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हाथरस प्रकरण : सीबीआई की चार्जशीट में पुलिस की लापरवाही का खुलासा
Thu, 24 Dec 2020 03:22 AM IST
अलीगढ़ ब्यूरो
अमर उजाला नेटवर्क, हाथरस
अमर उजाला नेटवर्क, हाथरस
Published by: अलीगढ़ ब्यूरो
Updated Thu, 24 Dec 2020 03:22 AM IST
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हाथरस कांड : बिटिया के गांव में गश्त करते सीआरपीएफ के जवान।
- फोटो : HATHRAS
बिटिया के मामले में सीबीआई ने अपनी चार्जशीट में पुलिस की भूमिका पर सवाल खड़े किए हैं। पुलिस ने इस प्रकरण में शुरू से ही लापरवाही बरती। सीबीआई ने इस पूरे प्रकरण में 80 से ज्यादा लोगों से पूछताछ की थी। तीन दर्जन से ज्यादा गवाह भी बनाए गए हैं। विशेष न्यायाधीश एससी-एसटी कोर्ट में इस मामले में चार जनवरी को सुनवाई होनी है।
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बिटिया के प्रकरण में सीबीआई की चार्जशीट में यह बात तो सामने आई ही थी कि मुख्य आरोपी संदीप के बिटिया से रिश्ते थे। दोनों के बीच अक्सर फोन पर बात होती थी। इस दौरान संदीप ने जब कई बार बिटिया को फोन दिया तो उसने फोेन नहीं उठाया और न ही संपर्क किया। ऐसे में संदीप उससे खफा रहने लगा था। बिटिया के पक्ष का और संदीप के पक्ष का झगड़ा भी हुआ था। इतना ही नहीं सीबीआई ने इसमें पुलिस की घोर लापरवाही भी मानी है।
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चार्जशीट के अनुसार 14 सितंबर को जब घटना हुई तो पीड़िता ने जबर्दस्ती शब्द का इस्तेमाल किया था, फिर भी पुलिस ने इस केस में यौन हिंसा की बात को नजरअंदाज कर दिया और धारा 307 व एससी-एसटी एक्ट के तहत ही मुकदमा दर्ज किया। 19 सितंबर को भी बिटिया के जब पुलिस ने अलीगढ़ मेडिकल कॉलेज में बयान लिए तो भी छेड़खानी की धारा 354 ही पुलिस ने बढ़ाई। 22 सितंबर को जब बिटिया का बयान दर्ज किया तब उसने संदीप, रामू, रवि व लवकुश का नाम लिया और इस पर सामूहिक दुष्कर्म व जान से मारने का प्रयास करने की बात कही।
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तब पुलिस ने इसमें धारा 376 डी जोड़ी। ऐसे में पुलिस की इस केस में लापरवाही सीबीआई को देखने को मिली। सीबीआई ने इस पूरे प्रकरण में 80 से ज्यादा लोगों से पूछताछ की थी। सूत्रों की मानें तो तीन दर्जन से ज्यादा गवाह सीबीआई ने चार्जशीट में बनाए हैं। इसमें गांव के लोगों से लेकर पुलिसकर्मी और चिकित्सक भी शामिल हैं।