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हाथरस : जिले के धान का चावल पहुंचेगा हर माह गरीबों की थाली में
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हाथरस : शहर की एक फैक्टरी में धान से तैयार होता चावल।
- फोटो : HATHRAS
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गौरव भारद्वाज
हाथरस। जिले के राशनकार्ड धारकों के लिए खुशखबरी है। उनको अब हर महीने जिले के धान से बना चावल मिलेगा। जिले के गांव चिंतागढ़ी में लगे प्लांट में यह चावल तैयार किया जाएगा। चिंतागढ़ी में लगे प्लांट में अलीगढ़ का 60 हजार कुंतल व हाथरस का 34 हजार कुंतल धान पहुंच गया है। इस धान से चावल बनाने का काम तेजी से चल रहा है।
उल्लेखनीय है कि सरकार का धान खरीद पर खासा ध्यान रहा है। 14 क्रय केंद्रों की मदद से जिलेभर में कुल 34 हजार कुंतल धान की खरीद हुई। वहीं अलीगढ़ में 60 हजार कुंतल धान की खरीद हुई है। धान से चावल बनाने की यूनिट हाथरस के गांव चिंतागढ़ी में चार साल पहले लगी है। अब ये प्लांट सरकारी खाद्यान्न वितरण में भी सहभागिता निभा रहा है। इस प्लांट में आए धान का 67 प्रतिशत चावल तैयार कर एफसीआई को दिया जाएगा। उसके बाद यह चावल गोदामों और राशन की दुकानों की मदद से कार्डधारकों तक पहुंचेगा।
50 रुपये कुंतल के हिसाब से होता है भुगतान
हाथरस। प्लांट में पहुंचने के बाद सबसे पहले धान को सुखाया जाता है। उसके बाद मशीन से छिलका उतारा जाता है, फिर चावल की पॉलिस उतारी जाती है। उसके बाद सफेद और काले चावल को मशीन से अलग किया जाता है। उसके बाद चावल तैयार कर बोरों में भरा जाता है। चावल को भरने के बोरों का इंतजाम एफसीआई द्वारा किया जाता है। चावल तैयार करने की एवज में प्लांट संचालक को 50 रुपये प्रति कुंतल के हिसाब से भुगतान किया जाता है। यदि 45 दिन ज्यादा चावल तैयार करने में लगे तो प्लांट संचालक से एक रुपये क्विंटल प्रतिदिन के हिसाब से चार्ज वसूला जाता है।
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कैसे बढ़ें उद्योग, बिजली कटौती अटका रही रोड़े
हाथरस। एक तरफ सरकार उद्योगों को बढ़ावा देने के लिए पोर्टल की मदद से त्वरित मदद कर रही है। दूसरी ओर जिले में इतने बड़े पैमाने पर धान से चावल तैयार करने वाले प्लांट में बिजली आपूर्ति का रोड़ा है। इस प्लांट को गांव की बिजली दी जाती थी। प्लांट को विभाग ने शहरी बिल बनाकर भेज दिया है। प्लांट संचालक ने बिजली बिल को कम करने की गुजारिश अफसरों से की। दो साल बीतने के बाद अभी तक बिल का निस्तारण नहीं किया है। इस कारण प्लांट के संचालक ने न्यायालय की शरण ली है। वर्तमान में प्लांट जेनरेटर की मदद से संचालित हो रहा है। बिजली महकमे की कार्य प्रणाली से प्लांट संचालक खासे परेशान हैं।
हमारे प्लांट में हाथरस का 34 हजार कुंतल धान हाथरस व अलीगढ़ से 60 हजार कुंतल धान आया है। इस धान से चावल तैयार किया जा रहा है। 45 दिन के अंदर चावल तैयार कर वापस करना होता है। यदि इस अवधि में चावल तैयार नहीं होता है एक रुपये प्रति कुंतल के हिसाब से उल्टा चार्ज वसूला जाता है। जो धान आया है, उसमें से 67 प्रतिशत चावल तैयार कर देना होगा।
