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हाथरस : पंचायत सचिव व तत्कालीन ग्राम प्रधान को नोटिस
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न्यूज डेस्क, अमर उजाला, हाथरस
ग्राम पंचायत मानिकपुर में सामुदायिक शौचालय निर्माण अपूर्ण व सामुदायिक शौचालय पहुंचने में जर्जर रास्ते सहित अन्य अनियमितताओं के मामले में डीपीआरओ ने तत्कालीन ग्राम प्रधान व पंचायत सचिव को नोटिस जारी कर स्पष्टीकरण तलब किया है। इसके अलावा निरीक्षण में तमाम खामियां सामने आई हैं।
ब्लॉक सहपऊ की ग्राम पंचायत मानिकपुर का डीपीआरओ सुबोध जोशी ने निरीक्षण किया। निरीक्षण के दौरान पाया कि सामुदायिक शौचालय अपूर्ण स्थिति में है। सामुदायिक शौचालय तक पहुंच के लिए रास्ता नहीं है। जबकि सामुदायिक शौचालय निर्माण के लिए चयनित स्थल, लाभ प्राप्त करने वाली आबादी से सटा हुआ होना चाहिए। सामुदायिक शौचालय का निर्माण वर्ष 2020-21 में कराया गया। भू-राजस्व विभाग से इस संबंध में समन्वय स्थापित भी नहीं किया गया। इसके निर्माण में 2,10,000 रुपये की धनराशि का भुगतान किया गया है।
सामुदायिक शौचालय निर्माण की गुणवत्ता भी निम्न स्तर की पाई गई। उन्होंने कहा कि सामुदायिक शौचालय तक पहुंच के लिए रास्ता न होने, भू-राजस्व विभाग से समन्वय स्थापित कर सामुदायिक शौचालय निर्माण की सहमति प्राप्त न किए जाने के बावजूद सामुदायिक शौचालय का अपूर्ण निर्माण कराकर धनराशि का व्यय किए जाने दोष पाए गए हैं। मामले में तत्कालीन ग्राम प्रधान हरिओम चौधरी व पंचायत सचिव रूप किशोर गर्ग को नोटिस जारी करते हुए स्पष्टीकरण तलब किया है। संवाद
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ग्राम पंचायत मानिकपुर में सामुदायिक शौचालय निर्माण अपूर्ण व सामुदायिक शौचालय पहुंचने में जर्जर रास्ते सहित अन्य अनियमितताओं के मामले में डीपीआरओ ने तत्कालीन ग्राम प्रधान व पंचायत सचिव को नोटिस जारी कर स्पष्टीकरण तलब किया है। इसके अलावा निरीक्षण में तमाम खामियां सामने आई हैं।
ब्लॉक सहपऊ की ग्राम पंचायत मानिकपुर का डीपीआरओ सुबोध जोशी ने निरीक्षण किया। निरीक्षण के दौरान पाया कि सामुदायिक शौचालय अपूर्ण स्थिति में है। सामुदायिक शौचालय तक पहुंच के लिए रास्ता नहीं है। जबकि सामुदायिक शौचालय निर्माण के लिए चयनित स्थल, लाभ प्राप्त करने वाली आबादी से सटा हुआ होना चाहिए। सामुदायिक शौचालय का निर्माण वर्ष 2020-21 में कराया गया। भू-राजस्व विभाग से इस संबंध में समन्वय स्थापित भी नहीं किया गया। इसके निर्माण में 2,10,000 रुपये की धनराशि का भुगतान किया गया है।
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सामुदायिक शौचालय निर्माण की गुणवत्ता भी निम्न स्तर की पाई गई। उन्होंने कहा कि सामुदायिक शौचालय तक पहुंच के लिए रास्ता न होने, भू-राजस्व विभाग से समन्वय स्थापित कर सामुदायिक शौचालय निर्माण की सहमति प्राप्त न किए जाने के बावजूद सामुदायिक शौचालय का अपूर्ण निर्माण कराकर धनराशि का व्यय किए जाने दोष पाए गए हैं। मामले में तत्कालीन ग्राम प्रधान हरिओम चौधरी व पंचायत सचिव रूप किशोर गर्ग को नोटिस जारी करते हुए स्पष्टीकरण तलब किया है। संवाद
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