसान यहां शासन प्रशासन व जनप्रतिनिधियों से चिलिंग प्लांट स्थापित करने की मांग कर रहे हैं। उनका कहना है कि यदि हसायन में चिलिंग प्लांट खुल जाए तो वह अपनी फसल को कुछ दिन तक महफूज रख सकेंगे। किसानों का कहना है कि गुलाब का फूल जब वह मार्केट में लाते हैं तो चंद घंटे में ही मुरझा जाता है। ऐसे में शाम को ही उन्हें इसे बेचने को मजबूर होना पड़ता है।
क्या कहते हैं किसान
गुलाब की खेती ने पिछले दो साल से निराश कर दिया था। कोरोना में इत्र उद्योग की महक भी धीमी पड़ने लगी थी तो गुलाब की खपत भी नहीं हुई थी। पिछली बार तो आधे रेट मिले थे। गुलाब की निराई-गुड़ाई से लेकर फूल तुड़वाने तक के लिए मजदूरों के साथ मेहनत कर अच्छा मुनाफा कमाने की कोशिश में रहते हैं। वर्ष के चैत्र व बरसाती सीजन में सही रेट होने से किसानों को काफी मुनाफा हो गया।
मनोज कुमार, गुलाब उत्पादक किसान।
गुलाब के इस बार सही रेट मिले हैं। हसायन में यदि चिलिंग प्लांट स्थापित हो जाए तो किसानों को और ज्यादा लाभ होगा। बाजार में गुलाब जब लाया जाता है तो वह शाम तक मुरझा जाता है। ऐसे में हमें व्यापारियों की कीमत पर ही गुलाब बेचना पड़ता है। चिलिंग प्लांट लगने से हम अपनी फसल को और ज्यादा समय तक सुरक्षित रख सकेंगे।
अमित कुमार, गुलाब उत्पादक किसान।
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हसायन इत्र उद्योग का बड़ा केंद्र है। हसायन और इसके आस-पास गुलाब की काफी खेती होती है। गुलाब के अर्क से यहां इत्र, गुलाबजल, गुलकंद व अन्य उत्पाद तैयार किए जाते हैं। गुलाब पर आधारित इस उद्योग का करीब दो सौ करोड़ रुपये से ज्यादा का सालाना टर्न ओवर है। उद्योग से काफी लोगों की रोजी-रोटी चलती है। सीजन के समय यहां काफी उद्यमी हसायन में डेरा जमाए रहते हैं। यहां से कच्चा माल कन्नौज, कोलकाता, लखनऊ जाता है। वहां बड़े उद्यमी अपना ब्रांड लगाकर इसे बाजार में उतार देते हैं।
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कोरोना की वजह से किसानों को हो रहा था घाटा
पिछले दो साल से गुलाब उत्पादक किसान घाटे में थे। कोरोना इसकी मुख्य वजह था। इस बार दोनों सीजनों में गुलाब की खेती भी ज्यादा हुई। मार्केट में किसानों को अच्छे रेट भी मिले। हर वर्ष चैत्र मास व बरसात के आषाढ़ श्रावणी मास में गुलाब की पैदावार होती है। चैत्र मास के सीजन की पैदावार के दौरान दस से सोलह हजार रुपये प्रति चालीस किलोग्राम( प्रति मन) के हिसाब से बिका। जबकि बरसाती सीजन के दौरान गुलाब के फूल का रेट पांच हजार रुपये से दस हजार रुपये प्रति मन के खरीदा गया। संवाद
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चिलिंग प्लांट खोलने की मांग अधूरी
हसायन। हसायन में चिलिंग प्लांट नहीं हैं। लंबे समय से किसान यहां शासन प्रशासन व जनप्रतिनिधियों से चिलिंग प्लांट स्थापित करने की मांग कर रहे हैं। उनका कहना है कि यदि हसायन में चिलिंग प्लांट खुल जाए तो वह अपनी फसल को कुछ दिन तक महफूज रख सकेंगे। किसानों का कहना है कि गुलाब का फूल जब वह मार्केट में लाते हैं तो चंद घंटे में ही मुरझा जाता है। ऐसे में शाम को ही उन्हें इसे बेचने को मजबूर होना पड़ता है।
क्या कहते हैं किसान
गुलाब की खेती ने पिछले दो साल से निराश कर दिया था। कोरोना में इत्र उद्योग की महक भी धीमी पड़ने लगी थी तो गुलाब की खपत भी नहीं हुई थी। पिछली बार तो आधे रेट मिले थे। गुलाब की निराई-गुड़ाई से लेकर फूल तुड़वाने तक के लिए मजदूरों के साथ मेहनत कर अच्छा मुनाफा कमाने की कोशिश में रहते हैं। वर्ष के चैत्र व बरसाती सीजन में सही रेट होने से किसानों को काफी मुनाफा हो गया।
मनोज कुमार, गुलाब उत्पादक किसान।
गुलाब के इस बार सही रेट मिले हैं। हसायन में यदि चिलिंग प्लांट स्थापित हो जाए तो किसानों को और ज्यादा लाभ होगा। बाजार में गुलाब जब लाया जाता है तो वह शाम तक मुरझा जाता है। ऐसे में हमें व्यापारियों की कीमत पर ही गुलाब बेचना पड़ता है। चिलिंग प्लांट लगने से हम अपनी फसल को और ज्यादा समय तक सुरक्षित रख सकेंगे।
अमित कुमार, गुलाब उत्पादक किसान।