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हाथरस : शव की अंत्येष्टि के लिए पहले हुआ विवाद , बाद में समझौता

Wed, 21 Dec 2022 05:30 AM IST
Aligarh Bureau अलीगढ़ ब्यूरो
Updated Wed, 21 Dec 2022 05:30 AM IST
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Hathras: Controversy first for the funeral of the dead body, later agreement
हाथरस : वाल्मीकि समाज के लोगों को समझाते ग्राम प्रधान धाधऊ सुरेश कुमार। संवाद - फोटो : SHAPHU
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, सहपऊ (हाथरस)
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क्षेत्र के गांव नगला सेवा में वाल्मीकि समाज के एक व्यक्ति की मौत हो गई। जब लोग उसके शव को जलाने के लिए एक स्थान पर लेकर आए तो जाटव समाज के एक व्यक्ति से उनका विवाद हो गया। गांव नगला सेवा निवासी 45 वर्षीय रामबाबू की मंगलवार को सुबह बीमारी से मौत हो गई । जब मृतक के दाह संस्कार के लिए गिरजेश की जमीन पर कंडे एवं लकड़ी पहुंचाई तो वहां दाह संस्कार कराने से मना कर दिया गया।
इसके बाद गिरजेश ने कोतवाली में आकर मौखिक रूप से उसके खेतों में वाल्मीकि समाज द्वारा मृतक के दाह संस्कार करने की शिकायत भी कर दी । उल्लेखनीय है 31 जुलाई 2020 को वाल्मीकि समाज के एक युवक की सड़क हादसे में मौत हो गई थी। उस समय भी उसके शव के दाह संस्कार को लेकर वाद विवाद हुआ था । जिस स्थान पर वाल्मीकि समाज अपने समाज के मृत लोगों का दाह संस्कार करते है, वह गांव के गिरजेश पुत्र निरंजन सिंह की निजी जमीन है, जिस पर वह खेती करता है। मृतक के पुत्र अरूण का कहना है कि उनके पूर्वजों का दाह संस्कार उसी जमीन पर होता आया है । अत: उसके पिताजी का भी दाह संस्कार वहीं होना चाहिए।
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ग्राम पंचायत धाधऊ में नगला चक्की, नगला सेवा एवं नगला मनी गांव शामिल है। इन चारों गांवों का गांव धाधऊ में श्मशान भी है । उक्त चारों गांव के लोग अपने परिवार के किसी भी सदस्य की मौत हो जाने पर उसका अंतिम संस्कार खेतों पर ही करते हैं। नगला सेवा में केवल वाल्मीकि समाज के तीन परिवार ही रहते है। उनके पास ऐसी कोई निजी जमीन नहीं है। जिस पर वह दाह संस्कार कर सकें ।
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मृतक के दाह संस्कार करने के लिए जब दोनों पक्षों में विवाद बढ़ने लगा तो प्रधान सुरेश ने दोनों पक्षों को काफी समझाया। इस पर गिरजेश ने इस शर्त पर दाह संस्कार करने के अनुमति दी कि इसके बाद कोई दूसरा संस्कार नहीं होगा। प्रधान से अपने समाज के लिए श्मशान की भूमि का आवंटन करा लें। बाद में दोनों पक्षों में समझौता होने के बाद मृतक का दाह संस्कार कर दिया गया। संवाद
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