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हाथरस : किशोरी से दुष्कर्म में चार लोगों को कोर्ट ने सुनाई दस-दस साल कैद की सजा

Wed, 16 Feb 2022 12:36 AM IST
Aligarh Bureau अलीगढ़ ब्यूरो
Updated Wed, 16 Feb 2022 12:36 AM IST
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Hathras: Court sentenced four people to ten years' imprisonment for raping a teenager
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, हाथरस
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न्यायालय ने एक किशोरी के चाचा-चाची और उसकी चचेरी बहन सहित चार दोषियों को अपहरण और दुष्कर्म के मामले में दस-दस साल कैद की सजा सुनाई है। इस किशोरी को एक युवक बहला-फुसलाकर ले गया था और उसके साथ दुष्कर्म किया था। इसमें इस युवक की मदद किशोरी के चाचा-चाचा व चचेरी बहन ने की थी। न्यायालय ने दोषियों को अर्थदंड की सजा भी सुनाई है। अर्थदंड न देने पर दोषियों को अतिरिक्त कारावास भोगना होगा।
सिकंदराराऊ थाना क्षेत्र के एक गांव से 15 वर्षीय एक किशोरी को एक युवक 16 नवंबर 2014 को बहला-फुसलाकर ले गया था। इस युवक की मदद इस किशोरी के चाचा, चाची और चचेरी बहन के अलावा हसरुद्दीन ने की थी। इस मामले में सिकंदराराऊ पुलिस ने विवेचना की और मुकदमा दर्ज किया। बाद में पुुलिस ने इस किशोरी को बरामद कर लिया। इस मामले में पीड़िता ने विवेचक को बताया कि उसे साजिद उर्फ शाहिद ले गया था और उसने उसे 15 दिन तक अपने साथ रखकर दुष्कर्म किया। न्यायालय में पीड़िता के बयान दर्ज हुए और विवेचक ने पांच अभियुक्तों के विरुद्ध आरोपपत्र दाखिल कर दिया। मुकदमा विचारण के दौरान एक अभियुक्त हसरुद्दीन की मृत्यु हो गई। कोर्ट ने उसके विरुद्ध कार्यवाही उपशमित कर दी।
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इस मामले की सुनवाई विशेष न्यायाधीश (पोक्सो अधिनियम) प्रतिभा सक्सेना के न्यायालय में हुई। कोर्ट ने दोनों पक्षों की दलीलें सुनने के उपरांत चारों अभियुक्तों को दोषी माना। कोर्ट ने सभी अभियुक्तों को 10-10 वर्ष के सश्रम कारावास की सजा सुनाई है और अर्थदंड भी लगाया है। अर्थदंड न देने पर अतिरिक्त कारावास भोगना होगा। अर्थदंड की धनराशि पीड़िता की पहचान सुनिश्चित करके नियमानुसार दी जाएगी। अभियोजन पक्ष की ओर से पैरवी एडीजीसी केके शर्मा ने की। संवाद
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तो समाज में धार्मिक वैमनस्य की भावना विकसित होगी : कोर्ट
हाथरस। विशेष न्यायाधीश पोक्सो अधिनियम प्रतिभा सक्सेना ने अपने आदेश में कहा है कि यदि अभियुक्तगण के साथ न्यायालय द्वारा किसी भी प्रकार की उदारता और सहानुभूति का दृष्टिकोण अपनाया गया तो समाज में धार्मिक वैमनस्य की भावना उत्पन्न होगी और दूसरी ओर कोई भी अवयस्क बच्ची अपने ही परिवारीजनों पर भरोसा करने की स्थिति में नहीं होगी। होली, दीपावली, ईद और क्रिसमस भारत देश के वह त्योहार हैं, जो भले ही किसी एक धर्म विशेष से संबंधित हों, किंतु उसे भारत के सभी नागरिक परस्पर सौहार्द और राष्ट्रीयता के रंग मेें रंगकर आपसी प्रेम और मेल-मिलाप के साथ मनाते हैं। यदि किसी धर्म विशेष की अवयस्क बच्ची के साथ किसी अन्य धर्म विशेष के त्योहार पर परस्पर सौहार्दवश मिलने जाने के समय यदि अपहरण और दुष्कर्म का अपराध कारित होता है तो इससे कोई भी समुदाय विशेष किसी दूसरे समुदाय विशेष के त्योहार पर न तो अपने बच्चों को भेजेगा और न ही भविष्य के लिए ऐसी परंपरा विकसित होगी।
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