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हाथरस : अंग्रेजी के चक्कर में हिंदी को भूलते जा रहे हैं लोग
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श्याम नारायन यादव, शिक्षक।
- फोटो : HATHRAS
संवाद न्यूज एजेंसी, हाथरस।
अंग्रेजी बोलने के प्रयास में हम हिंदी को भूलते जा रह हैं। अंग्रेजी भी ठीक से बोल नहीं पा रहे हैं। विश्व में कई ऐसे देश हैं जिन्होंने अपनी मातृ भाषा नहीं बदली। भारतीयों की पहचान हिंदी से ही है। राष्ट्र की समृद्धि भी हिंदी है। सभी से हिंदी में बात करें और हिंदी बोलने के लिए प्रेरित करें। यह कहना है शहर के शिक्षकों का।
- ऐसा लगता है कि अंग्रेजी न बोलने पर हम हीनभावना से ग्रसित हो जाते हैं। परंतु यथार्थ में ऐसा नहीं है। हिंदी के प्रचार प्रसार में शिक्षकों की भूमिका अहम है। घर पर भी बच्चों को हिंदी में बातचीत के लिए प्रेरित करना चाहिए। हिंदी में हमारे संस्कारों की प्राण है। - लक्ष्मण सिंह, शिक्षक।
- हम अंग्रेजी की ओर भाग रहे हैं। इससे हिंदी पीछे छूटती जा रही है। एक समय ऐसा आता है कि सिर्फ हिंदी ही जबान पर रह जाती है। अन्य भाषाएं काम नहीं आती है। अभिभावकों को यह समझना होगा। हिंदी के जरिए हम अपनी बात को दूसरे को सरलता से कह सकते हैं। - नरेंद्रपाल, शिक्षक।
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- हिंदी में ही सुनहरा भविष्य है। यह हमें अपने बच्चों को समझाना होगा। उन्हें हिंदी को बढ़ावा देने के लिए प्रेरित करना चाहिए। हम जो कुछ है हिंदी की वजह से हैं। हिंदी हमारी मातृभाषा है। इसका हमें सदैव स्मरण करना चाहिए। - श्याम नारायन यादव, शिक्षक।
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अंग्रेजी बोलने के प्रयास में हम हिंदी को भूलते जा रह हैं। अंग्रेजी भी ठीक से बोल नहीं पा रहे हैं। विश्व में कई ऐसे देश हैं जिन्होंने अपनी मातृ भाषा नहीं बदली। भारतीयों की पहचान हिंदी से ही है। राष्ट्र की समृद्धि भी हिंदी है। सभी से हिंदी में बात करें और हिंदी बोलने के लिए प्रेरित करें। यह कहना है शहर के शिक्षकों का।
- ऐसा लगता है कि अंग्रेजी न बोलने पर हम हीनभावना से ग्रसित हो जाते हैं। परंतु यथार्थ में ऐसा नहीं है। हिंदी के प्रचार प्रसार में शिक्षकों की भूमिका अहम है। घर पर भी बच्चों को हिंदी में बातचीत के लिए प्रेरित करना चाहिए। हिंदी में हमारे संस्कारों की प्राण है। - लक्ष्मण सिंह, शिक्षक।
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- हम अंग्रेजी की ओर भाग रहे हैं। इससे हिंदी पीछे छूटती जा रही है। एक समय ऐसा आता है कि सिर्फ हिंदी ही जबान पर रह जाती है। अन्य भाषाएं काम नहीं आती है। अभिभावकों को यह समझना होगा। हिंदी के जरिए हम अपनी बात को दूसरे को सरलता से कह सकते हैं। - नरेंद्रपाल, शिक्षक।
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- हिंदी में ही सुनहरा भविष्य है। यह हमें अपने बच्चों को समझाना होगा। उन्हें हिंदी को बढ़ावा देने के लिए प्रेरित करना चाहिए। हम जो कुछ है हिंदी की वजह से हैं। हिंदी हमारी मातृभाषा है। इसका हमें सदैव स्मरण करना चाहिए। - श्याम नारायन यादव, शिक्षक।

लक्ष्मण सिंह, शिक्षक। - फोटो : HATHRAS

नरेंद्र पाल, शिक्षक। - फोटो : HATHRAS