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हाथरस : हींग की प्रयोगशाला के लिए जगह की तलाश
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हाथरस : एक फैक्टरी में तैयार होती हींग। संवाद
- फोटो : HATHRAS
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, हाथरस
हींग की गुणवत्ता की परख के लिए शहर में जल्द ही प्रयोगशाला स्थापित की जाएगी। इसके लिए जगह की तलाश की जा रही है। जगह तय होने के बाद हींग उद्यमियों की एक सोसायटी बनाई जाएगी। इसके बाद उद्यमियों से खाते में धनराशि ली जाएगी। बाकी राशि सरकार द्वारा दी जाएगी। इसके लिए जिला उद्योग केंद्र (डीआईसी) के अधिकारी व उद्यमी दोनों ही प्रयासरत हैं।
उल्लेखनीय है कि हाथरस की हींग की मांग देश भर में है। यहां हींग की 50 बड़ी और करीब 100 छोटी इकाइयां हैं। इनका टर्न ओवर करीब 25 करोड़ रुपये सालाना है। यहां के उद्यमी हींग की गुणवत्ता की जांच कराने के लिए अभी तक निजी प्रयोगशाला पर निर्भर हैं। अपने उत्पाद की गुणवत्ता परखने के लिए उद्यमियों को इसके नमूने अपने आगरा, दिल्ली और गुरुग्राम भेजने पड़ते हैं। वहां से जब नमूना पास हो जाता है, तब वह अपने उत्पाद को बाजार में उतारते हैं। एक-दो बड़ी फैक्टरियों में जरूर निजी प्रयोगशाला बनी हैं, लेकिन सरकारी प्रयोगशाला नहीं है।
चार साल पहले हाथरस के हींग उद्योग को एक जिला एक उत्पाद (ओडीओपी) में शामिल किया गया था। तब से यह उद्योग और फैल रहा है। अब यहां के उद्यमी अलग से हींग नगरी बनाने के साथ-साथ सरकारी प्रयोगशाला बनाने की मांग भी कर रहे हैं। यह मांग शासन तक भी पहुंची है। ऐसे में जिला प्रशासन के निर्देश पर जिला उद्योग केंद्र द्वारा प्रयोगशाला के लिए भूमि की तलाश की जा रही है।
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जगह का चयन होने के बाद हींग उद्यमियों की एक समिति बनाई जाएगी। उसके बाद खाता खुलेगा। समिति को नाम दिया जाएगा। उसके बाद सत्यापन होगा। खाते में हींग उद्यमियों से राशि ली जाएगी। उसके बाद हींग के नमूने की जांच के लिए प्रयोगशाला बनाई जाएगी। इस मामले में उपायुक्त उद्योग अजिलेश कुमार कहना है कि हींग की प्रयोगशाला के लिए जगह की तलाश की जा रही है। संवाद
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हींग की गुणवत्ता की परख के लिए शहर में जल्द ही प्रयोगशाला स्थापित की जाएगी। इसके लिए जगह की तलाश की जा रही है। जगह तय होने के बाद हींग उद्यमियों की एक सोसायटी बनाई जाएगी। इसके बाद उद्यमियों से खाते में धनराशि ली जाएगी। बाकी राशि सरकार द्वारा दी जाएगी। इसके लिए जिला उद्योग केंद्र (डीआईसी) के अधिकारी व उद्यमी दोनों ही प्रयासरत हैं।
उल्लेखनीय है कि हाथरस की हींग की मांग देश भर में है। यहां हींग की 50 बड़ी और करीब 100 छोटी इकाइयां हैं। इनका टर्न ओवर करीब 25 करोड़ रुपये सालाना है। यहां के उद्यमी हींग की गुणवत्ता की जांच कराने के लिए अभी तक निजी प्रयोगशाला पर निर्भर हैं। अपने उत्पाद की गुणवत्ता परखने के लिए उद्यमियों को इसके नमूने अपने आगरा, दिल्ली और गुरुग्राम भेजने पड़ते हैं। वहां से जब नमूना पास हो जाता है, तब वह अपने उत्पाद को बाजार में उतारते हैं। एक-दो बड़ी फैक्टरियों में जरूर निजी प्रयोगशाला बनी हैं, लेकिन सरकारी प्रयोगशाला नहीं है।
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चार साल पहले हाथरस के हींग उद्योग को एक जिला एक उत्पाद (ओडीओपी) में शामिल किया गया था। तब से यह उद्योग और फैल रहा है। अब यहां के उद्यमी अलग से हींग नगरी बनाने के साथ-साथ सरकारी प्रयोगशाला बनाने की मांग भी कर रहे हैं। यह मांग शासन तक भी पहुंची है। ऐसे में जिला प्रशासन के निर्देश पर जिला उद्योग केंद्र द्वारा प्रयोगशाला के लिए भूमि की तलाश की जा रही है।
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जगह का चयन होने के बाद हींग उद्यमियों की एक समिति बनाई जाएगी। उसके बाद खाता खुलेगा। समिति को नाम दिया जाएगा। उसके बाद सत्यापन होगा। खाते में हींग उद्यमियों से राशि ली जाएगी। उसके बाद हींग के नमूने की जांच के लिए प्रयोगशाला बनाई जाएगी। इस मामले में उपायुक्त उद्योग अजिलेश कुमार कहना है कि हींग की प्रयोगशाला के लिए जगह की तलाश की जा रही है। संवाद