{"_id":"623a1199f91af344225ff85f","slug":"hathras-power-supply-will-be-improved-by-installing-865-transformers-hathras-news-ali287599519","type":"story","status":"publish","title_hn":"हाथरस : 865 ट्रांसफार्मर लगाकर सुधारी जाएगी बिजली आपूर्ति","category":{"title":"City & states","title_hn":"शहर और राज्य","slug":"city-and-states"}}
हाथरस : 865 ट्रांसफार्मर लगाकर सुधारी जाएगी बिजली आपूर्ति
विज्ञापन
खबरें लगातार पढ़ने के लिए अमर उजाला एप डाउनलोड करें
या
वेबसाइट पर पढ़ना जारी रखने के लिए वीडियो विज्ञापन देखें
अगर आपके पास प्रीमियम मेंबरशिप है तो
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, हाथरस
सौभाग्य योजना में बिजली महकमे में उपभोक्ताओं की संख्या में करीब 10 हजार का इजाफा हुआ है, लेकिन इसके सापेक्ष बिजलीघरों और ट्रांसफॉर्मरों की क्षमता नहीं बढ़ी है। नतीजा, पुराने ट्रांसफॉर्मर ओवरलोड होकर फुंकने लगे हैं। इस स्थिति को देखते हुए बिजली महकमे ने जिले में 865 नये ट्रांसफॉर्मर लगवाने का निर्णय लिया है। रिवेंप योजना के तहत इसके लिए डिटेल प्रोजेक्ट रिपोर्ट (डीपीआर) तैयार की गई है। अप्रैल माह में काम शुरू होने की उम्मीद जताई जा रही है।
उल्लेखनीय है कि जिले में वर्तमान में 64 बिजलीघरों के जरिये जिले के दो लाख 64 हजार उपभोक्ताओं को आपूर्ति की जाती है। पांच साल पहले यहां ढाई लाख उपभोक्ता थे। अब केंद्र सरकार की सौभाग्य योजना में बिजली कनेक्शनों का बोझ बढ़ गया। इस हिसाब से अब बिजली महकमा अपने उपकरणों की क्षमता बढ़ाने की तैयारी कर रहा है।
कहां कितनी क्षमता के लगेंगे ट्रांसफॉर्मर
हाथरस। बिजली विभाग हाथरस शहर के अलावा सासनी के गांव बरसै व सादाबाद के गांव जटोई में तीन नये बिजलीघर बनाने की तैयारी के साथ जिलेभर में 865 नए ट्रांसफार्मर लगाए जाएंगे। इसमें 10 केवीए के 78, 25 केवीए के 391 ट्रांसफॉर्मर, 63 केवीए के 189 ट्रांसफॉर्मर, 100 केवीए के 168 ट्रांसफॉर्मर, 250 केवीए के तीन, 400 केवीए के नौ ट्रांसफॉर्मर शहर, देहात और कस्बों में लगाए जाएंगे। संवाद
विज्ञापन
ऑडिट में हुई बिजली खपत की सही जानकारी
हाथरस। बिजली निगम के अफसरों द्वारा हर साल अब तक ट्रांसफार्मर बार एनर्जी का ऑडिट कराया जाता था। इस बार निगम स्तर से फीडर वार एनर्जी का ऑडिट कराया गया है। इस ऑडिट में यह भी पता चला है कि वास्तविक में बिजली की खपत कितनी है। कितने उपकरण की आवश्यकता है। इसके अलावा यह भी सामने आया है कि कौन से फीडर पर बिजली की कितनी चोरी हो रही है। संवाद
ट्रांसफार्मरों की सीधे की जा रही निगरानी
हाथरस। शहर से देहात तक वर्तमान में सभी ट्रांसफार्मरों पर मॉडम लगा हुआ है। इस मॉडम के जरिये सीधे निगम तक बिजली की खपत की जानकारी पहुंचती है। विभागीय अधिकारियों द्वारा बिजली की खपत के नियंत्रित करने के लिए कटौती का सहारा लिया जाता है।
विज्ञापन
सौभाग्य योजना में बिजली महकमे में उपभोक्ताओं की संख्या में करीब 10 हजार का इजाफा हुआ है, लेकिन इसके सापेक्ष बिजलीघरों और ट्रांसफॉर्मरों की क्षमता नहीं बढ़ी है। नतीजा, पुराने ट्रांसफॉर्मर ओवरलोड होकर फुंकने लगे हैं। इस स्थिति को देखते हुए बिजली महकमे ने जिले में 865 नये ट्रांसफॉर्मर लगवाने का निर्णय लिया है। रिवेंप योजना के तहत इसके लिए डिटेल प्रोजेक्ट रिपोर्ट (डीपीआर) तैयार की गई है। अप्रैल माह में काम शुरू होने की उम्मीद जताई जा रही है।
उल्लेखनीय है कि जिले में वर्तमान में 64 बिजलीघरों के जरिये जिले के दो लाख 64 हजार उपभोक्ताओं को आपूर्ति की जाती है। पांच साल पहले यहां ढाई लाख उपभोक्ता थे। अब केंद्र सरकार की सौभाग्य योजना में बिजली कनेक्शनों का बोझ बढ़ गया। इस हिसाब से अब बिजली महकमा अपने उपकरणों की क्षमता बढ़ाने की तैयारी कर रहा है।
विज्ञापन
कहां कितनी क्षमता के लगेंगे ट्रांसफॉर्मर
हाथरस। बिजली विभाग हाथरस शहर के अलावा सासनी के गांव बरसै व सादाबाद के गांव जटोई में तीन नये बिजलीघर बनाने की तैयारी के साथ जिलेभर में 865 नए ट्रांसफार्मर लगाए जाएंगे। इसमें 10 केवीए के 78, 25 केवीए के 391 ट्रांसफॉर्मर, 63 केवीए के 189 ट्रांसफॉर्मर, 100 केवीए के 168 ट्रांसफॉर्मर, 250 केवीए के तीन, 400 केवीए के नौ ट्रांसफॉर्मर शहर, देहात और कस्बों में लगाए जाएंगे। संवाद
विज्ञापन
ऑडिट में हुई बिजली खपत की सही जानकारी
हाथरस। बिजली निगम के अफसरों द्वारा हर साल अब तक ट्रांसफार्मर बार एनर्जी का ऑडिट कराया जाता था। इस बार निगम स्तर से फीडर वार एनर्जी का ऑडिट कराया गया है। इस ऑडिट में यह भी पता चला है कि वास्तविक में बिजली की खपत कितनी है। कितने उपकरण की आवश्यकता है। इसके अलावा यह भी सामने आया है कि कौन से फीडर पर बिजली की कितनी चोरी हो रही है। संवाद
ट्रांसफार्मरों की सीधे की जा रही निगरानी
हाथरस। शहर से देहात तक वर्तमान में सभी ट्रांसफार्मरों पर मॉडम लगा हुआ है। इस मॉडम के जरिये सीधे निगम तक बिजली की खपत की जानकारी पहुंचती है। विभागीय अधिकारियों द्वारा बिजली की खपत के नियंत्रित करने के लिए कटौती का सहारा लिया जाता है।