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हाथरस : 20 किलो सामान के साथ 35 किमी चलना पड़ा पैदल

Thu, 03 Mar 2022 09:58 PM IST
Aligarh Bureau अलीगढ़ ब्यूरो
Updated Thu, 03 Mar 2022 09:58 PM IST
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Hathras: Had to walk 35 km with 20 kg luggage
हाथरस : यूक्रेन से लौटे छात्र तरुण चौधरी का स्वागत करते परिजन। संवाद - फोटो : SHAPHU
संवाद न्यूज एजेंसी, सहपऊ/सादाबाद।
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भूख, प्यास और जानलेवा परिस्थितियों से लड़कर अंतत: घर पहुंचे आलोक चौधरी ने बताया कि यूक्रेन में रूसी हमले के बाद अचानक परिस्थितियां तेजी से बदल गई थी। नजदीकी बॉर्डर पहुंचने के निर्देश मिलने के बाद वे बस से पोलैंड के लिए निकले। ट्रैफिक के चलते 35 किलोमीटर 20 किलो सामान के साथ पैदल चलना पड़ा।
आलोक ने बताया कि कड़ी ठंड में भूखे प्यासे रात काटनी पड़ी। इसके बाद भी पोलैंड बॉर्डर पर एंट्री नहीं मिल सकी। फिर वह हंगरी बॉर्डर के लिए पहुंचे। यहां भी सफलता न मिलने के बाद उन्हें स्लोवाकिया बॉर्डर जाना पड़ा। यहां प्रवेश मिलने के बाद राहत की सांस ली। स्लोवाकिया में केंद्रीय मंत्री किरण रिजिजू लेने आए और अपनी निगरानी में रखते हुए हर संभव मदद की।
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यूक्रेन में जगह-जगह चेकिंग हो रही थी। परेशानी भरा माहौल था। लग ही नहीं रहा था वह यूक्रेन में एमबीबीएस करने के लिए आए हैं। सुरक्षित घर पहुंचने के बाद आलोक ने प्रधानमंत्री का शुक्रिया अदा किया और अपील की है कि यूक्रेन में फंसे छात्रों को वापस लाने के लिए सरकार पूरी ताकत लगाए।
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एयर फोर्स के प्लेन से हिंडन एयरबेस के रास्ते पहुंचे घर
यूक्रेन से लौटे तरुण चौधरी ने बताया कि यूक्रेन में लड़ाई बढ़ रही है। 24 फरवरी को अचानक हमले की सूचना मिलने के बाद डर लगने लगा था। हालांकि, हमलोग हमले वाली जगह से काफी दूर और सुरक्षित थे। खारकीव की स्थिति बहुत खराब है।
तरुण ने बताया कि हमले के बाद एडवाइजरी मिलने पर उन्होंने दोस्तों के साथ ज्यादा से ज्यादा कैश निकाला। 10- 15 दिन के खाने का इंतजाम किया। यूक्रेन में भारतीय दूतावास ने दो दिन में बच्चों को निकालने का प्रयास शुरू कर दिया था। इसके बाद परिस्थितियों का सामना करते हुए वह हंगरी तक पहुंचे।

हंगरी में पहुंचने के बाद चीजें आसान हो गई। हंगरी में भारतीय दूतावास द्वारा पहुंचे भारतीय छात्रों को होटल में रखा गया। खाने का बेहतर इंतजाम था। इसके बाद एयर फोर्स प्लेन से उन्हें हिंडन एयरबेस गाजियाबाद लाया गया। यहां से वह सुरक्षित घर पहुंचे।
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