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हाथरस : धान की फसल तैयार, बिजली की ओवर लोडिंग खत्म
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न्यूज डेस्क, अमर उजाला, हाथरस
धान की फसल तैयार होने से किसान राहत महसूस कर रहे हैं। बिजली सिस्टम का बोझ कम हो गया है। ग्रामीण अंचल में ओवर लोडिंग खत्म हो गई है। इसलिए अधिकारियों ने भी चैन की सांस ली है। सितंबर माह में पिछले साल की अपेक्षा दस प्रतिशत ट्रांसफार्मर कम फुंके हैं।
उल्लेखनीय है कि जिले में 64 बिजलीघरों के जरिये दो लाख से अधिक उपभोक्ताओं को बिजली की आपूर्ति की जाती है। इसमें 13 हजार किसान हैं। बीते महीने धान की पैदावार हुई। इस दौरान किसानों की फसल के लिए ज्यादा नलकूपों का संचालन किया। विभागीय अधिकारियों की मानें किसानों ने नलकूपों पर ऑटो टाइमर सिस्टम लगा रखा है। बिजली आते ही ऑटोमेटिक नलकूप चालू हो जाते हैं। जिससे एक साथ ट्रांसफार्मरों पर लोड पड़ता है। यहीं कारण है कि अप्रैल से जुलाई तक जिले में 1300 ट्रांसफार्मर फुंक गए। अब धान की फसल तैयार होने के बाद किसान मंडी की ओर रुख कर रहे हैं।
हालांकि बारिश के चलते धान की फसल प्रभावित हुई है। एक बीघा में तीन सिर्फ क्विंटल ही धान निकल रहा है। अब सिंचाई का ग्राफ गिरने से बिजली उपकरण भी ओवर लोडिंग की भेंट नहीं चढ़ रहे हैं। बीते साल सितंबर माह में साढ़े चार सौ ट्रांसफार्मर फुंके थे। इस बार पिछले साल की तुलना में करीब चालीस ट्रांसफार्मर कम फुंके हैं। इससे विभाग को हजारों रुपये का फायदा हुआ है। इस मामले में वर्कशॉप जेई आरके सिंह का कहना है कि धान की सिंचाई खत्म होने से ओवर लोडिंग खत्म हुई है। सितंबर माह में पिछले साल की अपेक्षा इस साल चालीस ट्रांसफार्मर कम फुंके हैं। संवाद
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धान की फसल तैयार होने से किसान राहत महसूस कर रहे हैं। बिजली सिस्टम का बोझ कम हो गया है। ग्रामीण अंचल में ओवर लोडिंग खत्म हो गई है। इसलिए अधिकारियों ने भी चैन की सांस ली है। सितंबर माह में पिछले साल की अपेक्षा दस प्रतिशत ट्रांसफार्मर कम फुंके हैं।
उल्लेखनीय है कि जिले में 64 बिजलीघरों के जरिये दो लाख से अधिक उपभोक्ताओं को बिजली की आपूर्ति की जाती है। इसमें 13 हजार किसान हैं। बीते महीने धान की पैदावार हुई। इस दौरान किसानों की फसल के लिए ज्यादा नलकूपों का संचालन किया। विभागीय अधिकारियों की मानें किसानों ने नलकूपों पर ऑटो टाइमर सिस्टम लगा रखा है। बिजली आते ही ऑटोमेटिक नलकूप चालू हो जाते हैं। जिससे एक साथ ट्रांसफार्मरों पर लोड पड़ता है। यहीं कारण है कि अप्रैल से जुलाई तक जिले में 1300 ट्रांसफार्मर फुंक गए। अब धान की फसल तैयार होने के बाद किसान मंडी की ओर रुख कर रहे हैं।
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हालांकि बारिश के चलते धान की फसल प्रभावित हुई है। एक बीघा में तीन सिर्फ क्विंटल ही धान निकल रहा है। अब सिंचाई का ग्राफ गिरने से बिजली उपकरण भी ओवर लोडिंग की भेंट नहीं चढ़ रहे हैं। बीते साल सितंबर माह में साढ़े चार सौ ट्रांसफार्मर फुंके थे। इस बार पिछले साल की तुलना में करीब चालीस ट्रांसफार्मर कम फुंके हैं। इससे विभाग को हजारों रुपये का फायदा हुआ है। इस मामले में वर्कशॉप जेई आरके सिंह का कहना है कि धान की सिंचाई खत्म होने से ओवर लोडिंग खत्म हुई है। सितंबर माह में पिछले साल की अपेक्षा इस साल चालीस ट्रांसफार्मर कम फुंके हैं। संवाद
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