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हाथरस : मानसून से पहले धान की पौध तैयार करने में जुटे किसान
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न्यूज डेस्क, अमर उजाला, हाथरस
समय से पहले मानसून की आहट होते ही क्षेत्र के किसानों ने धान की नर्सरी की तैयारी शुरू कर दी है। बीज विक्रेताओं की दुकानों पर किसानों की भीड़ देखी जा रही है। पौध तैयार होते ही धान की रोपाई शुरू हो जाएगी। कृषि विभाग भी 50 फीसदी छूट पर किसानों को दो वेरायटी की बीजें उपलब्ध करा रहा है।
किसानों को मानसून की बारिश अच्छी होने की उम्मीद अभी से दिखने लगी है। मौसम के रुख को भांप कर किसान धान की पैदावार करने के लिए अभी से सक्रिय हो गए है। कुछ किसानों ने सिंचाई संसाधन मौजूद होने पर मई के अंत में ही धान की पौध तैयार करना शुरू कर दिया है। गांव पिलखुनियां के किसान गौरीशंकर वर्मा ने बताया कि धान की रोपाई समय से हो जाने पर अच्छी फसल उपज होने की संभावना रहती है। इन दिनों बाजार में विभिन्न प्रजातियों के बीज दुकानदारों द्वारा बेचा जा रहा है।
गांव खेड़ा बरामई निवासी विनोद कुमार का कहना है कि अच्छे किस्म के धान के नाम पर किसानों से दुकानदारों द्वारा अच्छी रकम वसूली जा रही है। मनीपुर निवासी तोफर सिंह का कहना है कि महंगाई के चलते किसान बीज-खाद की खरीदारी को लेकर काफी परेशान हैं। उधर सरकारी गोदामों से समय पर खाद, बीज भी नहीं मिल पा रहा है। संवाद
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नर्सरी तैयार करने से पहले बीज शोधन है जरूरी
खरीफ सीजन के तहत धान की खेती करने की तैयारियों में किसान जुट गए हैं। इसे लेकर धान की नर्सरी बनाने के उद्देश्य से खेतों को तैयार करना शुरू कर दी हैं। किसान नर्सरी बनाने के लिए अच्छे बीजों का चयन करें। जिसके तहत नर्सरी के लिए केवल पुष्ट बीजों का ही चयन करना चाहिए। वहीं इन बीजों को अच्छी तरह से शोधन यानी उन्हें खेती के लिए शुद्ध करें। इससे नर्सरी में उनकी बेहतर तैयारी होगी, जो कीटों से बचने में सक्षम होगी और उत्पादन भी बेहतर देगा।
शोधन के तहत ऐसे करें स्वस्थ बीजों की पहचान
धान की नर्सरी तैयार करने वाले किसानों के लिए सबसे पहले बीज शोधन जरूरी है। इसी बीज शोधन की सबसे प्रारंभिक प्रक्रिया स्वस्थ्य बीजों की पहचान है। असल में बीज शोधन के तहत सबसे पहले किसानों को स्वस्थ्य बीजों की पहचान करनी होती है। जिसके तहत किसानों को नर्सरी के लिए चयनित बीजों को नमक के घोल में डालना होता है। इसके लिए किसान 10 लीटर पानी में 1.7 किलो सामान्य नमक डालकर घोल बना सकते हैं, जिसमें बीजों को हिलाकर डालना होता है। थोड़ी देर तक इस प्रक्रिया को करने के बाद भारी बीज नीचे बैठ जाते हैं, जबकि हल्के बीच पानी में तैरने लगते हैं। किसानों को तैर रहे बीजों का प्रयोग नहीं करना है, जबकि भारी बीजों को साफ पानी में धोकर और फिर उन्हें छाया में सुखाकर नर्सरी के लिए उनका प्रयोग करना है।
कीटनाशकों से बचाव के लिए ऐसे करें बीज शोधन
कृषि वैज्ञानिक डॉ. एसआर सिंह ने बताया कि नमक के घोल में धान के बीजों को शोधित करने के बाद किसानों को कीटों से बचाव के लिए कीटनाशक से बीजों का शोधन करना होता है। इसके लिए प्रतिकिलो बीज को 2.5 ग्राम कार्बेन्डाजिम से उपचारित करने की जरूरत होती है। इसके लिए भी घोल बनाया जाता है। जिसमें बीजों को डाल कर उन्हें उपचारित किया जाता है। बीज शोधन की अधिक जानकारी किसान कृषि विज्ञान केंद्र आकर प्राप्त कर सकते हैं।
- उप संभागीय कृषि अधिकारी सीपी शर्मा ने बताया कि किसान भाई सरकारी गोदामों से धान की पौध तैयार करने के लिए बीज प्राप्त कर सकते हैं। धान की दो वैरायटी का बीज 50 फीसदी छूट पर उपलब्ध है। जिसमें पूसा 1509 और पूसा 1718 शामिल है।
