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हाथरस : ज्यादा से ज्यादा युवाओं को हिंदी से जोड़ना होगा
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हाथरस : विनीत कुमार, शिक्षक। संवाद
- फोटो : HATHRAS
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न्यूज डेस्क, अमर उजाला, हाथरस
हिंदी भाषा सिर्फ अभिव्यक्ति का माध्यम नहीं, बल्कि राष्ट्र का स्वाभिमान भी है। हिंदी हमारी सदियों पुरानी संस्कृति और सभ्यता की संवाहक है। यह कहना है शहर के शिक्षकों का।
शिक्षकों का कहना है कि भारतवासियों के लिए यह गर्व की बात है कि हिंदी जैसी सशक्त भाषा उनकी मातृभाषा है। इसके बाद भी लोग आज हिंदी बोलने में झिझक महसूस करते हैं। शिक्षकों का कहना है कि हिंदी की बेहतरी के लिए सभी को मिलकर प्रयास करने होंगे।
युवा पीढ़ी को अपनी भाषा से जोड़ने की मुहिम चलानी होगी। युवा पीढ़ी को हिंदी साहित्य पढ़ने के लिए प्रेरित करना होगा। हिंदी को रोजगार परक भाषा के रूप में प्रस्तुत करना होगा, ताकि ज्यादा से ज्यादा युवा इससे जुडे़ं। तभी हिंदी अपना पुराना वैभव प्राप्त कर पाएगी।
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इतिहास साक्षी है कि जब भी किसी भारतीय ने विदेश के किसी मंच पर हिंदी भाषा में भाषण दिया है तो पूरे विश्व ने उसका स्वागत किया है, लेकिन वर्तमान में भारतीय जनमानस अपने देश में हिंदी के प्रयोग को लेकर झिझक महसूस करता है। इस सोच को बदलने की जरूरत है।
-रमाशंकर शिक्षक
अंग्रेजी माध्यम से शिक्षा के बढ़ते चलन से हिंदी से नई पीढ़ी दूर होती जा रही है। हिंदी को बढ़ावा देने के लिए जरूरी है कि हम अपने बच्चों को हिंदी से जोड़ें। घर पर हिंदी का ही प्रयोग करें। बच्चों में हिंदी साहित्य पढ़ने के प्रति रुचि जागृत करना हिंदी की बेहतरी के लिए आवश्यक है।
-रचिन कौशिक शिक्षक
हिंदी दुनिया की सबसे समृद्ध भाषा है। किसी एक शब्द को लिखने के लिए हिंदी में कई विकल्प मौजूद हैं। इसके बावजूद लोग हिंदी बोलने में हीन भावना महसूस करते हैं। हिंदी का मान-सम्मान और गौरव बरकरार रखना हर भारतीय का कर्तव्य है।
-विनीत कुमार शर्मा, शिक्षक
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हिंदी भाषा सिर्फ अभिव्यक्ति का माध्यम नहीं, बल्कि राष्ट्र का स्वाभिमान भी है। हिंदी हमारी सदियों पुरानी संस्कृति और सभ्यता की संवाहक है। यह कहना है शहर के शिक्षकों का।
शिक्षकों का कहना है कि भारतवासियों के लिए यह गर्व की बात है कि हिंदी जैसी सशक्त भाषा उनकी मातृभाषा है। इसके बाद भी लोग आज हिंदी बोलने में झिझक महसूस करते हैं। शिक्षकों का कहना है कि हिंदी की बेहतरी के लिए सभी को मिलकर प्रयास करने होंगे।
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युवा पीढ़ी को अपनी भाषा से जोड़ने की मुहिम चलानी होगी। युवा पीढ़ी को हिंदी साहित्य पढ़ने के लिए प्रेरित करना होगा। हिंदी को रोजगार परक भाषा के रूप में प्रस्तुत करना होगा, ताकि ज्यादा से ज्यादा युवा इससे जुडे़ं। तभी हिंदी अपना पुराना वैभव प्राप्त कर पाएगी।
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इतिहास साक्षी है कि जब भी किसी भारतीय ने विदेश के किसी मंच पर हिंदी भाषा में भाषण दिया है तो पूरे विश्व ने उसका स्वागत किया है, लेकिन वर्तमान में भारतीय जनमानस अपने देश में हिंदी के प्रयोग को लेकर झिझक महसूस करता है। इस सोच को बदलने की जरूरत है।
-रमाशंकर शिक्षक
अंग्रेजी माध्यम से शिक्षा के बढ़ते चलन से हिंदी से नई पीढ़ी दूर होती जा रही है। हिंदी को बढ़ावा देने के लिए जरूरी है कि हम अपने बच्चों को हिंदी से जोड़ें। घर पर हिंदी का ही प्रयोग करें। बच्चों में हिंदी साहित्य पढ़ने के प्रति रुचि जागृत करना हिंदी की बेहतरी के लिए आवश्यक है।
-रचिन कौशिक शिक्षक
हिंदी दुनिया की सबसे समृद्ध भाषा है। किसी एक शब्द को लिखने के लिए हिंदी में कई विकल्प मौजूद हैं। इसके बावजूद लोग हिंदी बोलने में हीन भावना महसूस करते हैं। हिंदी का मान-सम्मान और गौरव बरकरार रखना हर भारतीय का कर्तव्य है।
-विनीत कुमार शर्मा, शिक्षक

हाथरस : रमाशंकर, शिक्षक। संवाद- फोटो : HATHRAS

हाथरस : रचिन कौशिक, शिक्षक। संवाद- फोटो : HATHRAS