फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
डाउनलोड करें

सब्सक्राइब करें
Hindi News ›   Uttar Pradesh ›   Hathras News ›   Hathras: Hindi should be made mandatory in government work

हाथरस : सरकारी कामकाज में हिंदी को किया जाए अनिवार्य

Fri, 17 Sep 2021 03:22 PM IST
Aligarh Bureau अलीगढ़ ब्यूरो
Updated Fri, 17 Sep 2021 03:22 PM IST
विज्ञापन
Hathras: Hindi should be made mandatory in government work
उदय पुण्ढीर। - फोटो : SIKANDHRA RAHU
संवाद न्यूज एजेंसी, सिकंदराराऊ/हाथरस।
विज्ञापन

हिंदी हमारी अस्मिता की पहचान है, बेहद दुख की बात है कि हिंदी भाषा को वह सम्मान नहीं मिल रहा है, जिसकी वह वास्तविक हकदार है। शायद ही ऐसी कोई भाषा होगी, जिसे अपनाने में संबंधित क्षेत्र के बाशिंदों को गर्व की अनुभूति न होती हो, लेकिन हिंदी को लेकर हिंद में ही संघर्ष चल रहा है।
हिंदी को सम्मान दिलाने के लिए सबसे बड़ी आवश्यकता इस बात की है कि इसे सरकारी कामकाज में अनिवार्य बनाया जाए। हिंदी को रोजगारपरक भाषा बनाने पर भी ध्यान दिया जाना चाहिए, ताकि नई पीढ़ी इससे जुड़कर इसके उत्थान में भागीदार बन सके।
विज्ञापन

- देश में काफी समय तक अंग्रेजों ने राज्य किया। इस दौरान हिंदी को मिटाने और इसका प्रयोग कम करने के लिए कई प्रयास किए गए, लेकिन देश को आजादी मिलने के बाद हुक्मरानों ने हिंदी के लिए बिल्कुल भी काम नहीं किया है। अगर वह इसको लेकर सार्थक प्रयास करते तो हिंदी की यह दशा नहीं होती। खुशी की बात यह है कि वर्तमान में हिंदी का प्रयोग लगातार बढ़ रहा है।
विज्ञापन
विज्ञापन

-वीरेंद्र सिंह राना, विधायक
- हिंदी को राजभाषा बनाने का तमिल भाषियों ने तीव्र विरोध किया। उन्हें लगा कि हिंदी अनिवार्य हुई तो तमिल भाषा का अस्तित्व मिट जाएगा। वास्तवकिता में हमारे शासक तमिलभाषियों को समझाने में असफल साबित हुए हैं। इसके बाद इस विषय पर काम करने में सरकारों को डर महसूस होने लगा है। हमें हिंदी के उत्थान के लिए सार्थक प्रयास लगातार करने होंगे।
-लक्ष्मण सेंगर, समाजसेवी
- वर्तमान सरकार हिंदी में तकनीकी की पढ़ाई करवा रही है। इससे हिंदी को ताकत मिलेगी। ऐसा नहीं है कि हिंदी को देश में चाहने वालों की कमी है, लेकिन अंग्रेजियत का प्रभाव हम पर इतना हावी है कि हम अपनी ही भाषा को बोलने में हिचकिचाहट महसूस करते हैं। हमें इसे मानसिकता से बाहर निकलना होगा। तभी हिंदी को प्रोत्साहन मिल सकेगा।

-विकास वार्ष्णेय, युवा
- हिंदी हमारी मुख्य भाषा है। देश में अनेक प्रकार की भाषाएं चल रही हैं। इस पर किसी को कोई आपत्ति नहीं है, लेकिन हिंदी को अपनाने में क्या परेशानी है। एनआरआई दूसरे देशों में गर्व से हिंदी बोलते हैं। हमें उनसे सबक लेना चाहिए। अपने देश की मिट्टी से जुड़ने का एकमात्र साधन केवल हिंदी है, इसलिए आइए हिंदी को अपनाएं और दूसरों को भी इसे अपनाने के लिए प्रेरित करें।
-उदय पुंढीर, समाजसेवी

विकास वार्ष्णेय।

विकास वार्ष्णेय।- फोटो : SIKANDHRA RAHU

लक्ष्मण सेंगर।

लक्ष्मण सेंगर।- फोटो : SIKANDHRA RAHU

वीरेंद्र सिंह राना।

वीरेंद्र सिंह राना। - फोटो : SIKANDHRA RAHU

विज्ञापन
विज्ञापन

रहें हर खबर से अपडेट, डाउनलोड करें Android Hindi News App, iOS Hindi News App और Amarujala Hindi News APP अपने मोबाइल पे|
Get all India News in Hindi related to live update of politics, sports, entertainment, technology and education etc. Stay updated with us for all breaking news from India News and more news in Hindi.

विज्ञापन
विज्ञापन
विज्ञापन

एड फ्री अनुभव के लिए अमर उजाला प्रीमियम सब्सक्राइब करें

Next Article

AU ऐप में पढ़ें

Followed