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हाथरस लोकसभा से दो बार सांसद रहे चंद्रपाल शैलानी का निधन
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हाथरस : पूर्व सांसद चंद्रपाल शैलानी। फाइल फोटो
- फोटो : SIKANDHRA RAHU
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संवाद न्यूज एजेंसी, सिकंदराराऊ (हाथरस)।
हाथरस लोकसभा क्षेत्र से दो बार सांसद रहे सिकंदराराऊ के नौरंगाबाद निवासी चंद्रपाल शैलानी (80 वर्ष) का दिल्ली के राममनोहर लोहिया अस्पताल में मंगलवार को इलाज के दौरान निधन हो गया। दोपहर में उनका शव उनके आवास पर पहुंचा। शव पहुंचते ही अंतिम दर्शन के लिए भीड़ उमड़ पड़ी। गाजे-बाजे के साथ उनकी अंतिम यात्रा निकाली गई और राजकीय सम्मान के साथ उनके शव का अंतिम संस्कार किया गया।
उनके निधन पर जिला कांग्रेस अध्यक्ष चंद्रगुप्त विक्रमादित्य, ओमप्रकाश गौतम, पंकज गुप्ता, प्रिंस गुप्ता, ताहिर अली तार बाबू, मेहराज कुरैशी, पूर्व विधायक यशपाल सिंह चौहान, सुरेश प्रताप गांधी, व्यापारी नेता विपिन वार्ष्णेय, डॉ. उपेंद्र वार्ष्णेय, नीरज अग्रवाल, विकास वार्ष्णेय, जयपाल सिंह चौहान, राकेश गुप्ता ने शोक व्यक्त किया है। शैलानी का जन्म तीन जनवरी 1940 को चुन्नीलाल के घर में हुआ था।
स्वभाव से सहज निर्मल चंद्रपाल शैलानी युवावस्था से ही सामाजिक कुरीतियों के विरोधी रहे। कम उम्र में ही उनके पिता का निधन हो गया था। उनका लालन-पालन बड़े भाई सूरजपाल शैलानी ने किया। 1957 में शिड्यूल कास्ट फेडरेशन पार्टी में शामिल हुए।
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1967 में आंबेडकर स्मारक जूनियर हाई स्कूल व प्रबुद्घ भारती बाल विहार की स्थापना की। 1971 में पहली बार 29 वर्ष की आयु में कांग्रेस के टिकट पर सांसद बने। आपातकाल के दौरान वह चुनाव हार गए। उसके बाद कांग्रेस से टिकट नहीं मिलने पर वह 1980 में लोकदल के टिकट पर चुनाव लड़े और दूसरी बार सांसद बने। शैलानी ने ही लखनऊ एक्सप्रेस का सिकंदराराऊ में ठहराव कराया था।
कोल व सासनी से भी लड़े थे विधायकी का चुनाव
शैलानी संसद में अपनी बेबाक टिप्पणियों के लिए हमेशा चर्चा में रहे। दूसरी बार सांसद चुनने के बाद इंदिरा गांधी के आग्रह पर वह कांग्रेस में शामिल हो गए। 1990 में हसायन के गांव इनायतपुर में दलित बालिका की दुष्कर्म के बाद हत्या के विरोध में शैलानी ने उग्र प्रदर्शन किया। इस दौरान हुई हिंसा में कई लोगों की जान गई, सरकारी बसों को आग लगाई गई। इस प्रकरण में शैलानी पर राष्ट्रीय सरक्षा कानून (एनएसए) के तहत कार्रवाई भी हुई। वे अलीगढ़ की कोल व हाथरस की सासनी विधानसभा क्षेत्र से भी चुनाव लड़े थे।
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हाथरस लोकसभा क्षेत्र से दो बार सांसद रहे सिकंदराराऊ के नौरंगाबाद निवासी चंद्रपाल शैलानी (80 वर्ष) का दिल्ली के राममनोहर लोहिया अस्पताल में मंगलवार को इलाज के दौरान निधन हो गया। दोपहर में उनका शव उनके आवास पर पहुंचा। शव पहुंचते ही अंतिम दर्शन के लिए भीड़ उमड़ पड़ी। गाजे-बाजे के साथ उनकी अंतिम यात्रा निकाली गई और राजकीय सम्मान के साथ उनके शव का अंतिम संस्कार किया गया।
उनके निधन पर जिला कांग्रेस अध्यक्ष चंद्रगुप्त विक्रमादित्य, ओमप्रकाश गौतम, पंकज गुप्ता, प्रिंस गुप्ता, ताहिर अली तार बाबू, मेहराज कुरैशी, पूर्व विधायक यशपाल सिंह चौहान, सुरेश प्रताप गांधी, व्यापारी नेता विपिन वार्ष्णेय, डॉ. उपेंद्र वार्ष्णेय, नीरज अग्रवाल, विकास वार्ष्णेय, जयपाल सिंह चौहान, राकेश गुप्ता ने शोक व्यक्त किया है। शैलानी का जन्म तीन जनवरी 1940 को चुन्नीलाल के घर में हुआ था।
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स्वभाव से सहज निर्मल चंद्रपाल शैलानी युवावस्था से ही सामाजिक कुरीतियों के विरोधी रहे। कम उम्र में ही उनके पिता का निधन हो गया था। उनका लालन-पालन बड़े भाई सूरजपाल शैलानी ने किया। 1957 में शिड्यूल कास्ट फेडरेशन पार्टी में शामिल हुए।
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1967 में आंबेडकर स्मारक जूनियर हाई स्कूल व प्रबुद्घ भारती बाल विहार की स्थापना की। 1971 में पहली बार 29 वर्ष की आयु में कांग्रेस के टिकट पर सांसद बने। आपातकाल के दौरान वह चुनाव हार गए। उसके बाद कांग्रेस से टिकट नहीं मिलने पर वह 1980 में लोकदल के टिकट पर चुनाव लड़े और दूसरी बार सांसद बने। शैलानी ने ही लखनऊ एक्सप्रेस का सिकंदराराऊ में ठहराव कराया था।
कोल व सासनी से भी लड़े थे विधायकी का चुनाव
शैलानी संसद में अपनी बेबाक टिप्पणियों के लिए हमेशा चर्चा में रहे। दूसरी बार सांसद चुनने के बाद इंदिरा गांधी के आग्रह पर वह कांग्रेस में शामिल हो गए। 1990 में हसायन के गांव इनायतपुर में दलित बालिका की दुष्कर्म के बाद हत्या के विरोध में शैलानी ने उग्र प्रदर्शन किया। इस दौरान हुई हिंसा में कई लोगों की जान गई, सरकारी बसों को आग लगाई गई। इस प्रकरण में शैलानी पर राष्ट्रीय सरक्षा कानून (एनएसए) के तहत कार्रवाई भी हुई। वे अलीगढ़ की कोल व हाथरस की सासनी विधानसभा क्षेत्र से भी चुनाव लड़े थे।