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हाथरस : रेलवे यदि माल भेजने की बेहतर सुविधा दे तो चमक सकते हैं उद्योग
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हाथरस : हाथरस सिटी रेलवे स्टेशन। संवाद
- फोटो : HATHRAS
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गौरव भारद्वाज
हाथरस। शहर के उद्यमी और रेलवे दोनों को ही एक-दूसरे से काफी उम्मीदें हैं। उद्यमियों को उम्मीद है कि यदि रेलवे उन्हें माल भेजने की बेहतर सुविधा उपलब्ध करा दे तो यहां का कारोबार फिर चमक सकता है। रेलवे को यह उम्मीद है कि यदि पार्सल सेवा शुरू हुई तो रेलवे की आमदनी बढ़ेगी। रेलवे के अधिकारियों ने इसे लेकर व्यापारियों से सुझाव भी मांगे हैं।
हाथरस कभी कानपुर के बाद यूपी का दूसरा बड़ा औद्योगिक नगर कहा जाता था। यहां बड़े-बड़े दाल मिल और कॉटन मिल थे। इन मिलों के अंदर मालगाड़ियां जाती थीं और वहां से माल ढोकर ले जाती थीं। रेलवे ने जब अपनी सेवाएं समाप्त कर दीं तो यहां उद्यमियों के सामने ट्रांसपोर्टेशन की समस्या पैदा हो गई। ट्रकों के जरिये यहां माल की आवाजाही शुरू हुई, लेकिन इस पर खर्चा बहुत आने लगा। अब फिर से रेलवे और यहां के उद्यमियों व व्यापारियों में वार्ता चल रही कि यहां से रेलवे के माध्यम से माल की आवाजाही हो। इसके लिए प्रमुख मुख्य परिचालन प्रबंधन ने शुक्रवार को व्यापारियों के साथ वार्ता भी की थी। उन्होंने कई बिंदुओं पर वार्ता की थी। अब यहां के उद्यमी व व्यापारी इस सिलसिले में तीन सितंबर को बैठक करेंगे।
रेलवे की मदद से उद्योग पकड़ सकते हैं रफ्तार
हाथरस। हाथरस में 55 छोटे बड़े दाल-मिल हैं। इनमें प्रतिदिन करीब 11 सौ कुंतल दालों का उत्पादन होता है। रेडीमेड गारमेंट्स की 300 से अधिक यूनिट हैं। हींग की छोटी बड़ी करीब डेढ़ सौ फैक्टरियां हैं। रंग-गुलाल के करीब दो दर्जन कारखाने हैं। अचार-मुरब्बा दो दर्जन से अधिक फैक्टरियां हैं। मेटल की सवा 200 पंजीकृत व गैर पंजीकृत फैक्टरियां हैं। इसके अलावा हैंडलूम की दो दर्जन के करीब फैक्टरियां हैं। एक दर्जन के करीब नमकीन व कचरी की फैक्टरियां हैं। इन औद्यौगिक इकाइयों से देशभर में माल की आपूर्ति होती है। यहां के कारोबारी ट्रांसपोर्ट से माल को भेजते हैं। इस कारण खर्चा अधिक पड़ता है। इसे लेकर कारोबारी खासे परेशान हैं। अब रेलवे अधिकारियों की वार्ता के बाद व्यापारियों में पार्सल की सुविधा मिलने की उम्मीद जगी है। संवाद
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कई स्टेशन, फिर भी सुविधाओं का संकट
हाथरस। हाथरस में किला स्टेशन, मेेंडू, हाथरस सिटी, डीएफसीसी का न्यू हाथरस जंक्शन, हाथरस जंक्शन और हाथरस रोड आदि स्टेशन हैं। इतने स्टेशन होने के बाद यहां से किसी धार्मिक स्थल के लिए सीधे ट्रेन नहीं है। लोगों को जाने के लिए पड़ोसी जिलों से यात्रा करनी पड़ती है। यदि रेलवे चाहे तो माल की लोडिंग की सुविधा कस्बा मेंडू के स्टेशन पर कर सकता है। यहां माल आसानी से लोड हो सकता है। इससे व्यापारियों का राहत मिलेगी। वहीं रेलवे को राजस्व में भी बढ़ोतरी होगी।
हाथरस प्रतिस्पर्धा से बाहर हो गया है। रेलवे की सुविधा मिलने से हाथरस के उद्योगों में जान पड़ जाएगी। हाथरस में नये उद्योग चालू हुए, जिनको रेलवे से काफी फायदा होगा। रेलवे की फुल लोडिंग चालू हो जाती है तो हाथरस के दाल मिल व गल्ला उद्योगों को काफी राहत मिलेगी।
-कपिल अग्रवाल व्यापारी।
हाथरस के पुराने स्वरूप को वापस लाने के लिए रेलवे का सहयोग अति आवश्यक है। यहां सबसे बड़ी दाल मंडी थी। हाथरस पहला शहर था, जिसमें दाल की लोडिंग के लिए कारखानों में सीधे डिब्बे मिलों में जाते थे। वहां से माल लोड होकर जाता था। यदि किसी जगह का ट्रांसपोर्ट सही है तो वह क्षेत्र उद्योग जगत में निश्चित तरक्की करेगा।
-योगेंद्र शर्मा, प्रदेश मंत्री व्यापार मंडल
हाथरस का कानपुर के बाद उद्योग में दूसरा नंबर था। आज ट्रांसपोर्ट की सुविधा न होने के कारण माल भेजने में व्यापारियों को काफी दिक्कतें आती है। रेलवे परामर्शदात्री समिति का सदस्य होने के नाते मैने रेलवे अधिकारियों से पार्सल सेवा व फुल लोडिंग सिस्टम चालू करने की मांग की है।