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समय से पहले मानसून की आहट होते ही क्षेत्र के किसानों ने धान की नर्सरी की तैयारी शुरू कर दी है। बीज विक्रेताओं की दुकानों पर किसानों की भीड़ देखी जा रही है। पौध तैयार होते ही धान की रोपाई शुरू हो जाएगी। कृषि विभाग भी 50 फीसदी छूट पर किसानों को दो वेरायटी की बीजें उपलब्ध करा रहा है।
किसानों को मानसून की बारिश अच्छी होने की उम्मीद अभी से दिखने लगी है। मौसम के रुख को भांप कर किसान धान की पैदावार करने के लिए अभी से सक्रिय हो गए है। कुछ किसानों ने सिंचाई संसाधन मौजूद होने पर मई के अंत में ही धान की पौध तैयार करना शुरू कर दिया है। गांव पिलखुनियां के किसान गौरीशंकर वर्मा ने बताया कि धान की रोपाई समय से हो जाने पर अच्छी फसल उपज होने की संभावना रहती है। इन दिनों बाजार में विभिन्न प्रजातियों के बीज दुकानदारों द्वारा बेचा जा रहा है।
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गांव खेड़ा बरामई निवासी विनोद कुमार का कहना है कि अच्छे किस्म के धान के नाम पर किसानों से दुकानदारों द्वारा अच्छी रकम वसूली जा रही है। मनीपुर निवासी तोफर सिंह का कहना है कि महंगाई के चलते किसान बीज-खाद की खरीदारी को लेकर काफी परेशान हैं। उधर सरकारी गोदामों से समय पर खाद, बीज भी नहीं मिल पा रहा है। संवाद
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नर्सरी तैयार करने से पहले बीज शोधन है जरूरी
खरीफ सीजन के तहत धान की खेती करने की तैयारियों में किसान जुट गए हैं। इसे लेकर धान की नर्सरी बनाने के उद्देश्य से खेतों को तैयार करना शुरू कर दी हैं। किसान नर्सरी बनाने के लिए अच्छे बीजों का चयन करें। जिसके तहत नर्सरी के लिए केवल पुष्ट बीजों का ही चयन करना चाहिए। वहीं इन बीजों को अच्छी तरह से शोधन यानी उन्हें खेती के लिए शुद्ध करें। इससे नर्सरी में उनकी बेहतर तैयारी होगी, जो कीटों से बचने में सक्षम होगी और उत्पादन भी बेहतर देगा।
शोधन के तहत ऐसे करें स्वस्थ बीजों की पहचान
धान की नर्सरी तैयार करने वाले किसानों के लिए सबसे पहले बीज शोधन जरूरी है। इसी बीज शोधन की सबसे प्रारंभिक प्रक्रिया स्वस्थ्य बीजों की पहचान है। असल में बीज शोधन के तहत सबसे पहले किसानों को स्वस्थ्य बीजों की पहचान करनी होती है। जिसके तहत किसानों को नर्सरी के लिए चयनित बीजों को नमक के घोल में डालना होता है। इसके लिए किसान 10 लीटर पानी में 1.7 किलो सामान्य नमक डालकर घोल बना सकते हैं, जिसमें बीजों को हिलाकर डालना होता है। थोड़ी देर तक इस प्रक्रिया को करने के बाद भारी बीज नीचे बैठ जाते हैं, जबकि हल्के बीच पानी में तैरने लगते हैं। किसानों को तैर रहे बीजों का प्रयोग नहीं करना है, जबकि भारी बीजों को साफ पानी में धोकर और फिर उन्हें छाया में सुखाकर नर्सरी के लिए उनका प्रयोग करना है।
कीटनाशकों से बचाव के लिए ऐसे करें बीज शोधन
कृषि वैज्ञानिक डॉ. एसआर सिंह ने बताया कि नमक के घोल में धान के बीजों को शोधित करने के बाद किसानों को कीटों से बचाव के लिए कीटनाशक से बीजों का शोधन करना होता है। इसके लिए प्रतिकिलो बीज को 2.5 ग्राम कार्बेन्डाजिम से उपचारित करने की जरूरत होती है। इसके लिए भी घोल बनाया जाता है। जिसमें बीजों को डाल कर उन्हें उपचारित किया जाता है। बीज शोधन की अधिक जानकारी किसान कृषि विज्ञान केंद्र आकर प्राप्त कर सकते हैं।
- उप संभागीय कृषि अधिकारी सीपी शर्मा ने बताया कि किसान भाई सरकारी गोदामों से धान की पौध तैयार करने के लिए बीज प्राप्त कर सकते हैं। धान की दो वैरायटी का बीज 50 फीसदी छूट पर उपलब्ध है। जिसमें पूसा 1509 और पूसा 1718 शामिल है।