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हाथरस : गर्भवती महिलाओं और बच्चों के लिए के लिए वरदान है सहजन
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न्यूज डेस्क, अमर उजाला, हाथरस
सहजन का नाम तो सभी ने सुना ही होगा, लेकिन, इसके इसके लाभकारी गुणों से कम ही लोग परिचित होंगे। गर्भवती महिलाओं व कम आयु के बच्चों के लिए यह वरदान है। इसमें कार्बोहाईड्रेड, प्रोटीन, कैल्शियम, पोटैशियम, आयरन, मैग्नीशियम, विटामिन-ए, सी और बी कांपलेक्स प्रचुर मात्रा में पाया जाता है। जिला कार्यक्रम अधिकारी डीके सिंह ने बताया कि सहजन खाने से दिमाग का विकास होता है। खून की कमी भी नहीं होती है।
डीपीओ ने बताया कि इससे रोग प्रतिरोधक क्षमता बढ़ती है, सर्दी, खांसी, फ्लू आदि से बचाता है, हड्डियां मजबूत होती हैं। गर्भावस्था, धात्री व बच्चों में कुपोषण की समस्या को दूर करने के लिए सहजन व इसकी पत्तियां अत्यंत लाभकारी होती हैं।
जिला महिला अस्पताल के चिकित्सा अधीक्षक डॉ. रूपेंद्र गोयल बताते हैं कि गर्भवती, धात्री महिलाओं व कम आयु के बच्चों को पोषक तत्वों की जरूरत एक सामान्य व्यक्ति से कहीं ज्यादा होती है। इस अवस्था में यदि सहजन का उपयोग दैनिक आहार में किया जाए तो मां व गर्भ में पल रहे बच्चे का विकास होगा। सहजन के सेवन से नर्वस सिस्टम में सुधार होता है।
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डॉ. गोयल ने बताया कि जन्म के एक घंटे के अंदर बच्चे को मां का दूध पिलाना शुरू करके छह माह तक केवल मां का दूध देना है। छह माह के बाद बच्चे को धीरे-धीरे ऊपरी आहार की शुरुआत करनी चाहिए। प्रारंभ में बच्चे को अच्छे से मसला हुआ दाल चावल, आलू, खिचड़ी, सूजी की खीर, अच्छे से मसले हुए फल दिए जाने चाहिए और धीरे धीरे भोजन की मात्रा और गरिष्ठता बढ़ाते जाना चाहिए। संवाद
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सहजन का नाम तो सभी ने सुना ही होगा, लेकिन, इसके इसके लाभकारी गुणों से कम ही लोग परिचित होंगे। गर्भवती महिलाओं व कम आयु के बच्चों के लिए यह वरदान है। इसमें कार्बोहाईड्रेड, प्रोटीन, कैल्शियम, पोटैशियम, आयरन, मैग्नीशियम, विटामिन-ए, सी और बी कांपलेक्स प्रचुर मात्रा में पाया जाता है। जिला कार्यक्रम अधिकारी डीके सिंह ने बताया कि सहजन खाने से दिमाग का विकास होता है। खून की कमी भी नहीं होती है।
डीपीओ ने बताया कि इससे रोग प्रतिरोधक क्षमता बढ़ती है, सर्दी, खांसी, फ्लू आदि से बचाता है, हड्डियां मजबूत होती हैं। गर्भावस्था, धात्री व बच्चों में कुपोषण की समस्या को दूर करने के लिए सहजन व इसकी पत्तियां अत्यंत लाभकारी होती हैं।
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जिला महिला अस्पताल के चिकित्सा अधीक्षक डॉ. रूपेंद्र गोयल बताते हैं कि गर्भवती, धात्री महिलाओं व कम आयु के बच्चों को पोषक तत्वों की जरूरत एक सामान्य व्यक्ति से कहीं ज्यादा होती है। इस अवस्था में यदि सहजन का उपयोग दैनिक आहार में किया जाए तो मां व गर्भ में पल रहे बच्चे का विकास होगा। सहजन के सेवन से नर्वस सिस्टम में सुधार होता है।
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डॉ. गोयल ने बताया कि जन्म के एक घंटे के अंदर बच्चे को मां का दूध पिलाना शुरू करके छह माह तक केवल मां का दूध देना है। छह माह के बाद बच्चे को धीरे-धीरे ऊपरी आहार की शुरुआत करनी चाहिए। प्रारंभ में बच्चे को अच्छे से मसला हुआ दाल चावल, आलू, खिचड़ी, सूजी की खीर, अच्छे से मसले हुए फल दिए जाने चाहिए और धीरे धीरे भोजन की मात्रा और गरिष्ठता बढ़ाते जाना चाहिए। संवाद