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हाथरस: करपात्री जी ने हाथरस में रामराज्य परिषद की स्थापना कर मचाई थी राजनीति में हलचल

Wed, 22 Jul 2020 12:25 AM IST
Aligarh Bureau अलीगढ़ ब्यूरो
Updated Wed, 22 Jul 2020 12:25 AM IST
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Hathras: Karpatri ji created a stir in politics by establishing Ram Rajya Parishad in Hathras
हाथरस: आगरा रोड स्थित संस्कृत विद्यालय में बना वो चबूतरा, जिस पर करपात्री जी रुके थे। - फोटो : HATHRAS
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, हाथरस
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बृज की देहरी हाथरस से करपात्री जी महाराज का खासा नाता रहा है। करपात्री जी महाराज द्वारा धर्मरक्षा का शंखनाद हाथरस से किया था। उन्होंने धर्म की जय हो, अधर्म का नाश हो, प्राणियों में सद्भावना हो, विश्व का कल्याण हो, जैसे नारों का उद्घोष किया था।
शहर के समाजसेवी जयशंकर पाराशर ने बताया कि करपात्री जी महाराज ने रामराज्य परिषद की स्थापना कर देश में राजनीति में हलचल मचाई थी। हाथरस आगमन पर करपात्री महाराज आगरा रोड स्थित संस्कृत विद्यालय में बनी गुफा में निवास करते थे। उनकी दिनचर्या का प्रमाण आगरा रोड महाविद्यालय में आज भी मौजूद है।
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उन्होंने संस्कृति को बढ़ावा देने के लिए उन्हीं की कृपा से विद्यालय की स्थापना हुई। वर्ष 1940 में धर्मसंघ की स्थापना की। वर्ष 1942 में हाथरस आए थे। संस्कृत विद्यालय को साधना स्थली बनाया था। 1943-44 में विश्व कल्याण की कामना के साथ देशभर में अनुष्ठान किया। 1957 में हिंदी रक्षा को आंदोलन चलाया। 1966 में गोरक्षा महाअभियान समिति का गठन कर दिल्ली में प्रदर्शन किया तो जेल भी गए। स्वामी करपात्री महाराज ने धर्म, संस्कृति, भक्ति, दर्शन, राजनीति आदि विषयों पर 35 उत्कृष्ट ग्रंथों की रचना की। सात फरवरी 1982 में ब्रह्मलीन हो गए।
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बर्तन का त्याग कर बने करपात्री
बर्तन का त्याग करने के कारण उनका नाम करपात्री पड़ा। स्वामी हरिहरानंद सरस्वती ने संस्कृत विद्यालय में साधना के दौरान बर्तन का त्याग किया। हाथों में लेकर भोजन ग्रहण करते थे। वर्ष 1974 में सरकार ने उन्हें सम्मानित भी किया। जयशंकर पाराशर ने बताया कि संस्कृत विद्यालय में बने चबूतरे पर करपात्री जी महाराज अपने शिष्यों के साथ मंत्रणा करते थे। यहां बना भगवान भोलेनाथ का मंदिर भी अहम है। इस बार कोरोना काल के चलते श्रद्धालु घरों में सोशल डिस्टेंसिंग का पालन करते हुए पूजा-अर्चना करेंगे।
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