फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
डाउनलोड करें

सब्सक्राइब करें
Hindi News ›   Uttar Pradesh ›   Hathras News ›   Hathras: Lack of awareness makes a mockery of human rights

हाथरस : जागरूकता की कमी से उड़ता है मानवाधिकारों का मखौल

Fri, 09 Dec 2022 11:55 PM IST
Aligarh Bureau अलीगढ़ ब्यूरो
Updated Fri, 09 Dec 2022 11:55 PM IST
विज्ञापन
Hathras: Lack of awareness makes a mockery of human rights
हाथरस : कोतवाली सदर में लगा मानवाधिकार का बोर्ड। संवाद - फोटो : HATHRAS
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, हाथरस
विज्ञापन

प्रतिवर्ष 10 दिसंबर को अंतरराष्ट्रीय मानवाधिकार दिवस मनाया जाता है। इसका मकसद लोगों के अधिकारों की रक्षा करते हुए उन्हें स्वतंत्र और गरिमामयी जीवन जीने का अधिकार देना है। इसके बावजूद पग-पग पर मानवाधिकारों का हनन होता है। इसकी मुख्य वजह यह भी है कि लोग मानवाधिकारों के प्रति जागरूक नहीं हैं। उन्हें यही नहीं मालूम कि आखिर उन्हें कौन से अधिकार प्राप्त हैं, जिनका अनुपालन करने के लिए सरकारी मशीनरी पर जिम्मेदारी है।
गौरतलब है कि मानवाधिकार उल्लंघन की सबसे ज्यादा शिकायतें पुलिस महकमे की आती हैं। हर थाने में मानवाधिकार संरक्षण के नियमों का बोर्ड या पट्टिका तो दिखाई देती है, लेकिन इनका पालन नहीं होता। थानों में डीके बसु केस में पारित उच्चतम न्यायालय के दिशा-निर्देश भी लिखे होते हैं, लेकिन उनका पालन भी धरातल की अपेक्षा कागजों पर ही होता है।
विज्ञापन

खेदजनक पहलू यह है कि पुलिस के खिलाफ मानवाधिकार उल्लंघन की तमाम शिकायतें भेजी जाती हैं। यह शिकायतें मानवाधिकार आयोग को भेजी जाती हैं। आयोग को भेजी गई शिकायतों की जांच पुलिस का मानवाधिकार प्रकोष्ठ ही करता है। लिहाजा अधिकांश मामलों में लीपापोती कर दी जाती है।
विज्ञापन
विज्ञापन

