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हाथरस : यूूक्रेन से एमबीबीएस कर रहे युवाओं का भविष्य अधर में
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न्यूज डेस्क, अमर उजाला, सहपऊ/सादाबाद (हाथरस)
यूक्रेन-रूस के मध्य शुरू हुए युद्ध से वहां मेडिकल की पढ़ाई कर रहे युवाओं का भविष्य अधर में है। यूक्रेन से स्वदेश लौट चुके और वहां युद्ध में फंसे विद्यार्थियों के परिजन उनके भविष्य को लेकर काफी चिंतित हैं। अब तक यूक्रेन से लौट चुके विद्यार्थियों का कहना है कि भविष्य में अगर यूक्रेन पर रूस का कब्जा हो गया तो उनके भविष्य का क्या होगा, वह रूस पर निर्भर करता है। यदि अंतरराष्ट्रीय दबाव में आकर रूस और यूक्रेन के बीच समझौता हो गया तो क्या यूक्रेन उनकी पढ़ाई को पुरानी फीस पर ही जारी रखेगा या फिर इसमें कोई बदलाव करेगा। कुल मिलाकर यूक्रेन में पढ़ाई कर रहे विद्यार्थियों के भविष्य से जुड़े कई सवाल अनसुलझे हैं। इन विद्यार्थियों को अपना भविष्य खतरे में नजर आ रहा है।
पढ़ाई के खर्च में आ रहे अंतर की वजह से देश के विद्यार्थी मेडिकल की पढ़ाई के लिए यूक्रेन जाते हैं। हाल के वर्षों में यदि कोई विद्यार्थी देश के किसी निजी मेडिकल कॉलेज से एमबीबीएस की पढ़ाई करता है तो उसे करीब एक से डेढ़ करोड़ रुपये पूरे कोर्स का खर्चा वहन करना पड़ता है। इसके लिए पहले उसे नीट की परीक्षा भी पास करनी पड़ती है। यूक्रेन में तीन वर्ष पूर्व विज्ञान वर्ग के किसी भी विद्यार्थी को मेडिकल कॉलेज में सीधे प्रवेश मिल जाता था।
वहां उसका एमबीबीएस की पढ़ाई पर सालाना खर्चा करीब आठ से 10 लाख रुपये आता था। यूक्रेन में उन युवाओं को भी मेडिकल में प्रवेश मिल जाता है, जिसने भारत में केवल नीट की परीक्षा में भाग लिया हो। हालांकि भारत के सरकारी संस्थानों में मेडिकल की पढ़ाई सस्ती है। अब तीन साल पहले भारत सरकार ने विदेशों में मेडिकल की पढ़ाई कर रहे विद्यार्थियों के लिए भारत में प्रैक्टिस की मान्यता के लिए एक टेस्ट पास करने की शर्त तय कर दी है। इस टेस्ट को पास करने के बाद ही विद्यार्थी को भारत में डॉक्टरी करने की मान्यता मिल पाएगी। संवाद
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यूक्रेन-रूस के मध्य शुरू हुए युद्ध से वहां मेडिकल की पढ़ाई कर रहे युवाओं का भविष्य अधर में है। यूक्रेन से स्वदेश लौट चुके और वहां युद्ध में फंसे विद्यार्थियों के परिजन उनके भविष्य को लेकर काफी चिंतित हैं। अब तक यूक्रेन से लौट चुके विद्यार्थियों का कहना है कि भविष्य में अगर यूक्रेन पर रूस का कब्जा हो गया तो उनके भविष्य का क्या होगा, वह रूस पर निर्भर करता है। यदि अंतरराष्ट्रीय दबाव में आकर रूस और यूक्रेन के बीच समझौता हो गया तो क्या यूक्रेन उनकी पढ़ाई को पुरानी फीस पर ही जारी रखेगा या फिर इसमें कोई बदलाव करेगा। कुल मिलाकर यूक्रेन में पढ़ाई कर रहे विद्यार्थियों के भविष्य से जुड़े कई सवाल अनसुलझे हैं। इन विद्यार्थियों को अपना भविष्य खतरे में नजर आ रहा है।
पढ़ाई के खर्च में आ रहे अंतर की वजह से देश के विद्यार्थी मेडिकल की पढ़ाई के लिए यूक्रेन जाते हैं। हाल के वर्षों में यदि कोई विद्यार्थी देश के किसी निजी मेडिकल कॉलेज से एमबीबीएस की पढ़ाई करता है तो उसे करीब एक से डेढ़ करोड़ रुपये पूरे कोर्स का खर्चा वहन करना पड़ता है। इसके लिए पहले उसे नीट की परीक्षा भी पास करनी पड़ती है। यूक्रेन में तीन वर्ष पूर्व विज्ञान वर्ग के किसी भी विद्यार्थी को मेडिकल कॉलेज में सीधे प्रवेश मिल जाता था।
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वहां उसका एमबीबीएस की पढ़ाई पर सालाना खर्चा करीब आठ से 10 लाख रुपये आता था। यूक्रेन में उन युवाओं को भी मेडिकल में प्रवेश मिल जाता है, जिसने भारत में केवल नीट की परीक्षा में भाग लिया हो। हालांकि भारत के सरकारी संस्थानों में मेडिकल की पढ़ाई सस्ती है। अब तीन साल पहले भारत सरकार ने विदेशों में मेडिकल की पढ़ाई कर रहे विद्यार्थियों के लिए भारत में प्रैक्टिस की मान्यता के लिए एक टेस्ट पास करने की शर्त तय कर दी है। इस टेस्ट को पास करने के बाद ही विद्यार्थी को भारत में डॉक्टरी करने की मान्यता मिल पाएगी। संवाद
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