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हाथरस : डीएपी व यूरिया से मोटे व चमकदार बनेंगे पौधे
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न्यूज डेस्क, अमर उजाला, हाथरस
जिले में लगने वाले पौधे चमकदार और मोटे हों, इसके लिए वन विभाग द्वारा कई उपाय किए जा रहे हैं। प्रत्येक नर्सरी में पौधों में डीएपी और यूरिया का छिड़काव किया जा रहा है। इसके अलावा जैविक खाद का प्रयोग पौधों को सुंदर बनाने के लिए किया जा रहा है।
उल्लेखनीय है कि जैसे-जैसे वर्षा ऋतु नजदीक आ रही है, वैसे ही वन विभाग पौधों की साज-सज्जा में जुट गया है। इस वर्ष वृक्ष महाकुंभ के तहत जिले के 23 विभागों की मदद से 22 लाख पौधों का रोपण किया जाएगा। छह से सात लाख पौधे वन विभाग द्वारा खुद अपनी भूमि पर रोपित किया जाएंगे। अब बीते दिनों हुई बारिश पौधों के लिए वरदान साबित हुई है। इसके साथ वन विभाग द्वारा प्रत्येक नर्सरी में यूरिया और डीएपी को पहुंचाया गया है। साथ ही कर्मियों को पौधों में इसका छिड़काव करने के लिए कहा गया है। वन विभाग के कर्मियों की मानें तो यूरिया व डीएपी से पौधे चमकदार और उनका आकार अच्छा होगा।
इसके अलावा केंचुआ से निर्मित जैविक खाद भी पौधों में संजीवनी का काम कर रही है। हालांकि अभी पौधरोपण की तिथि शासन से कोरोना काल के चलते तय नहीं हो सकी है। क्षेत्रीय वन अधिकारी एसआर ओझा का कहना है कि पौधों को बेहतर बनाने के लिए डीएपी यूरिया के अलावा केंचुआ से निर्मित जैविक खाद का भी प्रयोग किया जा रहा है।
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जिले में लगने वाले पौधे चमकदार और मोटे हों, इसके लिए वन विभाग द्वारा कई उपाय किए जा रहे हैं। प्रत्येक नर्सरी में पौधों में डीएपी और यूरिया का छिड़काव किया जा रहा है। इसके अलावा जैविक खाद का प्रयोग पौधों को सुंदर बनाने के लिए किया जा रहा है।
उल्लेखनीय है कि जैसे-जैसे वर्षा ऋतु नजदीक आ रही है, वैसे ही वन विभाग पौधों की साज-सज्जा में जुट गया है। इस वर्ष वृक्ष महाकुंभ के तहत जिले के 23 विभागों की मदद से 22 लाख पौधों का रोपण किया जाएगा। छह से सात लाख पौधे वन विभाग द्वारा खुद अपनी भूमि पर रोपित किया जाएंगे। अब बीते दिनों हुई बारिश पौधों के लिए वरदान साबित हुई है। इसके साथ वन विभाग द्वारा प्रत्येक नर्सरी में यूरिया और डीएपी को पहुंचाया गया है। साथ ही कर्मियों को पौधों में इसका छिड़काव करने के लिए कहा गया है। वन विभाग के कर्मियों की मानें तो यूरिया व डीएपी से पौधे चमकदार और उनका आकार अच्छा होगा।
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इसके अलावा केंचुआ से निर्मित जैविक खाद भी पौधों में संजीवनी का काम कर रही है। हालांकि अभी पौधरोपण की तिथि शासन से कोरोना काल के चलते तय नहीं हो सकी है। क्षेत्रीय वन अधिकारी एसआर ओझा का कहना है कि पौधों को बेहतर बनाने के लिए डीएपी यूरिया के अलावा केंचुआ से निर्मित जैविक खाद का भी प्रयोग किया जा रहा है।
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