-दिनेश सरदाना, रेलवे परामर्श दात्री समिति सदस्य।
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हाथरस। शहर के उद्यमी और रेलवे दोनों को ही एक-दूसरे से काफी उम्मीदें हैं। उद्यमियों को उम्मीद है कि यदि रेलवे उन्हें माल भेजने की बेहतर सुविधा उपलब्ध करा दे तो यहां का कारोबार फिर चमक सकता है। रेलवे को यह उम्मीद है कि यदि पार्सल सेवा शुरू हुई तो रेलवे की आमदनी बढ़ेगी। रेलवे के अधिकारियों ने इसे लेकर व्यापारियों से सुझाव भी मांगे हैं।
हाथरस कभी कानपुर के बाद यूपी का दूसरा बड़ा औद्योगिक नगर कहा जाता था। यहां बड़े-बड़े दाल मिल और कॉटन मिल थे। इन मिलों के अंदर मालगाड़ियां जाती थीं और वहां से माल ढोकर ले जाती थीं। रेलवे ने जब अपनी सेवाएं समाप्त कर दीं तो यहां उद्यमियों के सामने ट्रांसपोर्टेशन की समस्या पैदा हो गई। ट्रकों के जरिये यहां माल की आवाजाही शुरू हुई, लेकिन इस पर खर्चा बहुत आने लगा। अब फिर से रेलवे और यहां के उद्यमियों व व्यापारियों में वार्ता चल रही कि यहां से रेलवे के माध्यम से माल की आवाजाही हो। इसके लिए प्रमुख मुख्य परिचालन प्रबंधन ने शुक्रवार को व्यापारियों के साथ वार्ता भी की थी। उन्होंने कई बिंदुओं पर वार्ता की थी। अब यहां के उद्यमी व व्यापारी इस सिलसिले में तीन सितंबर को बैठक करेंगे।
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रेलवे की मदद से उद्योग पकड़ सकते हैं रफ्तार
हाथरस। हाथरस में 55 छोटे बड़े दाल-मिल हैं। इनमें प्रतिदिन करीब 11 सौ कुंतल दालों का उत्पादन होता है। रेडीमेड गारमेंट्स की 300 से अधिक यूनिट हैं। हींग की छोटी बड़ी करीब डेढ़ सौ फैक्टरियां हैं। रंग-गुलाल के करीब दो दर्जन कारखाने हैं। अचार-मुरब्बा दो दर्जन से अधिक फैक्टरियां हैं। मेटल की सवा 200 पंजीकृत व गैर पंजीकृत फैक्टरियां हैं। इसके अलावा हैंडलूम की दो दर्जन के करीब फैक्टरियां हैं। एक दर्जन के करीब नमकीन व कचरी की फैक्टरियां हैं। इन औद्यौगिक इकाइयों से देशभर में माल की आपूर्ति होती है। यहां के कारोबारी ट्रांसपोर्ट से माल को भेजते हैं। इस कारण खर्चा अधिक पड़ता है। इसे लेकर कारोबारी खासे परेशान हैं। अब रेलवे अधिकारियों की वार्ता के बाद व्यापारियों में पार्सल की सुविधा मिलने की उम्मीद जगी है। संवाद
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कई स्टेशन, फिर भी सुविधाओं का संकट
हाथरस। हाथरस में किला स्टेशन, मेेंडू, हाथरस सिटी, डीएफसीसी का न्यू हाथरस जंक्शन, हाथरस जंक्शन और हाथरस रोड आदि स्टेशन हैं। इतने स्टेशन होने के बाद यहां से किसी धार्मिक स्थल के लिए सीधे ट्रेन नहीं है। लोगों को जाने के लिए पड़ोसी जिलों से यात्रा करनी पड़ती है। यदि रेलवे चाहे तो माल की लोडिंग की सुविधा कस्बा मेंडू के स्टेशन पर कर सकता है। यहां माल आसानी से लोड हो सकता है। इससे व्यापारियों का राहत मिलेगी। वहीं रेलवे को राजस्व में भी बढ़ोतरी होगी।
हाथरस प्रतिस्पर्धा से बाहर हो गया है। रेलवे की सुविधा मिलने से हाथरस के उद्योगों में जान पड़ जाएगी। हाथरस में नये उद्योग चालू हुए, जिनको रेलवे से काफी फायदा होगा। रेलवे की फुल लोडिंग चालू हो जाती है तो हाथरस के दाल मिल व गल्ला उद्योगों को काफी राहत मिलेगी।
-कपिल अग्रवाल व्यापारी।
हाथरस के पुराने स्वरूप को वापस लाने के लिए रेलवे का सहयोग अति आवश्यक है। यहां सबसे बड़ी दाल मंडी थी। हाथरस पहला शहर था, जिसमें दाल की लोडिंग के लिए कारखानों में सीधे डिब्बे मिलों में जाते थे। वहां से माल लोड होकर जाता था। यदि किसी जगह का ट्रांसपोर्ट सही है तो वह क्षेत्र उद्योग जगत में निश्चित तरक्की करेगा।
-योगेंद्र शर्मा, प्रदेश मंत्री व्यापार मंडल
हाथरस का कानपुर के बाद उद्योग में दूसरा नंबर था। आज ट्रांसपोर्ट की सुविधा न होने के कारण माल भेजने में व्यापारियों को काफी दिक्कतें आती है। रेलवे परामर्शदात्री समिति का सदस्य होने के नाते मैने रेलवे अधिकारियों से पार्सल सेवा व फुल लोडिंग सिस्टम चालू करने की मांग की है।
-दिनेश सरदाना, रेलवे परामर्श दात्री समिति सदस्य।