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हाथरस : महंगाई की मार से फुस्स न हो जाए आतिशबाजी का कारोबार
सार
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, हाथरसदिवाली के त्योहार के खास आयटम आतिशबाजी पर महंगाई की काली छाया मंडरा रही है।इस कारण शिवकाशी में आतिशबाजी का उत्पादन कम हुआ है।
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हाथरस : हाथरस के गोदाम में रखी आतिशबाजी। संवाद
- फोटो : HATHRAS
विस्तार
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, हाथरस
दिवाली के त्योहार के खास आयटम आतिशबाजी पर महंगाई की काली छाया मंडरा रही है। बनाने में प्रयोग होने वाले रसायनों के दाम बढ़ने से इस बार आतिशबाजी के दामों में पिछले साल की अपेक्षा 30 से 40 फीसदी का इजाफा हुआ है। इस बार शिवकाशी से माल की आपूर्ति भी कम हुई है। हालांकि कोरोना का असर न होने के कारण कारोबारी इस बार कारोबार अच्छा होने की उम्मीद जता रहे हैं।
गौरतलब है कि जिले में हर साल दिवाली के मौके पर करोड़ों रुपये का आतिशबाजी का कारोबार होता है। यहां के बड़े कारोबारी यहां तमिलनाडु के शिवकाशी से आतिशबाजी लाते हैं। आतिशबाजी में कलमी सोडा, नाइट एसिड जैसे रसायनों का प्रयोग होता है। जो सोडा पिछले साल 42 रुपये था, उसके दाम वर्तमान में 100 रुपये प्रति किलो तक पहुंच गए हैं।
इसके अलावा अन्य आतिशबाजी बनाने वाले कुछ अन्य रसायनों के भी दाम बढ़ गए हैं। कुल मिलाकर रसायनों के दाम दुगने हो गए हैं। आतिशबाजी के बनाने में प्रयोग होने वाला बोर्ड का कागज भी महंगा हो गया है। इस कारण आतिशबाजी के दामों में 30 से 40 फीसदी का इजाफा हुआ है। संवाद
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बैरियम से नहीं आती आतिशबाजी में सील
आतिशबाजी बनाने में बैरियम का प्रयोग होता था। बैरियम को प्रतिबंधित कर दिया गया है। इस कारण शिवकाशी में आतिशबाजी कम बनाई गई है। बैरियम आतिशबाजी को सीलन से बचाता है। कारोबारियों का कहना है कि कारखानों में माल तैयार होने के बाद बाजार तक पहुंचने में दो माह का समय लगता है। बैरियम लगा होने से पटाखा सीलता नहीं है। इस बार बैरियम का प्रयोग नहीं किया गया है, इसलिए आतिशबाजी के सीलने का डर रहा है, इसलिए शिवकाशी में पटाखों का उत्पादन कम हुआ है।
ये हैंआतिशबाजी के प्रति पैकेट के रेट
रॉकेट पहले 100 रुपये का था, इस बार 140 रुपये।
अनार पहले 80 रुपये का था, इस बार 130 रुपये।
चकरी पहले साठ रुपये की थी, अब 100 रुपये की।
फुलझड़ी पहले 20 रुपये की थी, अब 30 रुपये।
चटाई पहले आठ रुपये की थी, अब 15 रुपये।
30 शॉट पहले चार सौ रुपये का था, इस बार 600 रुपये
12 स्टार शॉट पहले सौ रुपये का था, इस बार 150 रुपये का।
सुतली बम पहले 40 रुपये का था, इस बार 70 रुपये का।
कारोबारियों के बोल
आतिशबाजी में प्रयोग होने वाले रसायन के दाम दोगुने हो गए हैं। इस कारण आतिशबाजी के रेट पिछले साल की अपेक्षा 30 से 40 प्रतिशत बढ़े हुए हैं। इस कारण शिवकाशी में आतिशबाजी का उत्पादन कम हुआ है। ऐसे में आतिशबाजी इस बार मंहगी बिकेगी।
-अनुभव अग्रवाल, कारोबारी
