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हाथरस : नई नीति से मिलेगी हाथरस के उद्योग-धंधों को संजीवनी
सार
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, हाथरसप्रदेश सरकार ने सूक्ष्म, लघु और मध्यम उद्योगों को बढ़ावा देने के लिए नई नीति को मंजूरी दे दी है।इससे यहां के परंपरागत उद्योग-धंधों को संजीवनी मिलने की आस है।अब सरकार ने जिस नई नीति को मंजूरी दी है, जिससे यहां के उद्योग-धंधे और विकसित होंगे।
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हाथरस : शहर की एक फैक्टरी में तैयार होती हींग। संवाद
- फोटो : HATHRAS
विस्तार
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, हाथरस
प्रदेश सरकार ने सूक्ष्म, लघु और मध्यम उद्योगों को बढ़ावा देने के लिए नई नीति को मंजूरी दे दी है। इससे यहां के परंपरागत उद्योग-धंधों को संजीवनी मिलने की आस है। ग्रामीण अंचल में यह उद्योग-धंधे स्थापित होंगे तो वहां के लोगों को भी आसानी से रोजगार मिलेगा। वर्तमान में जिले में उद्योग-धंधों के लिए जमीन के साथ पूंजी का संकट भी है। उद्यमियों का कहना है कि सरकार की नई नीति से उद्योगों को आसानी से भूमि और पूंजी दोनों मिलने का रास्ता साफ हो जाएगा। उद्यमी चाहते हैं कि सरकार इस नीति पर जल्द अमल शुरू कराए।
उल्लेखनीय है कि प्रदेश सरकार ने सूक्ष्म, लघु और मध्यम उद्योगों के लिए खजाना खोला है। नई नीति को यूपी कैबिनेट ने मंजूरी दे दी है। एमएसएमई में निवेश पर 25 फीसदी तक पूंजीगत सब्सिडी और ऋण पर ब्याज में 50 फीसदी छूट दी जाएगी। अन्य कई फैसले भी इस नीति के तहत लिए गए हैं। इसे लेकर यहां के उद्यमी बेहद खुश हैं। उद्यमियों को उम्मीद है कि सरकार की इस नीति से यहां के उद्योग-धंधे पनपेंगे।
जिले में हींग, रंग-गुलाल, दाल, रेडीमेड गारमेंट्स, कॉटन, हस्तशिल्प, आयुर्वेद दवाएं, नमकीन, पुरदिलनगर में मूंगा-मोती, हसायन में इत्र, सादाबाद के बिसावर में घुंघरू आदि उद्योग-धंधे हैं। कई उद्योग-धंधे सरकारी प्रोत्साहन के अभाव में दम तोड़ चुके हैं। जिले में यह उद्योग कुटीर के रूप में स्थापित हैं। वैसे हींग और रेडीमेड गारमेंट्स उद्योग यहां इस जनपद एक उत्पाद योजना (ओडीओपी) में शामिल हो चुके हैं। इसकी वजह से यहां के इस उद्योग से जुड़े उद्यमियों को काफी लाभ मिला है। अब सरकार ने जिस नई नीति को मंजूरी दी है, जिससे यहां के उद्योग-धंधे और विकसित होंगे। संवाद
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उद्यमियों के तर्क
सूक्ष्म, लघु और मध्यम स्तर के उद्योगों के लिए नई नीति से यहां के उद्योग-धंधों को बढ़ावा मिलेगा। ग्राम सभा की पांच एकड़ भूमि भी उद्योगों को मिल जाएगी। इससे काफी लाभ मिलेगा। इसकी वजह यह है कि यहां के उद्योग-धंधों के लिए पर्याप्त जगह नहीं है। औद्योगिक आस्थानों में पर्याप्त भूमि नहीं है। ग्रामीण इलाकों में फैक्टरियां लगने से वहां के लोगों को भी आसानी से रोजगार मिलेगा। ग्रामीण इलाकों का विकास होगा। लोकल फॉर वोकल के लिए यह नीति काफी कारगर सिद्ध होगी।
