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हाथरस : पर्यटन स्थल के रूप में विकसित नहीं हो सका किला व दाऊजी मंदिर

Sun, 26 Sep 2021 11:08 PM IST
Aligarh Bureau अलीगढ़ ब्यूरो
Updated Sun, 26 Sep 2021 11:08 PM IST
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Hathras: Fort and Dauji temple could not be developed as a tourist destination
हाथरस : किला परिसर में वह टीले, जिनका निरंतर क्षरण हो रहा है। संवाद - फोटो : HATHRAS
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, हाथरस
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अंग्रेजों से हुए युद्ध के साक्षी किला राजा दयाराम और मंदिर श्रीदाऊजी महाराज को पर्यटन स्थल के रूप में विकसित करने की योजनाएं कागजों में ही दम तोड़ र्गइं। पर्यटन निगम ने इसे अपने नक्शे में तो शामिल कर लिया, लेकिन ऐसा कोई काम नहीं किया, जिससे पर्यटक यहां आ सकें। इस स्थल के 60 फीसदी भाग पर अवैध कब्जा हो चुका है। इसे हटाने के लिए भी अभी तक कुछ नहीं किया गया है।
हाथरस में एतिहासिक किला राजा दयाराम और मंदिर श्रीदाऊजी महाराज काफी पुराना इतिहास समेटे हुए है। करीब साढ़े तीन एकड़ जमीन पर फैले एक एतिहासिक स्थल को रमणीक पर्यटक स्थल बनवाने के लिए करीब ढाई दशक पूर्व वरिष्ठ अधिवक्ता हरीश शर्मा ने पैरवी की। वह इस मामले को लेकर न्यायालय भी गए। वर्ष 2004 में शासन-प्रशासन को इस बारे में निर्देशित किया गया। इसके परिणामस्वरूप पुरातत्व विभाग, पर्यटन विभाग और स्थानीय प्रशासन जागा। पुरातत्व विभाग ने चारदीवारी भी बनवाई। पर्यटन विभाग ने कई योजनाएं बनाईं। इनके लिए धनराशि आवंटित भी हुई। वहां हाईमास्क लाइटें भी लगवाई गईं। किला क्षेत्र के लिए जाने वाले मार्गों पर द्वारा भी बनाए गए। पानी की टंकी भी बनवाई गई। कुछ कमरे और शौचालय बनवाए गए।
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इन सुविधाओं का उद्देश्य वहां पर्यटक को आकर्षित करना था। बैंच भी लगाई गईं। इसके बाद शहर के मुख्य मार्गों पर साइनेज बोर्ड भी लगाए गए। इन पर संरक्षित किला राजा दयाराम स्थल की दूरी अंकित की गई। इसके बाद यूपी पर्यटन निगम यहां का विकास करना भूल गया। प्रशासन ने भी इस पर कोई ध्यान नहीं दिया। ऐसे में अतिक्रमणकारी इस पुरातन स्थल पर और ज्यादा हावी हो गए। वर्तमान में इस स्थल की 60 प्रतिशत भूमि पर अवैध कब्जा है।
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पर्यटक की दृष्टि से इस स्थल को और विकसित करने की कई योजनाएं फाइलों में दबी हैं। वरिष्ठ अधिवक्ता हरीश कुमार शर्मा का कहना है कि पर्यटन की दृष्टि से इस स्थल का कोई विकास नहीं हुआ है। शुरू में कुछ योजनाएं बनाई गईं, लेकिन हकीकत में उन पर काम नहीं हुआ। मेला श्रीदाऊजी महाराज के फंड में ही काफी धनराशि है। वह इस स्थल के विकास पर खर्च की जा सकती है। यहां से अवैध कब्जे हटवाए जाएं और इस स्थल को रमणीक बनाया जाए। संवाद
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