आतिशबाजी में कलमी सोडा और नाइट एसिड जैसे रसायनों का प्रयोग होता है। इस बार रसायन के दाम दुगने हो गए हैं। इस कारण आतिशबाजी के दाम पिछले साल से ज्यादा हैं। हालांकि लोगों को दिवाली पर्व को लेकर उत्साह है। उम्मीद है कि कारोबार अच्छा होगा।
-अनुज भार्गव, कारोबारी
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दिवाली के त्योहार के खास आयटम आतिशबाजी पर महंगाई की काली छाया मंडरा रही है। बनाने में प्रयोग होने वाले रसायनों के दाम बढ़ने से इस बार आतिशबाजी के दामों में पिछले साल की अपेक्षा 30 से 40 फीसदी का इजाफा हुआ है। इस बार शिवकाशी से माल की आपूर्ति भी कम हुई है। हालांकि कोरोना का असर न होने के कारण कारोबारी इस बार कारोबार अच्छा होने की उम्मीद जता रहे हैं।
गौरतलब है कि जिले में हर साल दिवाली के मौके पर करोड़ों रुपये का आतिशबाजी का कारोबार होता है। यहां के बड़े कारोबारी यहां तमिलनाडु के शिवकाशी से आतिशबाजी लाते हैं। आतिशबाजी में कलमी सोडा, नाइट एसिड जैसे रसायनों का प्रयोग होता है। जो सोडा पिछले साल 42 रुपये था, उसके दाम वर्तमान में 100 रुपये प्रति किलो तक पहुंच गए हैं।
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इसके अलावा अन्य आतिशबाजी बनाने वाले कुछ अन्य रसायनों के भी दाम बढ़ गए हैं। कुल मिलाकर रसायनों के दाम दुगने हो गए हैं। आतिशबाजी के बनाने में प्रयोग होने वाला बोर्ड का कागज भी महंगा हो गया है। इस कारण आतिशबाजी के दामों में 30 से 40 फीसदी का इजाफा हुआ है। संवाद
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बैरियम से नहीं आती आतिशबाजी में सील
आतिशबाजी बनाने में बैरियम का प्रयोग होता था। बैरियम को प्रतिबंधित कर दिया गया है। इस कारण शिवकाशी में आतिशबाजी कम बनाई गई है। बैरियम आतिशबाजी को सीलन से बचाता है। कारोबारियों का कहना है कि कारखानों में माल तैयार होने के बाद बाजार तक पहुंचने में दो माह का समय लगता है। बैरियम लगा होने से पटाखा सीलता नहीं है। इस बार बैरियम का प्रयोग नहीं किया गया है, इसलिए आतिशबाजी के सीलने का डर रहा है, इसलिए शिवकाशी में पटाखों का उत्पादन कम हुआ है।
ये हैंआतिशबाजी के प्रति पैकेट के रेट
रॉकेट पहले 100 रुपये का था, इस बार 140 रुपये।
अनार पहले 80 रुपये का था, इस बार 130 रुपये।
चकरी पहले साठ रुपये की थी, अब 100 रुपये की।
फुलझड़ी पहले 20 रुपये की थी, अब 30 रुपये।
चटाई पहले आठ रुपये की थी, अब 15 रुपये।
30 शॉट पहले चार सौ रुपये का था, इस बार 600 रुपये
12 स्टार शॉट पहले सौ रुपये का था, इस बार 150 रुपये का।
सुतली बम पहले 40 रुपये का था, इस बार 70 रुपये का।
कारोबारियों के बोल
आतिशबाजी में प्रयोग होने वाले रसायन के दाम दोगुने हो गए हैं। इस कारण आतिशबाजी के रेट पिछले साल की अपेक्षा 30 से 40 प्रतिशत बढ़े हुए हैं। इस कारण शिवकाशी में आतिशबाजी का उत्पादन कम हुआ है। ऐसे में आतिशबाजी इस बार मंहगी बिकेगी।
-अनुभव अग्रवाल, कारोबारी
आतिशबाजी में कलमी सोडा और नाइट एसिड जैसे रसायनों का प्रयोग होता है। इस बार रसायन के दाम दुगने हो गए हैं। इस कारण आतिशबाजी के दाम पिछले साल से ज्यादा हैं। हालांकि लोगों को दिवाली पर्व को लेकर उत्साह है। उम्मीद है कि कारोबार अच्छा होगा।
-अनुज भार्गव, कारोबारी