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हाथरस: पुलिस तलाशती रह गई और विनोद ने चकमा देकर आगरा कोर्ट में कर दिया सरेंडर

Sat, 18 Jul 2020 12:45 AM IST
Aligarh Bureau अलीगढ़ ब्यूरो
Updated Sat, 18 Jul 2020 12:45 AM IST
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Hathras: Police kept searching and Vinod surrendered and surrendered in Agra court
हाथरस: कुख्यात अपराधी विनोद जाट। - फोटो : HATHRAS
कई जिलों की पुलिस तलाशती रह गई और 50 हजार रुपये के इनामी विनोद जाट ने आगरा कोर्ट में समर्पण कर दिया। हाथरस जिले के मुरसान थाना क्षेत्र के गांव महामौनी निवसी 50 हजार रुपये का कुख्यात बदमाश विनोद जाट पुत्र राजवीर सिंह अंतरराज्यीय गैंग का सरगना है। वह पुलिस का बर्खास्त सिपाही है और यह गैंग पुलिस के बर्खास्त सिपाहियों ने ही मिलकर खड़ा किया है। आगरा, अलीगढ़, मथुरा, हाथरस से लेकर झांसी तक की वारदातों को इस गैंग ने अंजाम दिया है। लूट, फिरौती जैसी दर्जनों वारदातों को उसने अंजाम दिया है।
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विनोद चूंकि खुद पुलिस का सिपाही रहा है। ऐसे में वह पुलिस की कार्य प्रणाली को अच्छी तरह से जानता है। जिस तरह से कानपुर के विकास दुबे का एनकाउंटर पुलिस ने किया और उसके बाद पुलिस ने विनोद पर 50 हजार रुपये का ईनाम घोषित कर दिया तो एनकाउंटर के डर से वह आगरा में एक पुराने मुकदमे में कोर्ट में हाजिर हो गया। वैसे इतने कुख्यात अपराधी के हाथ से निकलने का पुलिस को भी मलाल है। विनोद पर इससे पहले भी कई बार इनाम घोषित किया जा चुका है।
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मुरसान के गांव महामौनी का निवासी विनोद जाट निवासी वर्ष 2011 में पुलिस में भर्ती हुआ था। उसके बाद उसने आगरा की एक लूट में उसका नाम आ गया। इससे पहले वह बर्खास्त सिपाही देवेंद्र जाट निवासी गांव ऊधर तहसील मांट जिला मथुरा के संपर्क में आ गया। इन दोनों के साथ-साथ एक और सिपाही संतोष, जोकि देवेंद्र के गांव महामौनी का ही है, इस गैंग में शामिल हो गया। वह भी कई अपराधिक वारदातों में लिप्त पाए जाने के बाद पुलिस से बर्खास्त कर दिया गया। ऐसे में पुलिस के इन बर्खास्त सिपाहियों ने एक ताकतवर गैंग बना लिया और वारदात-दर वारदात करते रहे।
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28 दिसंबर 2015 को आगरा के कारगौल में एक पशु व्यापारी से 45 लाख की लूट में यह तीनोें शामिल थे। अन्य कई बड़ी वारदातें भी इसी गिरोह ने की। देवेंद्र के जेल में जाने के बाद इसकी कमान विनोद के हाथ में आ गई। वर्ष 2017 में झांसी के दो सराफा व्यापारियों का अपहरण भी विनोद जाट गैंग ने किया और 30 करोड़ की फिरौती मांगी। बाद में आगरा से यह दोनोें व्यपारी बरामद हुए थे। विनोद को पुलिस के साथ हथकंडे मालूम थे। ऐसे में वह लूट व अपहरण की वारदातों को काफी हाईप्रोफाइल तरीके से अंजाम देता है। पुलिस ने कई बार उस पर इनाम घोषित किया। हर बार ऐसा लगा कि कि जैसे उसका इस बार पुलिस एनकाउंटर कर देगी, लेकिन वह हर बार बड़े नाटकीय ढंग से या तो गिरफ्तार हो गया या फिर कोर्ट में उसने समर्पण कर दिया।
कई हवाला कारोबारियों की पकड़ करने या उनसे वसूली करने में भी विनोद के नाम सामने आए हैं। 26 नवंबर 2017 को विनोद जाट हाथरस शहर में रूई की मंडी से बड़े की नाटकीय ढंग से पकड़ा गया था। हर बार वारदात के बाद वह जमानत पर बाहर आ जाता है। पिछले वर्ष उसने अपने साथियों के साथ आगरा के दयालबाग में उमा विहार निवासी मुनीश गौतम के घर पर हमला बोला था। मुनीश सादाबाद क्षेत्र के एक इंटर कॉलेज में प्रबंधक हैं।
बताते हैं कि प्रबंधक पद छोड़ने को लेकर यह हमला बोला गया था। इसमें संतोष भी शामिल था। इस समय मुरसान क्षेत्र में एक जानलेवा हमले के मामले में विनोद जाट वांछित चल रहा था और अलीगढ़ की इगलास पुलिस को भी अपहरण के एक मामले में उसकी तलाश थी। पुलिस ने उस पर इनामी राशि बढ़ाकर 50 हजार रुपये कर दी थी। उसके पोस्टर भी चस्पा करा दिए गए थे। ऐसे में कानपुर की घटना के बाद जिस तरह से पुलिस इनामी शातिरों पर आक्रामक हुई है तो ऐसे में माना जा रहा है कि दोनों जिलों की पुलिस के दबाव के चलते विनोद आगरा में एक पुराने मामले मे सरेंडर हो गया। हालांकि पुलिस को इस बार का अफसोस है कि विनोद उसके चंगुल में नहीं आया और उसने सरेंडर कर दिया।

एक सप्ताह पहले ही खुली है मुरसान में विनोद की हिस्ट्रीशीट
मुरसान। विनोद जाट के मामले में सबसे अचरज की बात तो यह है कि विनोद मुरसान के गांव महामौनी का रहने वाला है और वह पचास हजार का इनामी भी है लेकिन कोतवाली मुरसान में उसकी हिस्ट्रीशीट सप्ताह भर पहले ही खुली है। इस हिस्ट्रीशीट में उस पर दर्जन भर मुकदमे दिखाए गए हैं। इसमें आगरा, मथुरा, अलीगढ़ और हाथरस के मुकदमे शामिल हैं। कोतवाली निरीक्षक संजीव कुमार शर्मा का कहना है कि विनोद की हिस्ट्रीशीट एक सप्ताह पहले ही खोली गई है। वह उनके यहां से धारा 307 के एक मामले में वांछित है।
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