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हाथरस : मंडी परिसर बना तालाब, सड़क पर सब्जी बेच रहे आढ़तिये
सार
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, सासनी (हाथरस)करोड़ों रुपये खर्च करने के बाद भी सब्जी मंडी के हालात बेहतर हो रहे हैं।पिछले कुछ दिनों में हुई बारिश के बाद पूरा मंडी परिसर जलमग्न हो गया है।
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विस्तार
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, सासनी (हाथरस)
करोड़ों रुपये खर्च करने के बाद भी सब्जी मंडी के हालात बेहतर हो रहे हैं। किसान अपनी सब्जियाें को राष्ट्रीय राजमार्ग पर रखकर बेचने के लिए मजबूर हैं।
पिछले कुछ दिनों में हुई बारिश के बाद पूरा मंडी परिसर जलमग्न हो गया है। पानी की निकासी का प्रबंध न होने से मंडी में यह हालात पैदा होते हैं। आढ़तियों को अपनी दुकान तक जाने के लिए पानी में होकर गुजरना पड़ता है।
अपनी फसल बेचने आने वाले किसानों भी बहुत मुश्किल होती है। हालांकि मंडी परिसर के सौंदर्यीकरण के लिए एक करोड़ से ज्यादा की धनराशि सरकार ने मंजूर की है, लेकिन अभी तक जलनिकासी के प्रबंध करने का काम शुरू नहीं हुआ है। संवाद
किसान-आढ़तियों की व्यथा
सब्जी मंडी का गेट ऊंचा होने से बारिश का पानी बाहर नहीं निकल पा रहा। कई दिनों तक जलभराव होने से बीमारियां फैलने का भय अभी बना हुआ है। आढ़तिया इस समस्या से परेशान हैं, जबकि यह मंडी पूरे जिले में सर्वाधिक राजस्व दे रही है।
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-सतीशचंद्र गुप्ता, आढ़तिया
मंडी परिसर में जलभराव होने से किसान एवं आढ़तियों को काफी परेशानी हो रही है। किसान अपनी सब्जी सड़क पर रखकर बेचने के लिए मजबूर हैं, लेकिन न तो मंडी प्रशासन और न हीं जिला प्रशासन ने मंडी परिसर में जलभराव की समस्या को दूर करने का उपाय किया है।
-विक्रांत, आढ़तिया
जरा सी बारिश में मंडी परिसर तालाब का रूप ले लेता है। मंडी में पानी की निकासी का कोई प्रबंध नहीं है। सब्जी लेकर आने वाले किसान गंदे पानी में होकर निकलकर सब्जी बेचने के लिए मजबूर हैं। मंडी प्रशासन के कान पर जूं नहीं रेंग रही।
-शिवराज सिंह, किसान
मंडी काफी पुरानी बनी है। इसे ऊंचा नहीं किया जा सकता। पंपसेट से पानी निकलवाया जा रहा है। स्थिति सामान्य होने के बाद समस्या के स्थायी निदान की योजना बनाई जाएगी।
-यशपाल सिंह, मंडी सचिव
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करोड़ों रुपये खर्च करने के बाद भी सब्जी मंडी के हालात बेहतर हो रहे हैं। किसान अपनी सब्जियाें को राष्ट्रीय राजमार्ग पर रखकर बेचने के लिए मजबूर हैं।
पिछले कुछ दिनों में हुई बारिश के बाद पूरा मंडी परिसर जलमग्न हो गया है। पानी की निकासी का प्रबंध न होने से मंडी में यह हालात पैदा होते हैं। आढ़तियों को अपनी दुकान तक जाने के लिए पानी में होकर गुजरना पड़ता है।
अपनी फसल बेचने आने वाले किसानों भी बहुत मुश्किल होती है। हालांकि मंडी परिसर के सौंदर्यीकरण के लिए एक करोड़ से ज्यादा की धनराशि सरकार ने मंजूर की है, लेकिन अभी तक जलनिकासी के प्रबंध करने का काम शुरू नहीं हुआ है। संवाद
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किसान-आढ़तियों की व्यथा
सब्जी मंडी का गेट ऊंचा होने से बारिश का पानी बाहर नहीं निकल पा रहा। कई दिनों तक जलभराव होने से बीमारियां फैलने का भय अभी बना हुआ है। आढ़तिया इस समस्या से परेशान हैं, जबकि यह मंडी पूरे जिले में सर्वाधिक राजस्व दे रही है।
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-सतीशचंद्र गुप्ता, आढ़तिया
मंडी परिसर में जलभराव होने से किसान एवं आढ़तियों को काफी परेशानी हो रही है। किसान अपनी सब्जी सड़क पर रखकर बेचने के लिए मजबूर हैं, लेकिन न तो मंडी प्रशासन और न हीं जिला प्रशासन ने मंडी परिसर में जलभराव की समस्या को दूर करने का उपाय किया है।
-विक्रांत, आढ़तिया
जरा सी बारिश में मंडी परिसर तालाब का रूप ले लेता है। मंडी में पानी की निकासी का कोई प्रबंध नहीं है। सब्जी लेकर आने वाले किसान गंदे पानी में होकर निकलकर सब्जी बेचने के लिए मजबूर हैं। मंडी प्रशासन के कान पर जूं नहीं रेंग रही।
-शिवराज सिंह, किसान
मंडी काफी पुरानी बनी है। इसे ऊंचा नहीं किया जा सकता। पंपसेट से पानी निकलवाया जा रहा है। स्थिति सामान्य होने के बाद समस्या के स्थायी निदान की योजना बनाई जाएगी।
-यशपाल सिंह, मंडी सचिव