{"_id":"5ef4e2e38ebc3e42c94d8050","slug":"hathras-corona-along-with-protection-from-dengue-and-malaria-is-also-necessary-hathras-news-ali237059290","type":"story","status":"publish","title_hn":"हाथरस: कोरोना के साथ डेंगू और मलेरिया से बचाव भी आवश्यक","category":{"title":"City & states","title_hn":"शहर और राज्य","slug":"city-and-states"}}
हाथरस: कोरोना के साथ डेंगू और मलेरिया से बचाव भी आवश्यक
विज्ञापन
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, हाथरस
कोरोना संक्रमण के दौर में स्वास्थ्य अमला मौसमी बीमारियों के प्रति भी लोगों को जागरूक कर रहा है। जुलाई में मलेरिया और डेंगू के मामले सामने आने लगते हैं। जैसे ही पहली और दूसरी बारिश होती है, इन दोनों रोग का प्रकोप बढ़ जाता है। कोरोना के दौर में भी स्वास्थ्य विभाग इन दोनों बीमारियों को फैलने से रोकने के लिए कमर कस चुका है।
जिला मलेरिया अधिकारी एम जौहरी ने बताया कि फिलहाल छिड़काव शुरू करा दिया गया है। कोशिश यही है कि मलेरिया का प्रकोप नहीं फैले। मलेरिया के साथ डेंगू भी फैलता है। लोगों को बताया जा रहा है कि मलेरिया व डेंगू के यदि कोई लक्षण दिखते हैं तो वह तत्काल चिकित्सक से संपर्क करें ताकि कोरोना के दौर में यह दोनों बीमारियां अपना असर न डाल सकें। सहायक मलेरिया अधिकारी एसपी गौतम ने बताया कि ऐसे मौसम में सावधानी रखना बेहद आवश्यक है।
डेंगू के लक्षण
-डेंगू की शुरुआत तेज बुखार, सिरदर्द और पीठ में दर्द से होती है। शुरू के तीन से चार घंटों तक जोड़ों में भी बहुत दर्द होता है।
-आंखें लाल हो जाती हैं और गले के पास की लिम्फ नोड सूज जाते हैं। डेंगू बुखार 2 से 4 दिन तक रहता है और फिर धीरे धीरे तापमान नार्मल हो जाता है।
- मरीज ठीक होने लगता है और फिर से तापमान बढ़ने लगता है। पूरे शरीर में दर्द होता है। हथेली और पैर भी लाल होने लगते हैं।
-डेंगू हिमोरेगिक बुखार सबसे खतरनाक माना जाता है, जिसमें बुखार के साथ.साथ शरीर में खून की कमी हो जाती है। शरीर में लाल या बैंगनी रंग के फफोले पड़ जाते हैं। नाक या मसूड़ों से खून आने लगता है। स्टूल का भी रंग काला हो जाता है। यह डेंगू की सबसे खतरनाक स्थिति होती है।
विज्ञापन
डेंगू से बचाव
- डेंगू से बचने के लिए मच्छरों से बचना बहुत जरूरी है, जिनसे डेंगू के वायरस फैलते हैं।
- ऐसी जगह जहां डेंगू फैल रहा है, वहां पानी को रुकने नहीं देना चाहिए जैसे प्लास्टिक बैग, कैन, गमले या सड़कों या कूलर में जमा पानी।
- मच्छरों से बचने का हर संभव प्रयास करना चाहिए जैसे मच्छरदानी लगाना, पूरी बांह के कपड़े पहनना आदि।
- पानी भंडारण के बर्तनों को ढक्कन से ढका जाना चाहिए।
-सप्ताह मे एक बार कूलर की सफाई करें, हर रविवार मच्छर पर वार
-वर्षा के मौसम में छत पर रखे पुराने बर्तन, गमलों, टायर इत्यादि में पानी इकट्ठा नहीं होने दें
मलेरिया के लक्षण-
-तेज बुखार के साथ ठंड लगना, उल्टी, दस्त, तेज पसीना आना तथा शरीर का तापमान 100 डिग्री सेंटीग्रेड से ऊपर बढ़ जाना ,सिर दर्द, शरीर में जलन तथा मलेरिया होने के पश्चात शरीर में कमजोरी आदि।
मलेरिया से बचाव-
- घर के आसपास पानी एकत्रित नहीं होने दें।
--सोते समय मच्छरदानी का प्रयोग करें। मच्छर प्रतिकर्षित करने वाली क्रीम का उपयोग करें।
-नीम की पत्ती का धुआं करें।
-बुखार आने पर नजदीक के स्वास्थ्य केंद्र में अथवा आशा कार्यकर्ता से रक्त की जांच अवश्य कराएं।