-देवेंद्र मोहता, उद्यमी
ब्याज में 50 फीसदी की छूट से उद्योग-धंधों के संचालन में काफी मदद मिलेगी। 10 एकड़ से अधिक में भूमि खरीद पर जो स्टांप शुल्क में पूरी छूट देने की बात कही गई है, वह काफी अहम है। यहां के लघु उद्योगों को विकसित करने के लिए यह नीति काफी मददगार साबित होगी। अब उद्योगों की स्थापना के लिए जमीन भी आसानी से मिल जाएगी। गुणवत्ता मानक के लिए 75 फीसदी की सहायता, क्लीन व ग्रीन तकनीकी के लिए 20 लाख रुपये की वित्तीय मदद की बात से यहां के उद्योग-धंधे प्रोत्साहित होंगे।
-राजेश अग्रवाल उद्यमी
लघु उद्योगों को बूस्टर देने के लिए यह बेहतरीन कोशिश है। 25 फीसदी सब्सिडी के साथ ब्याज में 50 फीसदी की छूट सराहनीय है। साथ ही स्टांप मुक्त जमीन के आवंटन से यहां के विकसित होंगे। ग्रामीण अंचल को भी इससे काफी फायदा होगा। वहां जब कारखाने स्थापित होंगे तो विकास भी होगा। लोगों को रोजगार भी मिलेंगे। यहां के जो ज्यादार उद्योग धंधे हैं, वह कुटीर उद्योग के रूप में ही हैं। सरकारी प्रोत्साहन उन्हें मिलेगा तो यहां के उद्यमी पलायन नहीं करेंगे।
-मनोज अग्रवाल, उद्यमी
उद्योगों को लेकर सरकार ने जिस नई नीति को मंजूरी दी है, उसका यदि ईमानदारी से अनुपालन हुआ तो यहां के उद्योग-धंधों के विकास के लिए यह काफी कारगर साबित होगी। इस नीति में कई ऐसी व्यवस्थाएं हैं, जिससे लघु व सूक्ष्म उद्योगों को काफी आर्थिक मदद मिलेगी। यदि उद्योग-धंधे और स्थापित हुए तो यहां का विकास होगा। यहां के उद्यमियों को सहूलियतें मिलेंगी।
-विशाल अग्रवाल, उद्यमी
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प्रदेश सरकार ने सूक्ष्म, लघु और मध्यम उद्योगों को बढ़ावा देने के लिए नई नीति को मंजूरी दे दी है। इससे यहां के परंपरागत उद्योग-धंधों को संजीवनी मिलने की आस है। ग्रामीण अंचल में यह उद्योग-धंधे स्थापित होंगे तो वहां के लोगों को भी आसानी से रोजगार मिलेगा। वर्तमान में जिले में उद्योग-धंधों के लिए जमीन के साथ पूंजी का संकट भी है। उद्यमियों का कहना है कि सरकार की नई नीति से उद्योगों को आसानी से भूमि और पूंजी दोनों मिलने का रास्ता साफ हो जाएगा। उद्यमी चाहते हैं कि सरकार इस नीति पर जल्द अमल शुरू कराए।
उल्लेखनीय है कि प्रदेश सरकार ने सूक्ष्म, लघु और मध्यम उद्योगों के लिए खजाना खोला है। नई नीति को यूपी कैबिनेट ने मंजूरी दे दी है। एमएसएमई में निवेश पर 25 फीसदी तक पूंजीगत सब्सिडी और ऋण पर ब्याज में 50 फीसदी छूट दी जाएगी। अन्य कई फैसले भी इस नीति के तहत लिए गए हैं। इसे लेकर यहां के उद्यमी बेहद खुश हैं। उद्यमियों को उम्मीद है कि सरकार की इस नीति से यहां के उद्योग-धंधे पनपेंगे।