इनका कहना है...
वरिष्ठ नागरिक, महिला और बालकों के हित संरक्षण, पर्यावरण संरक्षण तथा सूचना का अधिकार अधिनियम को बने नियम कानूनों का धरातलीय क्रियान्वयन के लिए समुचित समीक्षा और कार्यक्रम कागजों पर हैं। स्वयं मानवाधिकार आयोग के परिपत्रों का 80 फीसदी अनुपालन नहीं हो रहा। जिला स्तरीय मानवाधिकार संरक्षण न्यायालय जनजागृति के अभाव में लोकप्रिय नहीं हो रहे। उच्चतम न्यायालय द्वारा मानवाधिकार संरक्षण के विभिन्न पहलुओं पर दिए दिशा-निर्देशों का प्रभावी जमीनी क्रियान्वयन तथा संवेदीकरण और जनजागृति की व्यापक आवश्यकता है।
-हरीश कुमार शर्मा, वरिष्ठ अधिवक्ता
मानवाधिकार उल्लंघन की पुलिस से संबंधित जो शिकायतें मानवाधिकार आयोग को भेजी जाती हैं। उनकी जांच पुलिस अधिकारी ही करते हैं। पुलिस की शिकायत की जांच पुलिस अधिकारी ही करते हैं, इसलिए मामले में लीपापोती कर दी दी जाती है। मानवाधिकार हनन के मामलों की शिकायत की जांच मानवाधिकार आयोग के अधिकारियों द्वारा की जानी चाहिए। पुलिस को आम आदमी के प्रति अपना व्यवहार सुधारना चाहिए। आज भी थाने में लोगों को अवैध रूप से हिरासत में रखा जाता है। उन्हें प्रताड़ित किया जाता है। इस पर प्रतिबंध के लिए जागरूकता जरूरी है।
-अजय भारद्वाज, वरिष्ठ अधिवक्ता
उच्चतम न्यायालय व उच्च न्यायालय ने मानवाधिकारों के हनन को रोकने के लिए समय-समय पर दिशा निर्देश जारी किए हैं, लेकिन प्रशासन द्वारा इनका क्रियान्वयन नहीं किया जाता। इसी वजह से व्यक्ति के अधिकारों का हनन होता है। मानव को जो गरिमामयी तरीके से जीवन जीने के अधिकार प्रदान किए गए हैं, उनकी निगरानी के लिए समुचित व्यवस्था होनी चाहिए और मानवाधिकारों का हनन करने वाले अधिकारियों के खिलाफ सख्त कार्रवाई का प्राविधान भी होना आवश्यक है। तभी मानवाधिकारों की रक्षा संभव है।
-लक्ष्मीकांत सारस्वत, वरिष्ठ अधिवक्ता
मानवाधिकार आयोग के दिशा-निर्देशों का पालन कागजों पर ही हो रहा है, वास्तविकता में नहीं। पुलिस खुलकर मानवाधिकारों की धज्जियां उड़ाती है। आज भी पुलिस टॉर्चर की वजह से अभिरक्षा में मृत्यु के मामले सामने आते हैं, जो पुलिस की कारगुजारी को साबित करने के लिए काफी हैं। मानवाधिकारों को लेकर आयोग और न्यायालयों की दिशा निर्देश हैं, उनका अनुपालन सुनिश्चित होने से ही मानवाधिकारों के हनन को रोका जा सकता है।
-चौधरी अमर सिंह, वरिष्ठ अधिवक्ता।
जिस प्रकार सशक्त देश कमजोर देश का उत्पीड़न करता है, उसी प्रकार हमारे यहां मानव अधिकारों का हनन होता है। मानवाधिकार गरिमा पूर्ण तरीके से जीवन जीने का अधिकार है, जिसमें व्यक्ति के साथ जाति, धर्म, संप्रदाय के आधार पर भेद न हो। मानवाधिकार हनन को रोकने के लिए प्रभावी तंत्र का अभाव है। मानवाधिकारों को लेकर जो दिशा निर्देश जारी हुए हैं, उनका अनुपालन कराने के लिए प्रभावी तंत्र नही है और जो तंत्र है भी, उसमें इच्छाशक्ति का अभाव है। ऐसे में आखिर कैसे मानवाधिकारों की रक्षा होगी।

-अमर सिंह चंदेल, वरिष्ठ अधिवक्ता
मानवाधिकार हनन को रोकने के लिए जो दिशा निर्देश लिखित रूप से जारी हुए हैं। उनका अनुपालन कराने के लिए जिम्मेदार लोगों को सक्रिय रहना चाहिेए। पुलिस के अलावा अन्य विभाग भी जिम्मेदारी पूर्वक अपने कर्तव्यों का निर्वहन नहीं कर रहे। इसी वजह से आम आदमी को प्रताड़ित होना पड़ता है। इसके लिए आवश्यक है कि मानवाधिकार अनुपालन के लिए निगरानी सुनिश्चित की जाए और जो मानवाधिकारों का हनन करें, उसके खिलाफ सख्त कार्रवाई शीघ्र ही हो।
-दिगंबर सिंह सिसौदिया, वरिष्ठ अधिवक्ता
विज्ञापन
विज्ञापन

रहें हर खबर से अपडेट, डाउनलोड करें Android Hindi News App, iOS Hindi News App और Amarujala Hindi News APP अपने मोबाइल पे|
Get all India News in Hindi related to live update of politics, sports, entertainment, technology and education etc. Stay updated with us for all breaking news from India News and more news in Hindi.

विज्ञापन
विज्ञापन
विज्ञापन

एड फ्री अनुभव के लिए अमर उजाला प्रीमियम सब्सक्राइब करें

Next Article

AU ऐप में पढ़ें

Followed