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हाथरस : हिंदी भाषा आज हर भाषा की सिरमौर है...
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कवि सम्मेलन में कवियित्रियों का हुआ सम्मान।
- फोटो : SIKANDHRA RAHU
संवाद न्यूज एजेंसी, सिकंदराराऊ।
हिंदी दिवस की पूर्व संध्या पर सोमवार को नगर के शिशु शिक्षा मंदिर (पेड़ वाला स्कूल) में भाईचारा सेवा समिति और विमल साहित्यिक संवर्धक संस्था के बैनर तले कवि सम्मेलन का आयोजन किया गया। कवियों ने गीतों का गायन किया और कविता का पाठ किया।
मुख्य अतिथि मित्रेश चतुर्वेदी, महेश यादव संघर्षी, हरपाल सिंह यादव, नरेश चतुर्वेदी, मीरा माहेश्वरी, डॉ. शरीफ अली खान, बबलू सिसौदिया, देवदत्त वर्मा, निखिलवर्ती पाठक ने मां सरस्वती के छवि चित्र के समक्ष दीप प्रज्ज्वलित कर कवि सम्मेलन का शुभारंभ किया।
कवियित्री गीता गीत ने मां सरस्वती की वंदना की। इगलास के कवि गाफिल स्वामी ने हिंदी है जन-जन की भाषा, हिंदी कथा भजन की भाषा, सुनाई। अलीगढ़ के कवि मनोज नागर ने हिंदी भाषा आज हर भाषा की सिरमौर, इस जैसी देखी नहीं जग में भाषा और, सुनाई।
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गीतकार सृजन शीतल ने हिंदी की शान में गीत पढ़ा। कासगंज के कवि आतिश सोलंकी ने भारत माता के चेहरे की रोली वाली बिंदी है, भाषाओं के इस फैशन में दबी ढकी में हिंदी हूं, सुनाई। एटा के कवि संजीव सरगम ने सुंदर, मनोरम, धवल मेरी हिंदी, समता सिखाती सरल मेरी हिंदी, कविता सुनाई।
इसके अलावा योगेश शर्मा, उन्नति भारद्वाज, अवनीश अलंकार, पंकज पंडा, विवेकशील राघव, डॉ. अरविंद चौधरी, चमचा हाथरसी, ललित मोहन भारद्वाज आदि ने काव्य पाठ किया। इस मौके पर रितिक गुप्ता, विशाल वार्ष्णेय, श्रीकृष्ण दीक्षित, सपना पुंढीर, नीरू यादव, मुकेश कुमार, रूपकिशोर वार्ष्णेय, राशिद कुरैशी, नीरज बघेल आदि मौजूद थे।
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हिंदी दिवस की पूर्व संध्या पर सोमवार को नगर के शिशु शिक्षा मंदिर (पेड़ वाला स्कूल) में भाईचारा सेवा समिति और विमल साहित्यिक संवर्धक संस्था के बैनर तले कवि सम्मेलन का आयोजन किया गया। कवियों ने गीतों का गायन किया और कविता का पाठ किया।
मुख्य अतिथि मित्रेश चतुर्वेदी, महेश यादव संघर्षी, हरपाल सिंह यादव, नरेश चतुर्वेदी, मीरा माहेश्वरी, डॉ. शरीफ अली खान, बबलू सिसौदिया, देवदत्त वर्मा, निखिलवर्ती पाठक ने मां सरस्वती के छवि चित्र के समक्ष दीप प्रज्ज्वलित कर कवि सम्मेलन का शुभारंभ किया।
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कवियित्री गीता गीत ने मां सरस्वती की वंदना की। इगलास के कवि गाफिल स्वामी ने हिंदी है जन-जन की भाषा, हिंदी कथा भजन की भाषा, सुनाई। अलीगढ़ के कवि मनोज नागर ने हिंदी भाषा आज हर भाषा की सिरमौर, इस जैसी देखी नहीं जग में भाषा और, सुनाई।
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गीतकार सृजन शीतल ने हिंदी की शान में गीत पढ़ा। कासगंज के कवि आतिश सोलंकी ने भारत माता के चेहरे की रोली वाली बिंदी है, भाषाओं के इस फैशन में दबी ढकी में हिंदी हूं, सुनाई। एटा के कवि संजीव सरगम ने सुंदर, मनोरम, धवल मेरी हिंदी, समता सिखाती सरल मेरी हिंदी, कविता सुनाई।
इसके अलावा योगेश शर्मा, उन्नति भारद्वाज, अवनीश अलंकार, पंकज पंडा, विवेकशील राघव, डॉ. अरविंद चौधरी, चमचा हाथरसी, ललित मोहन भारद्वाज आदि ने काव्य पाठ किया। इस मौके पर रितिक गुप्ता, विशाल वार्ष्णेय, श्रीकृष्ण दीक्षित, सपना पुंढीर, नीरू यादव, मुकेश कुमार, रूपकिशोर वार्ष्णेय, राशिद कुरैशी, नीरज बघेल आदि मौजूद थे।