{"_id":"5dfe69a08ebc3e87b75ca397","slug":"hathras-do-not-violate-the-citizenship-amendment-act-dm-hathras-news-ali222051377","type":"story","status":"publish","title_hn":"हाथरस: नागरिकता संशोधन अधिनियम का न करें उल्लंघन: डीएम","category":{"title":"City & states","title_hn":"शहर और राज्य","slug":"city-and-states"}}
हाथरस: नागरिकता संशोधन अधिनियम का न करें उल्लंघन: डीएम
विज्ञापन
नागरिकता संशोधन कानून पर गलतफहमी न पालें: डीएम
डीएम ने की शांति व्यवस्था बनाए रखने की अपील
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, हाथरस
हाथरस। डीएम प्रवीण कुमार लक्षकार ने सभी जनपद वासियों से अपील की है कि नागरिकता संशोधन अधिनियम 2019 का उल्लंघन नहीं करें। उन्होंने बताया कि यह कानून सिर्फ नागरिकता देने के लिए है। किसी की नागरिकता छीनने का अधिकार इस कानून में नहीं है।
उन्होंने बताया कि भारत के अल्पसंख्यकों विशेषकर मुसलमानों का सीएए से कोई अहित नहीं है। सीएए से देश के नागरिकों की नागरिकता पर कोई प्रभाव नहीं पड़ेगा। यह कानून किसी भी भारतीय हिंदू और मुसलमान को प्रभावित नहीं करेगा। अधिनियम के तहत पाकिस्तान, अफगानिस्तान और बांग्लादेश में धार्मिक उत्पीड़न के कारण वहां से आए हिंदू, ईसाई, सिख, पारसी, जैन और बौद्ध धर्म को मानने वाले शरणार्थियों को भारत की नागरिकता दी जाएगी।
31 दिसंबर 2014 से पूर्व ही भारत में रह रहे हों तथा जो केवल इन तीन देशों से धर्म के आधार पर प्रताड़ित किए गए हों। अभी तक भारतीय नागरिकता लेने के लिए 11 साल भारत में रहना अनिवार्य था। यह कानून केवल उन लोगों के लिए है, जिन्होंने वर्षों से बाहर उत्पीड़न का सामना किया और उनके पास भारत आने के अलावा और कोई जगह नहीं है।
विज्ञापन
विज्ञापन
डीएम ने की शांति व्यवस्था बनाए रखने की अपील
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, हाथरस
हाथरस। डीएम प्रवीण कुमार लक्षकार ने सभी जनपद वासियों से अपील की है कि नागरिकता संशोधन अधिनियम 2019 का उल्लंघन नहीं करें। उन्होंने बताया कि यह कानून सिर्फ नागरिकता देने के लिए है। किसी की नागरिकता छीनने का अधिकार इस कानून में नहीं है।
उन्होंने बताया कि भारत के अल्पसंख्यकों विशेषकर मुसलमानों का सीएए से कोई अहित नहीं है। सीएए से देश के नागरिकों की नागरिकता पर कोई प्रभाव नहीं पड़ेगा। यह कानून किसी भी भारतीय हिंदू और मुसलमान को प्रभावित नहीं करेगा। अधिनियम के तहत पाकिस्तान, अफगानिस्तान और बांग्लादेश में धार्मिक उत्पीड़न के कारण वहां से आए हिंदू, ईसाई, सिख, पारसी, जैन और बौद्ध धर्म को मानने वाले शरणार्थियों को भारत की नागरिकता दी जाएगी।
विज्ञापन
31 दिसंबर 2014 से पूर्व ही भारत में रह रहे हों तथा जो केवल इन तीन देशों से धर्म के आधार पर प्रताड़ित किए गए हों। अभी तक भारतीय नागरिकता लेने के लिए 11 साल भारत में रहना अनिवार्य था। यह कानून केवल उन लोगों के लिए है, जिन्होंने वर्षों से बाहर उत्पीड़न का सामना किया और उनके पास भारत आने के अलावा और कोई जगह नहीं है।
विज्ञापन