-घर के आसपास कूड़ा एकत्र नहीं होने दें।
-बुखार के रोगी बिना रक्त की जांच कराए दवा का इस्तेमाल नहीं करें तथा खाली पेट मलेरिया की दवा नहीं खाएं।
-संभावित मलेरिया रोगी एस्प्रिन, ब्रूफेन आदि दवाओं का सेवन नहीं करें।
विज्ञापन
कोरोना संक्रमण के दौर में स्वास्थ्य अमला मौसमी बीमारियों के प्रति भी लोगों को जागरूक कर रहा है। जुलाई में मलेरिया और डेंगू के मामले सामने आने लगते हैं। जैसे ही पहली और दूसरी बारिश होती है, इन दोनों रोग का प्रकोप बढ़ जाता है। कोरोना के दौर में भी स्वास्थ्य विभाग इन दोनों बीमारियों को फैलने से रोकने के लिए कमर कस चुका है।
जिला मलेरिया अधिकारी एम जौहरी ने बताया कि फिलहाल छिड़काव शुरू करा दिया गया है। कोशिश यही है कि मलेरिया का प्रकोप नहीं फैले। मलेरिया के साथ डेंगू भी फैलता है। लोगों को बताया जा रहा है कि मलेरिया व डेंगू के यदि कोई लक्षण दिखते हैं तो वह तत्काल चिकित्सक से संपर्क करें ताकि कोरोना के दौर में यह दोनों बीमारियां अपना असर न डाल सकें। सहायक मलेरिया अधिकारी एसपी गौतम ने बताया कि ऐसे मौसम में सावधानी रखना बेहद आवश्यक है।
विज्ञापन
डेंगू के लक्षण
-डेंगू की शुरुआत तेज बुखार, सिरदर्द और पीठ में दर्द से होती है। शुरू के तीन से चार घंटों तक जोड़ों में भी बहुत दर्द होता है।
-आंखें लाल हो जाती हैं और गले के पास की लिम्फ नोड सूज जाते हैं। डेंगू बुखार 2 से 4 दिन तक रहता है और फिर धीरे धीरे तापमान नार्मल हो जाता है।
- मरीज ठीक होने लगता है और फिर से तापमान बढ़ने लगता है। पूरे शरीर में दर्द होता है। हथेली और पैर भी लाल होने लगते हैं।
-डेंगू हिमोरेगिक बुखार सबसे खतरनाक माना जाता है, जिसमें बुखार के साथ.साथ शरीर में खून की कमी हो जाती है। शरीर में लाल या बैंगनी रंग के फफोले पड़ जाते हैं। नाक या मसूड़ों से खून आने लगता है। स्टूल का भी रंग काला हो जाता है। यह डेंगू की सबसे खतरनाक स्थिति होती है।
विज्ञापन
डेंगू से बचाव
- डेंगू से बचने के लिए मच्छरों से बचना बहुत जरूरी है, जिनसे डेंगू के वायरस फैलते हैं।
- ऐसी जगह जहां डेंगू फैल रहा है, वहां पानी को रुकने नहीं देना चाहिए जैसे प्लास्टिक बैग, कैन, गमले या सड़कों या कूलर में जमा पानी।
- मच्छरों से बचने का हर संभव प्रयास करना चाहिए जैसे मच्छरदानी लगाना, पूरी बांह के कपड़े पहनना आदि।
- पानी भंडारण के बर्तनों को ढक्कन से ढका जाना चाहिए।
-सप्ताह मे एक बार कूलर की सफाई करें, हर रविवार मच्छर पर वार
-वर्षा के मौसम में छत पर रखे पुराने बर्तन, गमलों, टायर इत्यादि में पानी इकट्ठा नहीं होने दें
मलेरिया के लक्षण-
-तेज बुखार के साथ ठंड लगना, उल्टी, दस्त, तेज पसीना आना तथा शरीर का तापमान 100 डिग्री सेंटीग्रेड से ऊपर बढ़ जाना ,सिर दर्द, शरीर में जलन तथा मलेरिया होने के पश्चात शरीर में कमजोरी आदि।
मलेरिया से बचाव-
- घर के आसपास पानी एकत्रित नहीं होने दें।
--सोते समय मच्छरदानी का प्रयोग करें। मच्छर प्रतिकर्षित करने वाली क्रीम का उपयोग करें।
-नीम की पत्ती का धुआं करें।
-बुखार आने पर नजदीक के स्वास्थ्य केंद्र में अथवा आशा कार्यकर्ता से रक्त की जांच अवश्य कराएं।
-घर के आसपास कूड़ा एकत्र नहीं होने दें।
-बुखार के रोगी बिना रक्त की जांच कराए दवा का इस्तेमाल नहीं करें तथा खाली पेट मलेरिया की दवा नहीं खाएं।
-संभावित मलेरिया रोगी एस्प्रिन, ब्रूफेन आदि दवाओं का सेवन नहीं करें।