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जिले में हींग, रंग-गुलाल, दाल, रेडीमेड गारमेंट्स, कॉटन, हस्तशिल्प, आयुर्वेद दवाएं, नमकीन, पुरदिलनगर में मूंगा-मोती, हसायन में इत्र, सादाबाद के बिसावर में घुंघरू आदि उद्योग-धंधे हैं। कई उद्योग-धंधे सरकारी प्रोत्साहन के अभाव में दम तोड़ चुके हैं। जिले में यह उद्योग कुटीर के रूप में स्थापित हैं। वैसे हींग और रेडीमेड गारमेंट्स उद्योग यहां इस जनपद एक उत्पाद योजना (ओडीओपी) में शामिल हो चुके हैं। इसकी वजह से यहां के इस उद्योग से जुड़े उद्यमियों को काफी लाभ मिला है। अब सरकार ने जिस नई नीति को मंजूरी दी है, जिससे यहां के उद्योग-धंधे और विकसित होंगे। संवाद
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उद्यमियों के तर्क
सूक्ष्म, लघु और मध्यम स्तर के उद्योगों के लिए नई नीति से यहां के उद्योग-धंधों को बढ़ावा मिलेगा। ग्राम सभा की पांच एकड़ भूमि भी उद्योगों को मिल जाएगी। इससे काफी लाभ मिलेगा। इसकी वजह यह है कि यहां के उद्योग-धंधों के लिए पर्याप्त जगह नहीं है। औद्योगिक आस्थानों में पर्याप्त भूमि नहीं है। ग्रामीण इलाकों में फैक्टरियां लगने से वहां के लोगों को भी आसानी से रोजगार मिलेगा। ग्रामीण इलाकों का विकास होगा। लोकल फॉर वोकल के लिए यह नीति काफी कारगर सिद्ध होगी।
-देवेंद्र मोहता, उद्यमी
ब्याज में 50 फीसदी की छूट से उद्योग-धंधों के संचालन में काफी मदद मिलेगी। 10 एकड़ से अधिक में भूमि खरीद पर जो स्टांप शुल्क में पूरी छूट देने की बात कही गई है, वह काफी अहम है। यहां के लघु उद्योगों को विकसित करने के लिए यह नीति काफी मददगार साबित होगी। अब उद्योगों की स्थापना के लिए जमीन भी आसानी से मिल जाएगी। गुणवत्ता मानक के लिए 75 फीसदी की सहायता, क्लीन व ग्रीन तकनीकी के लिए 20 लाख रुपये की वित्तीय मदद की बात से यहां के उद्योग-धंधे प्रोत्साहित होंगे।
-राजेश अग्रवाल उद्यमी
लघु उद्योगों को बूस्टर देने के लिए यह बेहतरीन कोशिश है। 25 फीसदी सब्सिडी के साथ ब्याज में 50 फीसदी की छूट सराहनीय है। साथ ही स्टांप मुक्त जमीन के आवंटन से यहां के विकसित होंगे। ग्रामीण अंचल को भी इससे काफी फायदा होगा। वहां जब कारखाने स्थापित होंगे तो विकास भी होगा। लोगों को रोजगार भी मिलेंगे। यहां के जो ज्यादार उद्योग धंधे हैं, वह कुटीर उद्योग के रूप में ही हैं। सरकारी प्रोत्साहन उन्हें मिलेगा तो यहां के उद्यमी पलायन नहीं करेंगे।
-मनोज अग्रवाल, उद्यमी
उद्योगों को लेकर सरकार ने जिस नई नीति को मंजूरी दी है, उसका यदि ईमानदारी से अनुपालन हुआ तो यहां के उद्योग-धंधों के विकास के लिए यह काफी कारगर साबित होगी। इस नीति में कई ऐसी व्यवस्थाएं हैं, जिससे लघु व सूक्ष्म उद्योगों को काफी आर्थिक मदद मिलेगी। यदि उद्योग-धंधे और स्थापित हुए तो यहां का विकास होगा। यहां के उद्यमियों को सहूलियतें मिलेंगी।
-विशाल अग्रवाल, उद्यमी