-गिरीश वार्ष्णेय, प्लांट मैनेजर
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हाथरस। जिले के राशनकार्ड धारकों के लिए खुशखबरी है। उनको अब हर महीने जिले के धान से बना चावल मिलेगा। जिले के गांव चिंतागढ़ी में लगे प्लांट में यह चावल तैयार किया जाएगा। चिंतागढ़ी में लगे प्लांट में अलीगढ़ का 60 हजार कुंतल व हाथरस का 34 हजार कुंतल धान पहुंच गया है। इस धान से चावल बनाने का काम तेजी से चल रहा है।
उल्लेखनीय है कि सरकार का धान खरीद पर खासा ध्यान रहा है। 14 क्रय केंद्रों की मदद से जिलेभर में कुल 34 हजार कुंतल धान की खरीद हुई। वहीं अलीगढ़ में 60 हजार कुंतल धान की खरीद हुई है। धान से चावल बनाने की यूनिट हाथरस के गांव चिंतागढ़ी में चार साल पहले लगी है। अब ये प्लांट सरकारी खाद्यान्न वितरण में भी सहभागिता निभा रहा है। इस प्लांट में आए धान का 67 प्रतिशत चावल तैयार कर एफसीआई को दिया जाएगा। उसके बाद यह चावल गोदामों और राशन की दुकानों की मदद से कार्डधारकों तक पहुंचेगा।
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50 रुपये कुंतल के हिसाब से होता है भुगतान
हाथरस। प्लांट में पहुंचने के बाद सबसे पहले धान को सुखाया जाता है। उसके बाद मशीन से छिलका उतारा जाता है, फिर चावल की पॉलिस उतारी जाती है। उसके बाद सफेद और काले चावल को मशीन से अलग किया जाता है। उसके बाद चावल तैयार कर बोरों में भरा जाता है। चावल को भरने के बोरों का इंतजाम एफसीआई द्वारा किया जाता है। चावल तैयार करने की एवज में प्लांट संचालक को 50 रुपये प्रति कुंतल के हिसाब से भुगतान किया जाता है। यदि 45 दिन ज्यादा चावल तैयार करने में लगे तो प्लांट संचालक से एक रुपये क्विंटल प्रतिदिन के हिसाब से चार्ज वसूला जाता है।
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कैसे बढ़ें उद्योग, बिजली कटौती अटका रही रोड़े
हाथरस। एक तरफ सरकार उद्योगों को बढ़ावा देने के लिए पोर्टल की मदद से त्वरित मदद कर रही है। दूसरी ओर जिले में इतने बड़े पैमाने पर धान से चावल तैयार करने वाले प्लांट में बिजली आपूर्ति का रोड़ा है। इस प्लांट को गांव की बिजली दी जाती थी। प्लांट को विभाग ने शहरी बिल बनाकर भेज दिया है। प्लांट संचालक ने बिजली बिल को कम करने की गुजारिश अफसरों से की। दो साल बीतने के बाद अभी तक बिल का निस्तारण नहीं किया है। इस कारण प्लांट के संचालक ने न्यायालय की शरण ली है। वर्तमान में प्लांट जेनरेटर की मदद से संचालित हो रहा है। बिजली महकमे की कार्य प्रणाली से प्लांट संचालक खासे परेशान हैं।
हमारे प्लांट में हाथरस का 34 हजार कुंतल धान हाथरस व अलीगढ़ से 60 हजार कुंतल धान आया है। इस धान से चावल तैयार किया जा रहा है। 45 दिन के अंदर चावल तैयार कर वापस करना होता है। यदि इस अवधि में चावल तैयार नहीं होता है एक रुपये प्रति कुंतल के हिसाब से उल्टा चार्ज वसूला जाता है। जो धान आया है, उसमें से 67 प्रतिशत चावल तैयार कर देना होगा।
-गिरीश वार्ष्णेय, प्लांट मैनेजर