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हाथरस : हिंदी की मजबूती के लिए सभी को एक मंच पर आना होगा
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हाथरस : रजनी वर्मा, शिक्षिका। संवाद
- फोटो : HATHRAS
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, हाथरस
हिंदी भाषा के प्रचार और इसकी मजबूती के लिए सभी को एक मंच पर आना होगा। हिंदी के माध्यम से रोजगार के साधन सुलभ करने होंगे। तभी युवा अपनी मातृ भाषा से जुड़ सकेंगे। शहर के शिक्षकों का कहना है कि हिंदी अनुभूति की भाषा है। भारत का प्राण हिंदी है।
हिंदी ऐसी भाषा है, जिसे दिल से बोला जाता है और अंग्रेजी भाषा मजबूरी में बोली जाती है। हम सभी को एकजुट होकर अपनी मातृभाषा के प्रचार-प्रसार के लिए ठोस योजना बनानी होगी। हिंदी आमजन की भाषा है। अब कुछ समय से लोग हिंदी में बात करने करने पर गर्व महसूस करने लगे हैं।
-प्रशंसा कौशिक शिक्षिका
हिंदी का वर्चस्व तो बढ़ा है, लेकिन यह सीमित नहीं रहना चाहिए। इसके लिए सभी को आगे आना होगा। हिंदी के माध्यम से रोजगार के साधन सुलभ करने होंगे। बहुराष्ट्रीय कंपनियों में अंग्रेजी भाषा में बोलचाल का चलन है। हिंदी को प्रत्येक कार्यस्थल पर अनिवार्य करना होगा। तभी भाषा का उत्थान संभव है।
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-रजनी वर्मा, शिक्षिका
हिंदी अनुभूति की भाषा है। हिंदी में हम किसी भी विषय को बहुत ही सरलता से दूसरे व्यक्ति को समझा सकते हैं। हिंदी से दूरी नहीं बनानी चाहिए। जरूरी है कि हिंदी के प्रति युवाओं को आकर्षित किया जाए। हिंदी की मजबूती के लिए वर्तमान में सामूहिक प्रयास की जरूरत है।
-पुष्पेंद्र कुमार शिक्षक।
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हिंदी भाषा के प्रचार और इसकी मजबूती के लिए सभी को एक मंच पर आना होगा। हिंदी के माध्यम से रोजगार के साधन सुलभ करने होंगे। तभी युवा अपनी मातृ भाषा से जुड़ सकेंगे। शहर के शिक्षकों का कहना है कि हिंदी अनुभूति की भाषा है। भारत का प्राण हिंदी है।
हिंदी ऐसी भाषा है, जिसे दिल से बोला जाता है और अंग्रेजी भाषा मजबूरी में बोली जाती है। हम सभी को एकजुट होकर अपनी मातृभाषा के प्रचार-प्रसार के लिए ठोस योजना बनानी होगी। हिंदी आमजन की भाषा है। अब कुछ समय से लोग हिंदी में बात करने करने पर गर्व महसूस करने लगे हैं।
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-प्रशंसा कौशिक शिक्षिका
हिंदी का वर्चस्व तो बढ़ा है, लेकिन यह सीमित नहीं रहना चाहिए। इसके लिए सभी को आगे आना होगा। हिंदी के माध्यम से रोजगार के साधन सुलभ करने होंगे। बहुराष्ट्रीय कंपनियों में अंग्रेजी भाषा में बोलचाल का चलन है। हिंदी को प्रत्येक कार्यस्थल पर अनिवार्य करना होगा। तभी भाषा का उत्थान संभव है।
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-रजनी वर्मा, शिक्षिका
हिंदी अनुभूति की भाषा है। हिंदी में हम किसी भी विषय को बहुत ही सरलता से दूसरे व्यक्ति को समझा सकते हैं। हिंदी से दूरी नहीं बनानी चाहिए। जरूरी है कि हिंदी के प्रति युवाओं को आकर्षित किया जाए। हिंदी की मजबूती के लिए वर्तमान में सामूहिक प्रयास की जरूरत है।
-पुष्पेंद्र कुमार शिक्षक।

हाथरस : प्रशंशा कौशिक, शिक्षिका। संवाद- फोटो : HATHRAS

हाथरस : पुष्पेंद्र कुमार, शिक्षक। संवाद- फोटो : HATHRAS