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हाथरस : जीत के लिए सभी दलों ने बिछाई सियासी बिसात
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न्यूज डेस्क, अमर उजाला, सिकंदराराऊ (हाथरस)
विधानसभा चुनाव के लिए 20 फरवरी को होने वाले मतदान से पहले प्रत्याशियों ने जीत की बिसात बिछाना शुरू कर दिया है। हालांकि क्षेत्र में क्षत्रिय मतदाता सर्वाधिक हैं। इसके बावजूद क्षेत्रीय जनता कई बार गैर क्षत्रिय विधायक बनाती रही है। वर्तमान में तीनों प्रमुख प्रत्याशी मतदाताओं को लुभाने के लिए हर हथकंडा आजमा रहे हैं। क्षेत्रीय जनता के जेहन में सवाल उठ रहा है कि जनता इस बार किसके सिर जीत का सेहरा बांधेगी।
बता दें कि विधानसभा क्षेत्र में करीब 3,70,000 मतदाता हैं। जातीय आंकड़ों को देखें तो इसमें सर्वाधिक करीब 90,000 मतदाता क्षत्रिय समाज के हैं। पिछड़ी और छोटी-छोटी जातियां हैं, उनमें यादव जाति के मत लगभग 45,000 और बघेल जाति के करीब 35 हजार, मुस्लिम समाज के 35 हजार के अलावा करीब 15 हजार ब्राह्मण, 15 हजार वैश्य, 12 हजार लोधी और 12 हजार कुशवाहा के अतिरिक्त प्रजापति, वाल्मीकि, कश्यप, सैनी, बंजारा, कोरी, धोबी आदि जातियां हैं। पिछले चुनाव में विधायक वीरेंद्र सिंह राना को करीब 75000 मत प्राप्त हुए थे। इसके बाद बसपा के बनी सिंह बघेल को लगभग 61,000 और समाजवादी पार्टी के क्षत्रिय प्रत्याशी यशपाल सिंह चौहान को 60,000 मत प्राप्त हुए थे। इससे पहले 2012 के चुनाव में बसपा प्रत्याशी पूर्व मंत्री रामवीर उपाध्याय को 93 हजार मत मिले थे, जबकि उनके मुकाबले सपा प्रत्याशी यशपाल सिंह चौहान को 92,000 मत प्राप्त हुए थे।
इस बार समाजवादी पार्टी ने पिछड़े वर्ग के बघेल प्रत्याशी पर दांव खेला है। इसके पीछे पार्टी की रणनीति यादव, मुस्लिम और बघेल मतों का ध्रुवीकरण कराने की है। हालांकि यहां सपा कई बार यादव और क्षत्रिय प्रत्याशी पर भी दांव खेल चुकी है, लेकिन उसको सफलता नहीं मिली। इस बार पार्टी ने बघेल जाति के प्रत्याशी पर दांव लगाया है। भाजपा के टिकट पर दोबारा चुनाव लड़ रहे विधायक वीरेंद्र सिंह राना क्षेत्र में सबसे बड़ी हैसियत रखने वाले क्षत्रिय मतदाताओं के भरोसे जीत के प्रति आश्वस्त हैं। हालांकि क्षेत्र से टिकट पाने में असफल रहे क्षेत्र के क्षत्रिय नेताओं को भाजपा के राष्ट्रीय महासचिव अरुण सिंह की मौजूदगी में मनाने का दावा किया जा रहा है।
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इसके अलावा भाजपा को ब्राह्मण, वैश्य, लोधी, कुशवाहा, अहेरिया और अन्य पिछड़ी जातियों का भी भरोसा है। सपा प्रत्याशी डॉ. ललित बघेल के चुनाव का संचालन एमएलसी जसवंत सिंह यादव के अतिरिक्त बघेल समाज के बड़े नेता कर रहे हैं। बसपा प्रत्याशी अवधेश कुमार सिंह क्षेत्र में काफी समय से धार्मिक और सामाजिक कार्यक्रमों का आयोजन कराने की वजह से काफी लोकप्रिय हैं। वह भी क्षत्रिय मतदाताओं पर अपना दावा ठोक रहे हैं, लेकिन इस क्षेत्र की सियासत ऐनवक्त पर मतदाताओं के ध्रुवीकरण के लिए मशहूर रही है। कांग्रेस भी इस बार वैश्य प्रत्याशी पर दांव खेलकर सियासी माहौल बदलने की कोशिश कर रही है। संवाद
