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हाथरस : काका के पुत्र ने लता के सामने पढ़ी थी 40 मिनट की व्याख्या, आठ बार बजीं तालियां

Mon, 07 Feb 2022 12:15 AM IST
Aligarh Bureau अलीगढ़ ब्यूरो
Updated Mon, 07 Feb 2022 12:15 AM IST
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Hathras: Kaka's son read 40 minutes of explanation in front of Lata, applause rang eight times
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, हाथरस
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स्वर सम्राज्ञी कहे जाने वालीं मशहूर गायिका लता मंगेशकर के निधन से शहर में शोक की लहर दौड़ गई। संगीत प्रेमी और साहित्यकार उनके निधन से स्तब्ध नजर आए। लता जी का एक संस्मरण हाथरस से भी जुड़ा है। काका हाथरसी के पुत्र अशोक गर्ग ने लखनऊ में लता मंगेशकर के सामने करीब 40 मिनट तक उनकी व्याख्या का बखान किया। इस दौरान कार्यक्रम में मौजूद लोगों ने आठ बार तालियां बजाईं।
लखनऊ में हुए कार्यक्रम इस में काका के पुत्र अशोक गर्ग, नौशाद और विष्णु खरे आदि लोग मंच पर बैठे हुए थे। इस दौरान काका के पुत्र ने उनकी 40 मिनट तक व्याख्या पढ़ी। लता मंगेशकर को दादा साहब फाल्के अवार्ड से सम्मानित किया था। उनका कहना था कि वह भारत की रत्न थीं। उन्होंने कहा कि हमारा भाग्य बहुत अच्छा है कि वर्ष 1950 से 1970 तक लता जी की गायकी को उन्हाेंने पग-पग बढ़ते देखा है।
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उन्होंने एक आर्टिकल लिखा, जो वर्ष 1990 में एक समाचार पत्र में प्रकाशित हुआ था। यह लेख संगीतकी पत्रिका में सितंबर 1990 के अंक में पुन: प्रकाशित हुआ। 32 वर्ष के अंतराल में लता जी पर ढेर सारी सामग्री प्रकाशित हो चुकी है। उन्होंने कहा कि अभी तक हिंदी या अंग्रेजी में एक भी ऐसी किताब या लेख सामने नहीं आया है, जिसमें व्यापक रूप से लता मंगेशकर के सांगीतिक गुणों की सांगीतिक व्याख्या की गई हो। 32 साल बाद पहले लिखा उनका लेख इस मामले में आज भी विनम्रता पूर्वक खड़ा है। संवाद
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करोड़ों दिलों की धड़कन बनकर लता ने अखंड सम्मान पाया। यह सफलता सिर्फ लता को नसीब हुई। पद्म विभूषण, दादा साहब फाल्के सम्मान उनकी शख्सियत के आगे बौने लगते हैं। वह तो बस भारत रत्न हैं।
-डॉ. मुकेश गर्ग, सुविख्यात संगीत समीक्षक, प्रो. दिल्ली विश्वविद्यालय
खेत पर खड़े किसान सीमा पर खड़े जवान और कुटिया से लेकर महल तक लता की मधुर आवाज सब के दिलों में बसती है। उनके गाए गीत युगों युगों तक सुने व सराहे जाएंगे। आवाज ही उनकी पहचान रहेगी। हम भूल नहीं पाएंगे लता दीदी को।
-गोपाल चतुर्वेदी साहित्यकार
लता के निधन ने आज ऐसा लगता है कि सुरों की विदाई हो गई है। उनके द्वारा गाए गए गाने आज भी दिलों पर राज कर रहे हैं। यह देश के लिए अपूर्णनीय क्षति है। गीतों से उन्होंने समाज को नया आइना दिखाने का काम किया। उनके निधन से मैं काफी दुखी हूं।

-पदमा शर्मा, सेवानिवृत्त संगीत शिक्षक
संगीत के शास्त्रों व ग्रंथों को उठाकर देखिए। गायक-गायिकाओं में जितने गुण बताए गए हैं, वह लता में थे। मधुर कंठ के साथ उन्हें रागों का ज्ञान था। लता मंगेशकर का जिस फिल्म में गाना न हो वह पिट जाती थी। जब लोग गाना सुनते थे तो सुरों के संगम में लीन हो जाते थे। उनके निधन से समाज स्तब्ध है।
-विद्यासागर विकल, साहित्यकार
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