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विधानसभा चुनाव के लिए 20 फरवरी को होने वाले मतदान से पहले प्रत्याशियों ने जीत की बिसात बिछाना शुरू कर दिया है। हालांकि क्षेत्र में क्षत्रिय मतदाता सर्वाधिक हैं। इसके बावजूद क्षेत्रीय जनता कई बार गैर क्षत्रिय विधायक बनाती रही है। वर्तमान में तीनों प्रमुख प्रत्याशी मतदाताओं को लुभाने के लिए हर हथकंडा आजमा रहे हैं। क्षेत्रीय जनता के जेहन में सवाल उठ रहा है कि जनता इस बार किसके सिर जीत का सेहरा बांधेगी।
बता दें कि विधानसभा क्षेत्र में करीब 3,70,000 मतदाता हैं। जातीय आंकड़ों को देखें तो इसमें सर्वाधिक करीब 90,000 मतदाता क्षत्रिय समाज के हैं। पिछड़ी और छोटी-छोटी जातियां हैं, उनमें यादव जाति के मत लगभग 45,000 और बघेल जाति के करीब 35 हजार, मुस्लिम समाज के 35 हजार के अलावा करीब 15 हजार ब्राह्मण, 15 हजार वैश्य, 12 हजार लोधी और 12 हजार कुशवाहा के अतिरिक्त प्रजापति, वाल्मीकि, कश्यप, सैनी, बंजारा, कोरी, धोबी आदि जातियां हैं। पिछले चुनाव में विधायक वीरेंद्र सिंह राना को करीब 75000 मत प्राप्त हुए थे। इसके बाद बसपा के बनी सिंह बघेल को लगभग 61,000 और समाजवादी पार्टी के क्षत्रिय प्रत्याशी यशपाल सिंह चौहान को 60,000 मत प्राप्त हुए थे। इससे पहले 2012 के चुनाव में बसपा प्रत्याशी पूर्व मंत्री रामवीर उपाध्याय को 93 हजार मत मिले थे, जबकि उनके मुकाबले सपा प्रत्याशी यशपाल सिंह चौहान को 92,000 मत प्राप्त हुए थे।
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इस बार समाजवादी पार्टी ने पिछड़े वर्ग के बघेल प्रत्याशी पर दांव खेला है। इसके पीछे पार्टी की रणनीति यादव, मुस्लिम और बघेल मतों का ध्रुवीकरण कराने की है। हालांकि यहां सपा कई बार यादव और क्षत्रिय प्रत्याशी पर भी दांव खेल चुकी है, लेकिन उसको सफलता नहीं मिली। इस बार पार्टी ने बघेल जाति के प्रत्याशी पर दांव लगाया है। भाजपा के टिकट पर दोबारा चुनाव लड़ रहे विधायक वीरेंद्र सिंह राना क्षेत्र में सबसे बड़ी हैसियत रखने वाले क्षत्रिय मतदाताओं के भरोसे जीत के प्रति आश्वस्त हैं। हालांकि क्षेत्र से टिकट पाने में असफल रहे क्षेत्र के क्षत्रिय नेताओं को भाजपा के राष्ट्रीय महासचिव अरुण सिंह की मौजूदगी में मनाने का दावा किया जा रहा है।
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इसके अलावा भाजपा को ब्राह्मण, वैश्य, लोधी, कुशवाहा, अहेरिया और अन्य पिछड़ी जातियों का भी भरोसा है। सपा प्रत्याशी डॉ. ललित बघेल के चुनाव का संचालन एमएलसी जसवंत सिंह यादव के अतिरिक्त बघेल समाज के बड़े नेता कर रहे हैं। बसपा प्रत्याशी अवधेश कुमार सिंह क्षेत्र में काफी समय से धार्मिक और सामाजिक कार्यक्रमों का आयोजन कराने की वजह से काफी लोकप्रिय हैं। वह भी क्षत्रिय मतदाताओं पर अपना दावा ठोक रहे हैं, लेकिन इस क्षेत्र की सियासत ऐनवक्त पर मतदाताओं के ध्रुवीकरण के लिए मशहूर रही है। कांग्रेस भी इस बार वैश्य प्रत्याशी पर दांव खेलकर सियासी माहौल बदलने की कोशिश कर रही है। संवाद